Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में भारी बारिश और ओलावृष्टि के बाद भयंकर भूस्खलन ने सबकुछ तबाह कर दिया. लोगों ने जो घर वर्षों में बनाया था, वो एक ही रात में मलबे में दफन हो गया. इस प्राकृतिक आपदा में तीन लोगों की जान चली गई और दर्जनों परिवार बेघर हो गए.

रामबन के धर्म कुंड गांव सहित कई इलाकों में करीब 40 घरों को नुकसान पहुंचा, जिनमें से 10 पूरी तरह ध्वस्त हो गए. घटनास्थल की तबाही स्थानीय लोगों की आंखों में आज भी कैद है.

'जब पहुंचे तो देखा पूरा बाजार गायब था'रामबन के रहने वाले ओम सिंह ने बताया, "मैं थोड़ी दूरी पर रहता हूं. वहां से पानी का बहाव बहुत तेज था. जब मैं मौके पर पहुंचा, तो देखा कि मेरी दुकान समेत पूरा बाजार ही गायब हो चुका था. ऐसा मैंने पहले कभी नहीं देखा."

'दो दुकानें थीं, अब कुछ नहीं बचा'दुकानदार रवि कुमार ने कहा, "मेरी दो दुकानें थीं. सुबह 4 बजे पता चला कि पूरा बाजार बह गया है. जब यहां पहुंचे तो कुछ नहीं बचा था. हमें समझ नहीं आ रहा था कि किससे मदद मांगें. ये दुकानें ही कमाई का जरिया थीं, अब न दुकान बची है, न जमीन. मैं सरकार से मदद की अपील करता हूं, हमारे पास अब कुछ भी नहीं है. कृपया हमारे कर्ज माफ किए जाएं."

मलबे में दबी कारेंस्थानीय निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उनकी नई कार भी मलबे में दब गई. उन्होंने कहा, "मैं श्रीनगर जा रहा था, लेकिन बारिश के कारण रामबन में रुक गया. सुबह 3 बजे भूस्खलन हुआ. होटल की दो मंजिलें मलबे में दब गईं. ऊपर की मंजिल पर 15 लोग थे, जिन्हें हमने सुरक्षित बाहर निकाला. मेरी कार समेत 8-10 गाड़ियां मलबे में दब गई हैं."

पुलिस और सेना का रेस्क्यू ऑपरेशनरामबन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुलबीर सिंह ने बताया कि सभी थानों को अलर्ट पर रखा गया है. करीब 100 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. इसके अलावा भारतीय सेना लगातार भोजन, दवाइयां और आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रही है. 

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रियाजम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अधिकारी स्थिति पर निगरानी रखे हुए हैं और राहत कार्य प्राथमिकता पर हैं. स्थानीय प्रशासन को तुरंत राहत और बचाव कार्य के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भूस्खलन की वजह से NH-44 बंद हो गया है और प्रशासन लोगों को राहत पहुंचा रहा है.

धर्म कुंड गांव में भारी नुकसानधर्म कुंड गांव में अचानक आई बाढ़ से करीब 40 घर प्रभावित हुए हैं. इनमें से 10 घर पूरी तरह ढह गए जबकि बाकी को आंशिक नुकसान पहुंचा. भारतीय सेना भी राहत कार्य में लगी है और लोगों को खाने-पीने की चीजें और दवाइयाँ मुहैया करवा रही है.

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