लोकसभा में कई दिनों से जारी गतिरोध के बीच 27 जुलाई को सदन में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया है. इसी सिलसिले में 28 जुलाई से चर्चा शुरू हो गई है. एक तरफ सरकार पर अव्यवस्थित शिक्षा प्रणाली को लेकर विपक्ष हमलावर है, तो वहीं सरकार की तरफ से भी पक्ष रखा गया है. 

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पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों को रोकथाम) संशोधित बिल 2026 पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, यह बिल, जिसे कल पेश किया गया था, असल में पहले वाले बिल पब्लिक एग्जामिनेशन्स प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 - में एक संशोधन है. इसे भी इसी सरकार ने पेश किया था. न सिर्फ पेश किया था बल्कि यह शायद आजाद भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला बिल था. 

जितेंद्र सिंह ने कहा, 'पहले वाला बिल और आज का संशोधन, एक तरह से, देश के छात्रों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए इस सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करते हैं. यह प्रधानमंत्री मोदी के उस संकल्प को भी दोहराता है कि 'भारत माता' के बच्चों के भविष्य के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा. इसलिए इस बिल को एक तरह से भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला कानून कहा जा सकता है.'

मौजूदा बिल में प्रावधानों को लेकर क्या बोले जितेंद्र सिंह?

जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, 'बिल में अनुचित साधनों का सहारा लेने वाले लोगों के लिए सजा को बढ़ाने का प्रस्ताव है. इसके तहत जेल की सजा का मौजूदा प्रावधान कम से कम तीन साल से पांच तक बढ़ाया जा सकता है, उसे बढ़ाकर कम से कम पांच साल जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है, करने का प्रस्ताव है. अधिकतम जुर्माना भी 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है. अपराधों में शामिल पाए जाने वाले सेवा प्रदाताओं के लिए बिल में अधिकतम जुर्माना बढ़ाकर 5 करोड रुपये करने और किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन से बैन करने की अवधि को चार से बढ़ाकर आठ साल करने का प्रस्ताव है.'

सिंह ने बताया, 'यह बिल केंद्र को पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार भी देता है. इसमें एक नई धारा 12A का प्रस्ताव भी है, जिसके तहत जांच दो महीने के अंदर पूरी करनी होगी. सेशन कोर्ट को इस कानून के तहत अपराधों की रोजाना सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के तौर पर तय करना होगा. चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी करनी होगी.  हर स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने होंगे.'

इसके अलावा उन्होंने कहा, 'सबसे जरूरी बात, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने वीडियो के जरिए भी किया था. वह है तेजी से न्याय सुनिश्चित करना. हम सिर्फ परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएंगे. हमने इसके लिए एक समय-सीमा भी तय की है. जांच दो महीने के अंदर पूरी होनी चाहिए, चाहे वह केंद्रीय एजेंसी करे या स्पेशल टास्क फोर्स.' 

विपक्ष को घेरते हुए जितेंद्र सिंह ने क्या कहा है? 

इधर, विपक्ष के हमलों के बीच जितेंद्र सिंह ने कहा, 'कांग्रेस सरकार ने एक कॉमन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिश की थी और आखिरकार 2017 में NTA बनाई गई. 2009- रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड, 2011- ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन, 2012- AIIMS नई दिल्ली एंट्रेंस पेपर लीक, 2013- महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन. अगर मैं इनकी लिस्ट बनाता रहूं, तो बिल पर चर्चा नहीं कर पाऊंगा. 2010- B.Ed. एंट्रेंस एग्जामिनेशन, उत्तर प्रदेश; 2012- तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन, 2009- वेस्ट बंगाल जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम, इसलिए, इस सरकार को एक खास कानून की जरूरत महसूस हुई.  

उन्होंने कहा, 'भारत सरकार के तहत चार बड़ी रिक्रूटमेंट एजेंसियां ​​हैं. UPSC, स्टाफ सिलेक्शन कमीशन, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल, इसी तरह, हायर एजुकेशन में एडमिशन के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी है.  NTA भी इसी सरकार ने 2017 में बनाई थी. 1992 में पहली बार- कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली भारत सरकार से एक कॉमन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिश की गई थी. फिर, 2010 में, UPA के कार्यकाल के दौरान, एक कमेटी ने भी यही सुझाव दिया था. मुझे नहीं पता कि इस पर ठीक से विचार क्यों नहीं किया गया, चाहे जो भी कारण या निजी हित रहे हों. इसलिए, मुझे लगता है कि आपको प्रधानमंत्री मोदी और इस सरकार की तारीफ़ करनी चाहिए. इसने एक काम पूरा किया है. एक अधूरा काम, जिसे आपको खुद पूरा करना चाहिए था.'

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पेपर लीक से जुड़े इस बिल में क्या है? 

इससे पहले न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर सभी प्रमुख राजनीतिक दल सोमवार को लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा करने को सहमत हुए थे. इस पर विचार विमर्श के लिए कम से कम छ घंटे का समय निर्धारित किया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक लोकसभा में पेश किया था. विधेयक में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन का प्रस्ताव है. इस बिल के तहत नियमों को कड़ा किया गया है. इसके तहत अपराधियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल के कारावास और 50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा पेपर लीक के संगठित अपराध के मामलों में कम से कम 7 साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. 

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