नई दिल्ली: चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा ने आज सोनिया गांधी के सामने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया. 2014 में अलका लांबा कांग्रेस पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गई थीं. 2015 के विधानसभा चुनाव में अलका लांबा पहली बार चांदनी चौक से विधायक बनीं. छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाली अलका लांबा दिल्ली यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष रहीं. वे ऑल इंडिया एनएसयूआयी की अध्यक्ष और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव भी रहीं.

10 अगस्त को सोनिया गांधी ने कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभाला और उसके बाद से संगठन और पुराने कांग्रेस नेताओं में एक उम्मीद जगी. लगभग सभी राज्यों में कांग्रेस गुटों में बंटी हुई थी और हर दिन कांग्रेस से किसी न किसी नेता के छोड़ने की खबरें आती थीं. अलका लांबा की घर वापसी के अलावा हाल ही में बिहार के नेता शकील अहमद ने सोनिया गांधी से मुलाकात की जिन्हें लोक सभा चुनाव के दौरान पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था.

ओडिशा कांग्रेस के अध्यक्ष निरंजन पटनायक हो या फिर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा दोनों ही नेताओ ने इशारों इशारों में ये बता दिया था कि वह कांग्रेस को अलविदा कहने वाले हैं लेकिन सोनिया गांधी और उनकी टीम ने कांग्रेस के भीतर जो नेता है उन्हें तो जाने से रोका. इसके साथ ही जो लोग पहले कांग्रेस छोड़कर जा चुके हैं उन्हें भी एकजुट करने की कोशिश सोनिया गांधी की तरफ़ से हो रही है.

सोनिया गांधी के आने से कांग्रेस के पुराने नेताओं को यह लगने लगा है कि अब उनकी बात सुनी जाएगी. इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के पार्टी नेताओं का झगड़ा है. मध्य प्रदेश में पार्टी नेताओं के झगड़े को लेकर सोनिया गांधी ने वहां की भी रिपोर्ट मांग ली है. क्या सोनिया गांधी बिखरी हुई कांग्रेस को एकजुट कर पाएंगी ये देखना होगा.