चीन-पाकिस्तान सीमा आयोग पर भड़का MEA, कहा- 'गैर-कानूनी और जबरन कब्जा...'
पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट है कि पाकिस्तान और चीन के बीच कोई सीमा नहीं है. MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस आयोग को कोई कानूनी आधार नहीं है.

पाकिस्तान चीन सीमा आयोग को भारत ने बुधवार (16 सितंबर 2026) को खारिज किया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस संयुक्त आयोग को कोई कानूनी अधिकारी नहीं है. विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले पर हमारा रुख साफ है कि पाकिस्तान और चीन के बीच कोई सीमा नहीं है. हम उस तथाकथित संयुक्त आयोग को खारिज करते हैं, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और रहेंगे.
भारत के इलाके को खाली करे पाकिस्तान: MEA
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इससे पहले पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग के संचालन को लेकर पोस्ट किया था. पाकिस्तान ने कहा था कि दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन, संयुक्त सर्वे और व्यापार को बढ़ावा देने के नाम पर इस सीमा आयोग को इस्लामाबाद में हुई बैठक के साथ एक्टिव किया है. MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल इसे खारिज करते हुए कहा कि भारत ने 1963 के तथाकथित चीन पाक सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी, यह समझौता अवैध और अमान्य था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के उन क्षेत्रों को तत्काल खाली करे, जिन पर उसने अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है.
पाकिस्तान-चीन के बीच कोई बॉर्डर नहीं: MEA
MEA प्रवक्ता ने कहा, 'हमने इस संबंध में आई खबरों को देखा है. इस मामले पर हमारी स्थिति स्पष्ट और लगातार एक समान रही है. पाकिस्तान और चीन के बीच कोई बॉर्डर नहीं है. हम तथाकथित संयुक्त आयोग को खारिज करते हैं, क्योंकि इसका कोई कानूनी आधार नहीं है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से थे, हैं और हमेशा रहेंगे. पाकिस्तान का भारत के अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों से संबंधित किसी भी व्यवस्था में शामिल होने का कोई अधिकार या आधार नहीं है.'
रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हम इन कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति को बदलने या अवैध कब्जे को वैध ठहराने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से विरोध और खंडन करते हैं. ऐसे प्रयास भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित करते हैं. भारतीय क्षेत्रों से संबंधित चीन और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह का तथाकथित सीमा सहयोग पूरी तरह अस्वीकार्य होगा और इन क्षेत्रों पर भारत की संप्रभुता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.'





















