भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने रविवार को वायुसेना के भविष्य और उसकी तैयारियों को लेकर अपनी प्राथमिकताएं बताईं. उन्होंने साफ किया कि स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके-1ए, तेजस एमके-2 और पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान एएमसीए (AMCA) को जल्द से जल्द वायुसेना में शामिल करना उनकी प्राथमिकता होगी. इसके साथ ही भारतीय हथियारों और सेंसर के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाएगा. लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रही वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए स्वदेशी तकनीक को आगे बढ़ाया जाएगा.
नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को तय स्तर तक वापस लाना उनका सबसे पहला काम होगा. उनका कहना है कि भारत अपनी जरूरतों के मुताबिक स्वदेशी तकनीक और हथियारों से लैस लड़ाकू विमान तैयार करेगा. वायुसेना की जिम्मेदारी सिर्फ युद्ध लड़ना और जीतना नहीं है, बल्कि अपनी मजबूत हवाई ताकत के दम पर दुश्मन को संघर्ष शुरू करने से रोकना भी है.
तेजस एमके-1ए, एमके-2 और एएमसीए पर सबसे ज्यादा जोर
वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले सार्वजनिक बयान में एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि तेजस एमके-1ए, तेजस एमके-2, एएमसीए और भारतीय हथियार व सेंसर वायुसेना की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं. उन्होंने कहा, "हम भारतीय समाधानों के साथ लड़ेंगे और अपनी सैन्य जरूरतों के मुताबिक इनकी पर्याप्त संख्या भी सुनिश्चित करेंगे."
प्रयोगात्मक परीक्षण पायलट और योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर रहे दीक्षित ने शनिवार को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह से वायुसेना प्रमुख का पदभार संभाला. उन्होंने वायुसेना के भविष्य की अपनी योजना को 'वायु' (VAYU) नाम दिया है. इसमें V का मतलब सतर्कता और तैयारी, A का मतलब आत्मनिर्भरता, Y का मतलब युक्ति यानी नई सोच और U का मतलब एकजुट होकर काम करना है.
हर स्क्वाड्रन और रडार को हर समय तैयार रखने पर जोर
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हर स्क्वाड्रन, रडार, एयर डिफेंस यूनिट और वायुसेना के हर जवान को किसी भी समय जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा. उन्होंने कहा कि स्वीकृत संख्या के मुकाबले वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को दोबारा मजबूत करना उनकी सबसे पहली जिम्मेदारी होगी.
फिलहाल वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की कमी एक बड़ी चुनौती है. उसकी कोशिश है कि लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या 30 से नीचे न जाए, जबकि स्वीकृत संख्या 42.5 स्क्वाड्रन है. इस कमी को दूर करने के लिए तेजस एमके-1ए के समय पर शामिल होने और 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद पर भी उम्मीदें टिकी हैं.
एआई और ड्रोन से निपटने की तकनीक पर भी नजर
नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल ने कहा कि बदलती युद्ध तकनीक के बीच वायुसेना को लगातार नई सोच और तकनीक अपनानी होगी. इसके लिए युद्ध की रणनीति, काम करने के तरीकों और तकनीकी व्यवस्था में बदलाव जरूरी है. उन्होंने नेटवर्क से जुड़े और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से चलने वाले कमांड सिस्टम, ड्रोन से बचाव के लिए कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था, विमानों और उपकरणों की तेजी से मरम्मत तथा सैनिकों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही. इसके अलावा अंतरिक्ष के पास वाले क्षेत्र यानी नियर स्पेस को भी वायुसेना के लिए एक नए सैन्य क्षेत्र के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर नजर रखी जाएगी.
सेना और नौसेना के साथ मिलकर बनेगी युद्ध की रणनीति
वायुसेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को भी जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि वायुसेना थलसेना, नौसेना और दूसरी राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर योजना बनाएगी और जरूरत पड़ने पर संयुक्त रूप से कार्रवाई करेगी. उनके मुताबिक, हवाई ताकत का सबसे ज्यादा फायदा तभी मिलता है, जब उसे युद्ध की शुरुआती योजना से ही दूसरी सेनाओं के साथ जोड़ा जाए.
दीक्षित की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब देश की तीनों सेनाओं को एक साथ जोड़कर काम करने की व्यवस्था यानी थिएटर कमान बनाने की दिशा में काम चल रहा है. यह लंबे समय से प्रस्तावित सैन्य सुधार है, जिसका मकसद भविष्य के युद्धों के लिए सेना के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है.
ड्रोन, मिसाइल और साइबर तकनीक से बदल रहा युद्ध का तरीका
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत के सामने सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं. वहीं, ड्रोन, लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले हथियार, अंतरिक्ष और साइबर तकनीक के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युद्ध के तरीके को तेजी से बदल रहे हैं.उन्होंने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ हुई चार दिन की सैन्य टकराव की स्थिति और ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया. दीक्षित के मुताबिक, इस अभियान ने दिखाया कि सटीक और निर्णायक हवाई ताकत किस तरह असरदार साबित हो सकती है.
तेजस एमके-1ए को वायुसेना में शामिल करना तत्काल प्राथमिकता
दीक्षित के सामने सबसे तात्कालिक चुनौती तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमान को वायुसेना में शामिल कराना है. कई समय-सीमाएं चूकने के बाद अब यह विमान वायुसेना में शामिल होने के करीब है. उम्मीद है कि साल के अंत तक यह उनके कार्यकाल में शामिल होने वाला पहला नया लड़ाकू विमान होगा.
तेजस एमके-1ए पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों की जगह लेगा. मिग-21 ने छह दशक से ज्यादा समय तक वायुसेना में सेवा देने के बाद पिछले साल विदाई ली थी. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को तेजस एमके-1ए के 180 विमानों के लिए दो ऑर्डर दिए गए हैं. इनकी कुल कीमत करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये है.
तेजस एमके-2 का ढांचा तैयार, 2027 में पहली उड़ान का लक्ष्य
तेजस एमके-1ए के साथ वायुसेना प्रमुख को तेजस एमके-2 और एएमसीए परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाना होगा. ज्यादा आधुनिक तेजस एमके-2 परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है. एचएएल ने इसका ढांचा तैयार कर लिया है. विमान के अगले, बीच वाले और पिछले हिस्से को जोड़ने का काम भी पूरा हो चुका है. इसके बाद इसका एयरफ्रेम तैयार हो गया है.
एचएएल का लक्ष्य मार्च 2027 तक विमान का पहला ग्राउंड रन कराने का है. इसके बाद उसी साल इसकी पहली उड़ान कराने की तैयारी है. अब वायुसेना तेजस एमके-2 की खरीद के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाएगी. यह विमान भविष्य में मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों की जगह लेगा.
चीन के जे-20 और जे-35 के बीच एएमसीए कार्यक्रम अहम
पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान एएमसीए परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाना भी वायुसेना के लिए अहम है. इसकी वजह चीन की बढ़ती हवाई ताकत है. चीन पहले ही अपने जे-20 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को तैनात कर चुका है. इसके अलावा वह जे-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान भी तैयार कर रहा है.
ऐसे में भारत के लिए एएमसीए कार्यक्रम को समय पर आगे बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है. वायुसेना प्रमुख आशुतोष दीक्षित के सामने एक ओर लड़ाकू विमानों की मौजूदा कमी दूर करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर स्वदेशी तकनीक के दम पर भविष्य के युद्धों के लिए वायुसेना को तैयार करने की जिम्मेदारी भी है.
