चीन और पाकिस्तान भले ही समंदर में एक साथ साजिश रचने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भारतीय नौसेना एक पारंपरिक युद्ध से लेकर परमाणु युद्ध तक से निपटने के लिए तैयार है. ये कहना है भारतीय नौसेना के सह-प्रमुख, वाइस एडमिरल एस एन घोरमाडे का.

भारतीय नौसेना के वाइस चीफ, एस एन घोरमाडे मंगलवार को राजधानी दिल्ली में देश को जल्द मिलने वाले स्वदेशी युद्धपोत, आईएनएस विशाखापट्टनम और पनडुब्बी, आईएनएस वेला के बारे में एक ऑफ कैमरै प्रेस ब्रीफिंग कर रहे थे. उसी दौरान एबीपी न्यूज के इस सवाल पर कि चीन ने हाल ही में पाकिस्तान को एक बड़ा युद्धपोत दिया है और (08) पनडुब्बियों का करार भी किया है, वाइस चीफ ने कहा कि भारतीय नौसेना इस तरह के खतरों से पहले से चौकस है और इसके लिए एक दूरगामी 'मेरीटाइम कैपेबेलिटी प्रसपेक्टिव प्लान' तैयार कर रखा है. इस प्लान की हर पांच साल मे समीक्षा की जाती है. इसी दौरान उन्होंने कहा कि इस प्लान में एक लंबे समय के लिए 'स्पैक्ट्रम ऑफ वॉरफेयर' के लिए अपनी क्षमताओं को विकसित करना है, जिसमें एक 'लो-डेनसिटी से लेकर न्युक्लिर वॉर' के लिए तैयार रहना है.

वाइस एडमिरल घोरमाडे ने बताया कि नौसेना सशस्त्र सेनाओं (थलसेना, वायुसेना और नौसेना के साझा) फिफ्टीइन ईयर (15 वर्षीय)  इंडीग्रेटेड ट्राइ-सर्विस कैपेबिलेटी डेवलपमेंट प्लान पर भी काम कर रही है. इस प्लान में देश की ग्रोथ-रेट के अलावा डिफेंस बजट और हथियारों की कीमत शामिल है. सह-नौसेना प्रमुख के मुताबिक, इस प्लान में नौसेना के लिए तीसरा एयरक्राफ्ट (दूसरा स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत) भी शामिल है और पनडुब्बियां भी. इसके अलावा ड्रोन को भी नौसेना में शामिल करना शामिल है. 

आपको बता दें कि कुछ समय पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने नौसेना के तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर पर सवाल खड़े किए थे. लेकिन घोरमाडे ने कहा कि अब तीसरे विमानवाहक युद्धपोत पर सहमति बन गई है. नौसेना के लिए प्रोजेक्ट 75 (आई) के तहत छह नई पनडुब्बियों की टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. साथ ही अमेरिका से नौसेना के लिए 10 प्रीडेटर ड्रोन लेने पर भी चर्चा शुरू हो गई है (थलसेना और वायुसेना के लिए भी 10-10).

वाइस चीफ के मुताबिक, जिस तरह वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर बैलेंस ऑफ पावर में बेहद तेजी से बदलाव आ रहे हैं, उसको देखते हुए बेहद जरूरी है कि भारत भी अपनी समुद्री ताकत को बढ़ाए ताकि किसी भी चुनौती का सामना कर सकें. उन्होनें कहा कि ये बदलाव हिंद महासागर क्षेत्र में और तेजी से हो रहे हैं. 

वाइस एडमिरल घोरमाडे ने बताया कि इस वक्त भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े में एक एयरक्राफ्ट कैरियर (आईएनएस विक्रमादित्य सहित) कुल 130 युद्धपोत हैं. इसके अलावा 39 जंगी जहाज देश के ही अलग-अलग शिपयार्ड में तैयार किए जा जा रहे हैं.  

आपको बता दें कि नौसेना दिवस (4 दिसम्बर) से पहले भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े में एक बड़ा इजाफा होने जा रहा है. इसी महीने की 21 तारीख को स्वदेशी स्टेल्थ मिसाइल डेस्ट्रोयर जहाज, आईएनएस विशाखापट्टनम भारतीय नौसेना में शामिल होने जा रहा है. जबकि चार दिन बाद ही यानि 25 नबम्बर को स्कोर्पीन क्लास की चौथी पनडुब्बी, आईएनएस वेला भी देश की समुद्री ताकत को बढ़ाने के लिए शामिल हो रही है. इसके अलावा एक सर्वे-वैसेल, संधायक को भी जल्द समंदर में लॉन्च किया जाएगा और अगले साल यानि अक्टूबर 2022 तक नौसेना में शामिल हो जाएगा.

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