नई दिल्ली: अमेरिकी फोर्सेज के अफगानिस्तान से वापस निकलने के साथ ही अफगानिस्तान में तालिबान ने एक बार फिर से पूरी ताकत से सिर उठाना शुरू कर दिया है. तालिबान ने हाल हीं में कई प्रोविनेंस पर अपना कब्ज़ा बना लिया है. यहां तक कि अब इस बढ़ते खतरे को देख भारत ने अफ़गानिस्तान में सभी भारतीयों के लिए सुरक्षा एडवाइज़री भी जारी कर दी है.
एडवाइज़री में इस वक्त अफगानिस्तान में मौजूद सभी भारतीयों को अत्यधिक सतर्क रहने के लिए कहा गया है. भारत सरकार ने सभी भारतीयों को सलाह दी है कि वो किसी भी सूरत में अफगानिस्तान में गैर ज़रूरी यातायात या कोई और काम ना करें.
एडवाइज़री में ये भी कहा गया है कि अफगानिस्तान में बड़े शहरों से बाहर बिल्कुल भी ना निकले और जो भी भारतीय कंपनियां अफ़गानिस्तान में काम कर रही हैं वो सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ख्याल रखें. यही नहीं सभी नागरिक करीबी पुलिस स्टेशन का नंबर साथ रखें. हालांकि अफ़्गान तालिबान ने बयान जारी करके कहा है कि आम नागरिकों, राजनयिकों और मानवीय कार्यों में लगे लोगों को निशाना नहीं बनाया जाएगा.
अफगानिस्तान में अमेरिकी फोर्सेज के निकलने से तालिबान के इस बढ़ते खतरे पर एबीपी न्यूज़ से भारत में अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुन्दजई ने खास बात की और कहा कि किसी भी कीमत पर तालिबान को अफगानिस्तान पर कंट्रोल नहीं नहीं करने दिया जाएगा.
अफ़गानी राजदूत ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में जानबूझ कर स्थिति को खराब किया गया है मगर वो इलाके रणनीतिक तौर पर ज़्यादा महत्व नहीं रखते. राजदूत फरीद मामुन्दजई ने कहा कि जब साल 2014 में विदेशी फोर्सेज ने अफ़निस्तान से वापस जाना शुरू किया था तब से ही अफगानिस्तान की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी अफ़्गानी सेना ने ले ली थी. अफ़्गानी राजदूत ने कहा कि अफगानिस्तान सरकार चाहती है कि भारत तालिबान को आतंक छोड़ने का सख़्त संदेश दे और देश में शांति बहाली में भूमिका निभाए.
हालांकि अफ़्गान सरकार के सूत्रों ने बताया कि निश्चित तौर पर तालिबान का खतरा अमेरिकी फोर्सेज के निकलने से काफी बढ़ता जा रहा है मगर अफ़्गानी सेना इससे निपटने में सक्षम है. मगर इसके लिए अफगानिस्तान को अमेरिका से मिलिट्री एड और आर्थिक मदद यानि सैन्य सहायता की जरूरत होगी. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो अगले दो से तीन सालों में तालिबान अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर भी कब्ज़ा कर सकता है.
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