भारतीय सेना ने अपनी वर्दी और ड्रेस से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026 जारी की है. इस नई नीति का उद्देश्य सेना की परंपराओं को बनाए रखते हुए ड्रेस को अधिक आधुनिक, व्यावहारिक और भारतीय पहचान के अनुरूप बनाना है. इसके साथ ही औपनिवेशिक दौर की कई पुरानी परंपराओं, शब्दों और गैर-जरूरी व्यवस्थाओं को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा.
नई ड्रेस नीति में सेना ने अपने विभिन्न परिधानों को स्पष्ट और आसान तरीके से वर्गीकृत किया है. इसके तहत सभी वर्दियों को अलग-अलग नंबर दिए गए हैं, जिससे उनकी पहचान और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सरल हो सकेगी. सेना ने औपचारिक समारोह, कार्यस्थल, मेस और कॉम्बैट ड्रेस जैसी चार प्रमुख श्रेणियों को बरकरार रखा है.
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एक समान यूनिफॉर्म सिस्टम सबसे अहम बदलावों में से एक तीनों सेनाओं- थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए एक समान यूनिफॉर्म नंबरिंग सिस्टम लागू करना है. सेना का मानना है कि इससे तीनों सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल, स्पष्टता और कार्यकुशलता बढ़ेगी. नई नीति में भारतीय सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी गई है. इसी क्रम में औपचारिक नागरिक आयोजनों और गेट-टुगेदर कार्यक्रमों के लिए पारंपरिक बंदी जैकेट (हाफ जैकेट) को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है. नौसेना पहले ही इस परिधान को अपना चुकी है.
ड्रेस नियमों में बदलावइसके अलावा मेस ड्रेस नंबर 5 और 6 से पाउच बेल्ट हटाने, रिव्यूइंग ऑफिसर के लिए तलवार धारण करना वैकल्पिक बनाने तथा “रॉयल” जैसे औपनिवेशिक शब्दों के उपयोग को बंद करने का फैसला लिया गया है. सेना ने यह भी घोषणा की है कि कुछ पुरानी ड्रेस श्रेणियों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा. इनमें ड्रेस नंबर 3A भी शामिल है, जिसे 30 जून 2029 तक पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा. सेना का कहना है कि यह बदलाव आधुनिक भारत की पहचान और आत्मनिर्भर सोच को दर्शाते हैं.
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