Iran-US War: तेल-LPG की टेंशन खत्म? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से भारत को होगा बड़ा फायदा, जानें पूरी बात
Iran-US War: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दिया है. इससे भारत को राहत मिलेगी. वहीं तेल की कीमतों में गिरावट और सप्लाई में सुधार देखने को मिल सकता है.

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का फैसला किया है. ये भारत के लिए राहत भरी खबर है. भारत अपनी करीब 50 प्रतिशत तेल जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है और युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा था. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के मुताबिक, यह फैसला ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम की अवधि तक लागू रहेगा. इससे इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में फंसे करीब 15 भारतीय जहाज अब सुरक्षित तरीके से भारत लौट सकेंगे.
भारत सरकार की तरफ से इस फैसले पर तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत का हिस्सा है, जिससे 50 दिनों से चल रहे इस युद्ध को खत्म करने की कोशिश हो रही है. भारत पहले ही कई देशों के नेताओं से बातचीत में इस रास्ते को खोलने की जरूरत पर जोर दे चुका था, ताकि व्यापार और जहाजों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रह सके.
तेल की कीमतों पर ईरान युद्ध का असर
इस फैसले का असर तेल की कीमतों पर भी दिखा है. जहां युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं मार्च के अंत तक यह 119 डॉलर तक पहुंच गई थी. अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर से नीचे आ गई है, जो भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए राहत की बात है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खुला है, हालांकि ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी रोक तब तक जारी रहेगी जब तक अंतिम समझौता नहीं हो जाता. वहीं ईरान ने कहा है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को शुल्क देना पड़ सकता है, लेकिन भारत ने साफ किया है कि इस बारे में उसकी कोई बातचीत नहीं हुई है.
ओमान की खाड़ी में युद्धपोत तैनात
सुरक्षा के लिहाज से भारत ने ओमान की खाड़ी में अपने युद्धपोत तैनात किए हैं, ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके. हालांकि भारत ने किसी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल में शामिल होने का संकेत नहीं दिया है. इस बीच भारत सरकार ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने में भी लगी हुई है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को यूएई और कतर भेजा गया है, ताकि तेल और गैस की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहे. माना जा रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने के बाद भी भारत इन कोशिशों को जारी रखेगा, ताकि क्षेत्र में हुए नुकसान और सप्लाई पर पड़ने वाले असर को समझा जा सके.
Source: IOCL


























