नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स समिट 2026 में भारत को बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है. भारत की तरफ से ब्रिक्स की बैठक में प्रस्तावित साझा घोषणा पत्र में पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की गई है. यह साझा घोषणा पत्र चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में स्वीकार किया गया है. ऐसे में पाकिस्तान का सबसे बड़ा सहयोगी चीन को माना जाता रहा है.

Continues below advertisement

लेकिन इस साझा प्रस्ताव के बाद अब पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान खार खा सकता  क्योंकि बकायदा इसमें आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाते अप्रैल में हुए कायरना आतंकी हमले पर सहयोगी देशों ने संयुक्त बयान जारी किया है. 

ब्रिक्स देशों ने दुनिया में व्याप्त आतंकवाद पर साझा बयान जारी किया है. सभी ने 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की निंदा की है. 26 लोगों की मौत हुई थी. आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस अपनाने की बात भी सभी सदस्य देशों ने कही है.

Continues below advertisement

आतंकवाद से निपटने के लिए सभी देशों ने दोहराई प्रतिबद्धता

बयान में कहा गया, 'हम आतंकवाद की किसी भी घटना को आपराधिक और अनुचित मानते हुए उनकी कड़ी निंदा करते हैं. चाहे उसका मकसद कुछ भी हो. हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए.'

इसके अलावा इस साझा बयान में कहा गया, 'हम आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों से निपटने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं. इसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के लिए फंडिंग और सुरक्षित ठिकाने शामिल हैं.' 

नई दिल्ली घोषणा पत्र सर्वसम्मति से पास

बता दें, नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स समिट के पहले दिन UNCA में बदलाव, ग्लोबल साउथ देशों की आवाजों को सुनना, आर्थिक आधार रखने वाले देशों को स्थायी सदस्यता देना, जैसे मुद्दों को रखा गया. इस प्रस्ताव को दिल्ली घोषणा पत्र 2026 नाम दिया गया है. भारत की तरफ से 10 प्रस्ताव रखे गए थे, जिसे सर्वसम्मति से मंजर कर लिया गया. पीएम मोदी ने खुद इसकी घोषणा की है. 45 पन्नों का यह ड्राफ्ट ब्रिक्स समिट में स्वीकार किया गया है.