ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बाद बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटें भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं. भारत की लगभग 45 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें खाड़ी क्षेत्र से होकर आने वाली आपूर्ति पर निर्भर हैं, ऐसे में हालात गंभीर बने हुए हैं. स्थिति को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात कर दिए हैं ताकि समुद्र में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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नौसेना की तैनाती और ऑपरेशनभारतीय नौसेना ने इस समय करीब सात जहाज तैनात किए हैं, जिनमें कई तरह के सपोर्ट वेसल शामिल हैं. ये तैनाती पहले से मौजूद दो टास्क फोर्स के साथ मिलकर काम कर रही है, जो उत्तर अरब सागर से भारतीय बंदरगाहों तक जहाजों को सुरक्षा देती हैं. यह पूरा अभियान 2019 से चल रहे ऑपरेशन ‘संकल्प’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य एलपीजी और ईंधन लेकर आने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है.

जहाजों की सुरक्षा के लिए कदमअब तक तीन भारतीय एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है. हालांकि विदेश मंत्रालय के अनुसार अभी भी 20 से अधिक भारतीय व्यापारिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में मौजूद हैं. इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भारतीय अधिकारी ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं.

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विकल्प तलाशने में मुश्किलसमुद्री मामलों के विशेषज्ञ कमोडोर रणजीत राय के अनुसार भारत के पास होर्मुज स्ट्रेट का तुरंत कोई आसान विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम है और सप्लाई बदलने पर लागत काफी बढ़ सकती है. रूस, अमेरिका या वेनेजुएला से आयात बढ़ाने या दूसरे रास्ते अपनाने जैसे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इनमें ट्रांसपोर्ट लागत ज्यादा है.

नए रास्तों पर विचारएक विकल्प के तौर पर सऊदी अरब के जेद्दा से तेल को जमीन के रास्ते लाकर फिर अदन की खाड़ी के जरिए भेजने पर विचार किया जा रहा है. हालांकि इसकी व्यवहारिकता और लागत को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि होर्मुज के अलावा किसी भी रास्ते से तेल लाने पर कीमतें बढ़ सकती हैं. साथ ही, सीमित शिपिंग मूवमेंट के कारण भारत में एलपीजी की कमी की स्थिति भी बन रही है.

वैश्विक स्तर पर नौसेना की मौजूदगीभारतीय नौसेना ने 2017 से मिशन-बेस्ड तैनाती की रणनीति अपनाई है, जिसके तहत वह दुनिया के छह अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार मौजूद रहती है. ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के अलावा, नौसेना सेशेल्स, मालदीव, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और बंगाल की खाड़ी में म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास भी तैनात है. इन तैनातियों का मकसद सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास और समुद्री आपात स्थितियों से निपटना है.

आगे की रणनीतिमौजूदा संघर्ष का कोई साफ समाधान नजर नहीं आ रहा है, ऐसे में भारतीय नौसेना हर स्थिति के लिए तैयार है. कमोडोर रणजीत राय ने कहा कि आगे की रणनीति हालात और ईरान की ओर से मिलने वाले आश्वासनों पर निर्भर करेगी. फिलहाल भारत कूटनीति, सैन्य तैयारी और वैकल्पिक योजनाओं के जरिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है.