यूरोप जाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों, मजदूरों और प्रोफेशनल्स के लिए अच्छी खबर सामने आई है. भारत और यूरोपीय संघ ने एक मोबिलिटी पैक्ट पर साइन किए हैं. साथ ही दोनों के बीच कॉम्प्रिहेंसिव फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी फाइनल किया गया है. इस एग्रीमेंट से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नया रूप देने की कोशिश है. 

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मोबिलिटी फ्रेमवर्क के तहत ईयू ने भारतीय छात्रों के लिए बिना किसी रोक-टोक के आने जाने की सुविधा देने का वादा किया है. इससे भारतीय छात्रों को ईयू के राज्यों में यात्रा करने, पढ़ाई करने और काम करने की आसानी होगी. 

होराइजन पब्लिक प्रोग्राम पर क्या है?  

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यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे अच्छा उदाहरण है. इसलिए आज यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हम होराइजन यूरोप के साथ भारत के जुड़ाव को लेकर काम कर रहे हैं. होराइजन दुनिया का सबसे बड़ा पब्लिक प्रोग्राम है. इसमें हमारे बेहतरीन टैलेंट को स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, फ्रंटियर टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा. 

इसके अलावा उन्होंने बताया कि मोबिलिटी पर एक एग्रीमेंट पर साइन करके छात्रों और रिसर्चर्स के आने जाने को आसान बनाया जाएगा. यह भारतीय टैलेंट को सपोर्ट करने के लिए वन स्टॉप हब होगा. 

भारत और ईयू के बीच हुआ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

यह एग्रीमेंट एक ऐतिहासिक भारत-ईयू के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का हिस्सा है. इसे दोनों पक्षों ने सालों के महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते में से एक  बताया है. इस डील के तहत भारत ने (ढाई लाख वाहनों के सालाना कोटे के तहत) यूरोपीय कारों पर इंपोर्ट टैरिफ को 110% से घटाकर 10% करने पर सहमति जताई है. यह एक संरक्षित ऑटोमोबाइल मार्केट के लिए बड़ी शुरुआत है. इससे बाजार तक पहुंच बढ़ेगी. भारत में ईयू के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. एक बार यह समझौता लागू हो जाएगा, तो भारत को निर्यात किए जाने वाले 90% से ज्यादा ईयू सामानों पर कम या शून्य टैरिफ लगेगा. इन समझौता का मतलब दोनों देशों के संबंधों और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है. इसमें बिजनेस, इन्वेस्टमेंट, सर्विस जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर शामिल हैं.