इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है. इस मामले को लेकर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. कांग्रेस का कहना है कि नए साल की शुरुआत कई परिवारों के लिए मातम लेकर आई है और इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार की नीतियों और प्रशासनिक विफलता पर जाती है.
कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया चेयरमैन पवन खेड़ा ने इंदौर की घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि स्वच्छ भारत मिशन और हर घर नल योजना की जमीनी हकीकत अब जनता के सामने आ गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि जुलाई 2022 में पानी की पुरानी पाइपलाइन बदलने के लिए टेंडर को मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद काम शुरू नहीं किया गया. इसी लापरवाही का नतीजा है कि दूषित पानी लोगों की जान ले रहा है.
राज्य सरकार पर तीखा हमला
पवन खेड़ा ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि एक तरफ अमृतकाल की बातें की जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ लोगों को ज़हरीली हवा, मिलावटी खाना और गंदा पानी मिल रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि यह किस तरह का विकास मॉडल है, जहां बुनियादी जरूरतें भी सुरक्षित नहीं हैं.
बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया पर भी नाराजगी
कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया पर भी नाराजगी जताई. पवन खेड़ा ने कहा कि जब जनता जवाब मांग रही है, तब कुछ नेता गैर-जिम्मेदार बयान दे रहे हैं और मुख्यमंत्री इस गंभीर मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि देश में करीब 70 प्रतिशत पानी दूषित हो चुका है, दवाइयों और कफ सिरप में मिलावट के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय राजनीतिक शोर में दबा रही है.
हर घर जल योजना निशाने पर
कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा कि यह हर घर जल योजना नहीं, बल्कि हर घर मल योजना बनती जा रही है और इसकी नैतिक जिम्मेदारी उन नेताओं की है जो बड़े-बड़े नारे देकर सत्ता में आए हैं. उन्होंने एशियन डेवलपमेंट बैंक से मिले 200 मिलियन डॉलर के कर्ज को लेकर भी सवाल उठाए, जो भोपाल, इंदौर और जबलपुर में जल आपूर्ति सुधार के लिए लिया गया था. कांग्रेस ने पूछा कि आखिर वह पैसा कहां खर्च हुआ.
कांग्रेस ने अहम सवालों के जवाब मांगे
इसके साथ ही कांग्रेस ने सरकार से कई अहम सवालों के जवाब मांगे हैं. पार्टी ने जानना चाहा है कि क्या मृतकों के स्टूल सैंपल की जांच कराई गई, जांच में हैजा के बैक्टीरिया की पुष्टि हुई या नहीं, और अगर हैजा पाया गया तो क्या इसे विधिवत नोटिफाई किया गया. कांग्रेस ने यह भी पूछा कि क्या राज्य सरकार ने इस मामले की जानकारी केंद्र सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को दी. कुल मिलाकर इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुका है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है.