भारतीय सेना ने रविवार (14 जून, 2026) को अपने यूनिफॉर्म के नियमों में से कोलोनियल पीरियड के कई नियमों को पूरी तरह से हटा दिया है. दरअसल, यह बदलाव भारत की संप्रभु पहचान के साथ सैन्य परंपराओं को जोड़ने के एक व्यापक कोशिश के तहत किया गया है. जिसके तहत अब निरीक्षण करने वाले अधिकारियों के तलवार ले जाने की अनिवार्यता के साथ-साथ कुछ मेस ड्रेस के साथ पाउच बेल्ट के इस्तेमाल को अब खत्म कर दिया गया है.

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इसके अलावा, सैन्य बलों के लिए कई स्थानों पर रॉयल जैसे पुराने शब्दों का इस्तेमाल भी अब बंद कर दिया गया है. इसके स्थान पर भारतीय सेना स्वदेशी बंडी जैकेट को सिविल फॉर्मल ड्रेस के हिस्से के तौर पर पेश कर रही है.

आर्मी यूनिफॉर्म-2026 के पैम्फलेट में दी गई पूरी जानकारी

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न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भारतीय सेना की ओर से यूनिफॉर्म से संबंधित किए गए व्यापक बदलाव की विस्तृत जानकारी आर्मी यूनिफॉर्म-2026 के पैम्फलेट में जारी कर दी गई है, जो सेना के ड्रेस नियमों का रेगुलेट करता है और इसके साथ सेना की तरफ से कोलोनियल पीरियड से इस्तेमाल किए जा रहे चिह्नों और शब्दावली को जानबूझकर हटाने लिए उठाए गए कदम को दर्शाता है.

इन बदलावों के पीछे स्वदेशीकरण और राष्ट्रीय लोकचार के साथ अलाइनमेंट के टाइटल के साथ तर्क को स्पष्ट किया गया है. नए नियमों में यह कहा गया है कि देश की भावनाओं और विकसित संप्रभु पहचान को ध्यान में रखते हुए, सेना के यूनिफॉर्म पैम्फलेट के इस संस्करण में कई सुनियोजित सुधारों को शामिल किया गया है. 

क्या-क्या किए गए बदलाव?

भारतीय सेना की ओर से यूनिफॉर्म में किए गए बदलावों में से एक है बंद गले का कोट, जिसे आमतौर पर बंड़ी जैकेट कहा जाता है. यह एक ऐसा परिधान है, जो किसी भी पूरे बाजू के शर्ट या कुर्ता के ऊपर से पहना जाता है. इसके साथ ही इसमें मैचिंग फॉर्मल ट्राउजर और बंद जूते भी शामिल हैं. यह नया ड्रेस अधिकारियों के लिए एक फॉर्मल पोशाक के रूप में जोड़ा गया है.

जबकि दूसरी तरफ सेना के मेस ड्रेस नंबर 5 और 6 से अधिकारियों की तरफ से कमर में बांधा जाने वाला पाउच बेल्ट भी हटा दिया गया है. साथ ही, रिव्यू ऑफिसर्स की तरफ से तलवार लेकर जाने को भी ऑप्शनल यानी वैकल्पिक बना दिया गया है.

आधुनिकीकरण और सैन्य परंपराओं के संरक्षण के बीच संतुलन की कोशिशः सेना

भारतीय सेना का कहना है कि ये सुधारों को आधुनिकीकरण और सैन्य परंपराओं के संरक्षण के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश है. नियमों के अनुसार, सामूहिक रूप से यह सुधार भारतीय सेना की गरिमा, कार्यक्षमता और स्थायी परंपराओं को बचाते हुए कोलोनियल पीरियड के निशानों की प्रोग्रेसिव रिव्यू को दिखाते हैं. 

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