भारतीय रेलवे ने प्रशासनिक सख्ती दिखाते हुए ड्यूटी के दौरान संतोषजनक परफॉर्मेंस में कमी रखने वाले 6 बड़े अधिकारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दे दी है. रेलवे प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई भारतीय रेलवे स्थापना संहिता (IREC) के नियम 1802(ए) के तहत की गई है, जोकि रेलवे को सार्वजनिक हित में अधिकारियों को समय से पहले सेवा से हटाने का अधिकार देता है.
रिटायरमेंट पर भेजे गए अधिकारी रेलवे में कई ऊंचे और फंक्शनिंग के हिसाब से महत्वपूर्ण पदों पर काम करने अधिकारी शामिल हैं. इनमें सीएमई/प्रोजेक्ट/मुख्यालय, उत्तर रेलवे; एनएफ-एचएजी/आईआरएसएमई, दक्षिण पश्चिम रेलवे; SG/IRSI, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे; SC/IRSI, पूर्वी रेलवे; ग्रेड-1 (अंडर सेक्रेटरी/डिप्टी डायरेक्टर), RBSS; और PPS, RBSS शामिल हैं.
रेलवे की ओर से जारी बयान
रेलवे की ओर से इस कार्रवाई को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि इस फैसले को ऐसे देखा जाना चाहिए कि रेलवे के भीतर जवाबदेही और कार्यकुशलता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है. बयान के मुताबिक, नियम 1802(ए) का इस्तेमाल उन कर्मचारियों के खिलाफ किया जाता है, जिनका प्रदर्शन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होता है.
रेलवे के अधिकारी ने एबीपी न्यूज़ को क्या कहा?
पूरे मामले पर रेलवे के एक अधिकारी ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि इस कड़े कदम के जरिए रेलवे प्रशासन ने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को साफ मैसेज दिया है कि किसी भी लेवल पर लापरवाही, अक्षमता या कमजोर प्रदर्शन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. साथ ही, सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से ये उम्मीद की गई है कि वे अपनी ड्यूटी का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ करें. यह कदम रेलवे के अंदर अनुशासन और बेहतर कामकाज सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है. भारतीय रेलवे में अधिकारियों (Officers) को हटाने यानी सेवा से निकालने, निलंबित करने या जबरन रिटायर करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. ये नियम मुख्य रूप से केंद्रीय सरकारी सेवा नियमों के तहत आते हैं, क्योंकि रेलवे कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारी होते हैं.
