नई दिल्ली: इंडियन नेवी ने घोषणा की है कि गोल्डन ग्लोब रेस में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय नौसेना के कमांडर अभिलाष टोमी का रेस्क्यू कामयाब रहा है और उन्हें बचा लिया गया है. गौरतलब है कि कमांडर अभिलाष टोमी दक्षिण हिंद महासगर में आयोजित वर्ल्ड गोल्डन ग्लोब रेस में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. वर्ल्ड गोल्डन ग्लोब रेस को दुनिया की सबसे कठिन रेस में एक माना जाता है. इसी रेस में भाग लेते वक्त अभिलाष टोमी की नौका 130 किमी की गति से चल रही हवा का दबाव सह नहीं पाई और क्षतिग्रस्त हो गई.

आईएनएस सतपुड़ा शुक्रवार तक कमांडर के पास पहुंच जाएगा- रक्षा प्रवक्ता

भारत के रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि हिंद महासागर में आए तूफान की वजह से कमांडर टोमी की नौका क्षतिग्रस्त हो गई थी. कमांडर की पीठ में भी गहरी चोट लगी थी. भारतीय नौसेना के रिकोनिसेंस विमान ने कमांडर की लोकेश्न ट्रेक की और उन्हें खोजा था. कमांडर भारत में ही निर्मित पोत ‘थुरिया’ में थे.

सोमवार को फ्रांसीसी पोत ओसीरिस ने कमांडर का रेक्यू किया. अब ऑस्ट्रेलियाई नौसेना का जहाज एचएमएएस बल्लेरेट उन्हें पर्थ ले जाएगा. आईएनएस सतपुड़ा शुक्रवार तक टॉमी को लेने के लिए पहुंच जाएगा.

रक्षा मंत्री ने मांगा था 16 घंटे का वक्त

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया,  "नवल स्टाफ वाइस अजीत कुमार पी ने घायल नौसेना अधिकारी अभिलाष की स्थिति के बारे में बताया. ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के साथ बचाव मिशन का समन्वय किया जा रहा है. घायल अधिकारी अगले 16 घंटों में फ्रांसीसी पोत ओसीरिस के जरिए रेस्क्यू कर लिया जाएगा."

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद  ने फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया को कहा धन्यवाद

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी कमांडर के रेस्क्यू पर खुशी जाहिर की है. राष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा "यह जानकर ख़ुशी हुई कि भारतीय नौसेना कमांडर अभिलाष टोमी को दक्षिणी हिन्द महासागर से बचा लिया गया है. इस साहसी समुद्रयात्री के बचाव में फ्रांसीसी और ऑस्ट्रेलियाई मित्रों की मदद की सराहना करता हूं. कामना है कि यह बहादुर नौसैनिक जल्दी स्वस्थ हो जाए."

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क्या है गोल्डन ग्लोब रेस?

गोल्डन ग्लोब रेस दुनिया की सबसे रोमांचक रेस में से एक होती है. इस रेस में नाविक को नाव के जरिए 30000 मील का सफर एक ऐसी नाव से करना होता है जो 50 साल पुरानी होती है और इसमें संचार उपकरणों के सिवा कोई तकनीक नहीं होती है. इस बार 39 साल के कमांडर टोमी रेस में भारत के कप्तान थे, जो भारतीय नौसेना अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. यह रेस दक्षिणी हिंद महासागर में जिस जगह आयोजित की जा रही थी वो जगह पर्थ (ऑस्ट्रेलिया) से लगभग 1900 समुद्री मील दूर है.

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