नई दिल्ली: दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल को लेकर चौंकाने वाला दावा हो रहा है. दावा है कि योगी सरकार ने ताजमहल को उत्तर प्रदेश पयर्टन सूची से बाहर निकाल दिया है. लोग ये बात जानकर हैरान हो रहे हैं कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? यूपी की पर्यटन सूची से ताजमहल के बाहर होने का सच क्या है? क्या योगी सरकार ने ताजमहल को उत्तर प्रदेश की पर्यटन सूची से बाहर निकाल दिया है? क्या अब प्यार की निशानी माना जाने वाला ताजमहल उत्तर प्रदेश में पर्यटन का केंद्र नहीं रहा? ये सवाल इसलिए क्योंकि सुबह कई अखबारों में ये खबर छपी कि ताजमहल यूपी की पर्यटन सूची से बाहर कर दिया गया है. ये खबर सोशल मीडिया पर भी आग की तरह फैल गई और लोग ताजमहल को पर्यटन सूची से हटाए जाने की चर्चा करने लगे. इस दावे पर कुछ लोगों ने नाराजगी जताते हुए फेसबुक पर लिखा, ‘’प्यार की निशानी ताजमहल हुआ योगी की नफरत का शिकार.’’ लेकिन सवाल ये है कि क्या वाकई ताजमहल को यूपी पर्यटन की लिस्ट से बाहर कर दिया गया है? और अगर हटाया गया है तो क्यों?
ये दावा हैरान करता है क्योंकि ताजमहल में हर साल 70 से 80 लाख पर्यटक आते हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मुताबिक, मौजूदा साल में जनवरी से अगस्त महीने के बीच लगभग 42 लाख पर्यटक ताजमहल देखने पहुंचे थे, इनमे से लगभग 5 लाख पर्यटकों की संख्या विदेशी थी. ताजमहल में आने वाले पर्यटकों से यूपी सरकार को होने वाली कमाई का आंकड़ा 2015-16 में ताजमहल से यूपी सरकार को 23.38 करोड़ की कमाई हुई. 2016-17 में ताजमहल से 8.31 करोड़ रुपया यूपी सरकार के खाते में पहुंचा. बता दें कि कमाई का ये आंकड़ा जून 2016 तक का है. सिर्फ टिकट की बिक्री से 25 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी. तो भला सरकार ताजमहल को पर्यटन सूची से बाहर करने की गलती क्यों करेगी? क्या है पूरा सच? उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट में पर्यटन स्थल के रुप में ताजमहल का नाम शामिल है, लेकिन इससे इस बात की पुष्टी नहीं हो सकती थी कि ताजमहल अब भी पर्यटन स्थलों में शामिल है, क्योंकि हो सकता है इतनी जल्दी वेबसाइट से ताजमहल का नाम ना हटाया गया हो.
ताजमहल को पर्यटन सूची से बाहर नहीं किया गया है इस बात की पुष्टि खुद उत्तर प्रदेश की पर्यटन में मंत्री रीता बहुगुणा ने भी कर दी है. इसलिए हमारी पड़ताल में यूपी की पर्यटन सूची से ताजमहल के आउट होने वाला दावा झूठा साबित हुआ है.