भारत में E20 ईंधन को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिली है. इसकी वजह से लोगों की गाड़ियों में दिक्कत आने का भी दावा किया जा रहा है. दूसरी तरफ उपभोक्ता डिजिटल प्लेटफॉर्म को लेकर भी परेशान है. ओटीटी पर डार्क पैटर्न, छिपे शुल्क और सब्सक्रिप्शन से जुड़ी दिक्कतों को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हुई हैं. इसको लेकर हाल ही में लोकल सर्किल्स ने दो अलग-अलग सर्वे किए हैं, जिसमें कई अहम खुलासे हुए हैं.
भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कस्टमर्स को गुमराह करने वाले ‘डार्क पैटर्न’ को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है. लोकल सर्किल्स के ताजा सर्वे में 324 जिलों के 1.18 लाख से अधिक उपभोक्ताओं की राय ली गई. सर्वे के मुताबिक 77 प्रतिशत यूजर्स ने कहा कि उन्हें बार-बार सब्सक्रिप्शन लेने या अपग्रेड करने के लिए परेशान किया जाता है. 72 प्रतिशत ने शिकायत की है कि सब्सक्रिप्शन लेते समय एक्स्ट्रा पेमेंट वाले कंटेंट की जानकारी नहीं दी गई, जबकि 65 प्रतिशत लोगों ने अंतिम भुगतान के समय छिपे हुए एक्स्ट्रा चार्ज का सामना किया. 60 प्रतिशत कस्टमर्स ने बताया कि सब्सक्रिप्शन रद्द करने का विकल्प ढूंढना मुश्किल होता है या उसे जानबूझकर छिपाया जाता है. वहीं 40 प्रतिशत ने आरोप लगाया कि सब्सक्रिप्शन रद्द करने के बावजूद उनसे शुल्क वसूला जाता रहा.
E20 फ्यूल को लेकर परेशान हो रहे कस्टमर
देशभर में E20 पेट्रोल लागू हुए एक साल से ज्यादा हो गया है. हालांकि अब लोगों में इसको लेकर नाराजगी तेजी से बढ़ रही है. सर्वे में 22,567 पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों में से 53 प्रतिशत ने सड़क परिवहन और पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा ई20 लागू करने के तरीके को खराब बताया. इनमें 42 प्रतिशत ने इसे सीधे 'बर्बाद' करने वाला करार दिया, जबकि केवल 13 प्रतिशत ने सरकार के कामकाज को सकारात्मक रेटिंग दी. सर्वे के मुताबिक 66 प्रतिशत प्री-2023 पेट्रोल वाहन मालिकों ने दावा किया कि E20 पेट्रोल से उनकी गाड़ी का माइलेज 10 प्रतिशत से ज्यादा घटा है, जबकि 45 प्रतिशत ने कार के मेंटेनेंस का खर्च बढ़ने की बात कही.
सर्वे में 31 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर कीमत ज्यादा भी हो तो उन्हें फिर से E0 या E10 पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए. सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिक्सिंग से ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी है, किसानों की आय में इजाफा हुआ है और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है. हालांकि सर्वे से संकेत मिलता है कि पुराने वाहनों के मालिकों का मानना है कि संक्रमण का आर्थिक बोझ उन पर डाल दिया गया है. लोकलसर्किल्स ने सरकार से पुराने वाहनों के लिए E0 या E10 पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने और E20 नीति की समीक्षा करने की मांग की है.
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