भारत की रक्षा तकनीक और रणनीतिक कूटनीति ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. करीब 450 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सौदा अब लगभग अंतिम मोड़ पर पहुंच चुका है. भारत और रूस की संयुक्त तकनीक से विकसित यह मिसाइल आज विश्व की सबसे तेज और सबसे विश्वसनीय सामरिक प्रणालियों में शामिल है. लंबे समय से कई देश इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे थे और अब यह सौदा भारत के रक्षा उद्योग को नए आयाम देने वाला साबित हो सकता है.

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ANI की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्र बताते हैं कि संभावित खरीददार देशों ने हाल के सैन्य अभियानों में ब्रह्मोस की ओर से हासिल किए गए परिणामों को बारीकी से देखा. इसकी सटीकता से बेहद प्रभावित हुए. इसी प्रभाव ने इस सौदे को अंतिम चरण तक पहुंचा दिया है और उम्मीद है कि आने वाले महीनों में आधिकारिक हस्ताक्षर भी हो जाएंगे. ब्रह्मोस की विश्वसनीयता केवल इसकी तक सीमित नहीं है. जमीन, समुद्र और हवा तीनों माध्यमों से लॉन्च होने की क्षमता इसे सामरिक रूप से और भी प्रभावशाली बनाती है. यही वजह है कि भारत अब केवल हथियारों का इम्पोर्टर नहीं रह गया, बल्कि खुद एक सशक्त एक्सपोर्टर के रूप में उभर रहा है, जिसके पास अत्याधुनिक हथियारों को बेचने की क्षमता है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस की मांग बढ़ीमई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस मिसाइल की प्रतिष्ठा को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया. पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए इस अभियान में पहली बार ब्रह्मोस को युद्ध क्षेत्र में तैनात किया गया. भारतीय सैन्य बलों ने जब ब्रह्मोस का इस्तेमाल करते हुए तेज, सटीक और अत्यधिक असरदार हमले किए तो दुनिया भर के राजनीतिक विशेषज्ञों ने इसकी तकनीकी क्षमता पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू किया. कई पाकिस्तानी ठिकाने हमलों के बाद दिनों तक काम नहीं कर सके. इससे यह साबित हुआ कि ब्रह्मोस केवल तेज नहीं, बल्कि राजनीतिक परिणाम देने में भी किसी से कम नहीं है. दुबई एयर शो में ब्रह्मोस की प्रदर्शनी ने भी दुनिया के कई रक्षा प्रतिनिधियों को आकर्षित किया. जो देश पहले सिर्फ जानकारी जुटा रहे थे, वे अब वास्तविक खरीद की प्रक्रिया में आ चुके हैं. ऑपरेशन सिंदूर भारत के लिए सिर्फ युद्धक सफलता नहीं था, बल्कि यह तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी प्रमाण बनकर उभरा.

नौसेना और वायुसेना में ब्रह्मोस की बढ़ती शक्तिभारत अपनी सेना को भी नई क्षमता से लैस कर रहा है. सीमा पर तनाव बढ़ने के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने नौसेना और वायुसेना के लिए ब्रह्मोस की नई खेप को मंजूरी दी. भारतीय नौसेना अपने वीर-क्लास युद्धपोतों पर ब्रह्मोस की तैनाती को विस्तार दे रही है, जिससे समुद्री सीमाओं की निगरानी पहले से कहीं अधिक तेज और प्रभावी हो जाएगी. इसी तरह वायुसेना भी अपने Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ इस मिसाइल का एकीकरण तेजी से पूरा कर रही है. यह संयोजन भारत को हवा से समुद्र और हवा से जमीन दोनों दिशाओं में बेहद सटीक प्रहार की सुविधा देता है. इस दोहरी क्षमता ने भारत की जवाबी ताकत को और मजबूत बना दिया है.

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