दिल्ली में प्रदूषण का लेवल लगातार खतरनाक श्रेणी में बना हुआ है. वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400-500 के बीच है. वायु प्रदूषण को देखते हुए स्कूल बंद कर दिए गए हैं और 13 नवंबर से दिल्ली सरकार अपनी सात साल पुरानी योजना ऑड-ईवन को लागू करने जा रही है ताकि प्रदूषण कम हो. वायु प्रदूषण से बचने के लिए घर के अंदर रहना बेहतर विकल्प है, लेकिन क्या घर के अंदर की हवा सांस लेने के लिए शुद्ध है. 

जब कण और गैसों के कुछ वायु प्रदूषक घर के अंदर या ऑफिस की हवा को खराब करने लगते हैं, तो इससे इनडोर पॉल्यूशन होता है. यह भी उतना ही खतरनाक है, जितनी बाहर की हवा. दोनों ही प्रदूषण हार्ट अटैक और कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का कारण बनते हैं, जिस वजह से दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है. दोनों प्रदूषणों के कारण सबसे ज्यादा मौतें दिल से जुड़ी बीमारियों और ब्रेन स्ट्रोक से होती हैं. ऐसे मरीजों के लिए यह बेहद जरूरी है कि उन्हें अच्छे वातावरण में रखा जाए और खुद भी वह योग करके खुद को स्वस्थ रखें. इनडोर और आउटडोर पॉल्यूशन से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं आइए जानते हैं-

आउटडोर पॉल्यूशन से होने वाली बीमारियां, जिनसे होती है मौत-

हार्ट डीजीजहवा में इतने प्रदूषक कण हैं, जो हार्ट से जुड़ी बीमारियों का कारण बनते हैं और 40 फीसदी मौतें इसकी वजह से होती हैं.

ब्रेन स्ट्रोकदिमाग की किसी नस में खून का प्रवाह रुक जाने या फट जाने पर ब्लॉकेज हो जाती है, जिससे स्ट्रोक होता है. देश में इस बीमारी से होने वाली मौतों में 40 फीसदी केस होते हैं, जिसका एक कारण एयर पॉल्यूशन है.

फेफड़ों से जुड़ी बीमारियांवायु प्रदूषण के कारण लोगों को फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो इस हद तक बढ़ जाती है कि जान चली जाती है. आउटडोर पॉल्यूशन से होने वाली क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज (COPD) में 11 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है.

लंग कैंसरआउटडोर पॉल्यूशन लंग कैंसर का भी कारण बनता है. 6 फीसदी मौतें इस बीमारी से होती हैं.

बच्चों में सांस की समस्याआउटडोर वायु प्रदूषण से बच्चों में सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. इससे 3 फीसदी मौतें भी हो जाती हैं.

इनडोर पॉल्यूशन से होने वाली बीमारियां, जिनसे होती है मौत-

हार्ट डिजीजइनडोर पॉल्यूशन के कारण हार्ट संबंधी बीमारियां होती हैं और इनडोर पॉल्यूशन 26 फीसदी मौतों का कारण बनता है.

ब्रेन स्ट्रोकघर के अंदर के प्रदूषण से ब्रेन स्ट्रोक जैसी समस्याएं भी होती हैं, जिनसे मौत हो जाती है.

फेफड़ों से जुड़ी समस्याएंफेफड़ों से जुड़ी बीमारियां मौत का कारण बन जाती हैं और इनडोर पॉल्यूशन के कारण ऐसी बीमारियां पैदा होती हैं. इससे 22 फीसदी मौतें होती हैं.

बच्चों में सांस लेने में दिक्कत संबंधी बीमारियांबच्चों में सांस लेने में दिक्कत संबंधी बीमारियों से 12 फीसदी मौतें इनडोर पॉल्यूशन के कारण होती हैं

लंग कैंसरलंग कैंसर से मौतों के 6 फीसदी मामले इनडोर पॉल्यूशन के होते हैं.

कैसे होता है इनडोर पॉल्यूशनविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर की 2.4 अरब  आबादी खाना बनाने के लिए ओपन फायर जैसे कि चूल्हा, कैरोसिन से जलने वाले स्टोव और बायोमास (लकड़ी, जानवरों के गोबर से बने उपले या फसल के वेस्ट) का इस्तेमाल करते हैं. इस तरह के ईंधन से बहुत खतरनाक गैसें निकलती हैं, जो घर के वातावरण को दूषित करती हैं. साल 2020 में इनडोर पॉल्यूशन से 3.2 लाख लोगों की मौतें हुई थीं. इनडोर पॉल्यूशन का सबसे ज्यादा असर बच्चों और महिलाओं की सेहत पर पड़ता है.

एयर पॉल्यूशनएयर पॉल्यूशन के लिए बहुत सारे कारक जिम्मेदार हैं. इंडसट्रीज और मिल्स जिनसे खतरनाक गैसें और धुआं निकलता है, वो हवा में घुल जाता है. सड़कों पर दौड़ रही गाड़ियां. बिजली और परिवहन के लिए ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए कोयला, तेल और गैसोलन का इस्तेमाल किया जाता है, वह प्रदूषण पैदा करते हैं. खुले में कूड़ा-कचरा डालने से, जंगलों को जलाने से, कंस्ट्रक्शन और कृषि संबंधी गतिविधियों जैसे पराली जलाने से भी बहुत प्रदूषण होता है.

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