चीन दुनिया के अलग-अलग मोर्चों पर भारत को जबरन उकसाने का काम कर रहा है, नियमों का उल्लंघन कर रहा है और मई महीने में तीन बार भारत के साथ उलझने की कोशिश कर चुका है. चीन की इन हरकतों पर अब अमेरिका खुलकर सामने आया है अमेरिका ने आगाह किया है कि चीन जो भी कर रहा है वो चिंताजनक और खतरनाक है, उसे रोकना होगा.
चीन का पहला दुस्साहस था - लद्दाख में चीनी सैनिकों ने जबरन भारतीय सैनिकों के साथ उलझने की कोशिश. चीन का दूसरा दुस्साहस रहा- नॉर्थ सिक्किम बॉर्डर पर पेट्रोलिंग के दौरान भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प. चीन का तीसरा दुस्साहस था - अक्साई चिन से सटी गैलवान घाटी में चीन की सेना ने 80 तंबू गाड़ना. चीन का चौथा दुस्साहस है - लद्दाख की पैंगोंग शो झील में चीन ने गश्त करने वाली बोट की संख्या को अचानक बढ़ा देना. एक के बाद एक चीन हर मोर्चे पर भारत को ये बताने की कोशिश कर रहा है कि वो कितना आक्रामक हो चुका है.
चीन के इस भड़काने वाले रवैये पर अब दुनिया प्रतिक्रिया देने लगी है भारत के प्रति चीन के इस व्यवहार पर दुनिया की महाशक्ति अमेरिका ने आगाह किया है. अमेरिका ने खुले शब्दों में दुनिया से कहा है कि चीन का व्यवहार सिर्फ दिखावा करने तक सीमित नहीं है बल्कि ये भड़काने वाला और चिंताजनक है. अमेरिका का ये बयान ठीक उस मौके पर सामने आया है जब भारत और चीन के बीच सीमा पर पैदा हुए विवाद को सुलझाने के लिए दो बार हुई बातचीत नाकाम हो गई है. दरअसल वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने के लिए मंगलवार और बुधवार को बॉर्डर पर मौजूद लोकल कमांडरों ने बातचीत करने की कोशिश की थी लेकिन दोनों राउंड की बातचीत फेल हो गई.
अमेरिका ने डोकलाम विवाद पर भी भारत के पक्ष में बयान दिया था लेकिन इस बार अमेरिका ने जितने साफ लहजे में चीन के बर्ताव की बखिया उधेड़ी है वो शायद पहली बार है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय में दक्षिण और केंद्रीय एशिया विभाग की अधिकारी एलिस वेल्स भारत चीन के बीच पैदा विवाद पर सवालों का जवाब दे रही थीं. एलिस ने ना सिर्फ भारत चीन सीमा पर चीन के रवैये पर चिंता जताई बल्कि उन्होंने दक्षिण चीन सागर में भी ड्रैगन की चालबाजी से पर्दा उठाया.
ड्रैगन दक्षिण चीन सागर अपने एकाधिकार की बात करता है जबकि वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस से लेकर ताइवान तक के चीन से उलट दावे हैं. दरअसल चीन की इन चालों के पीछे उसका लालच छिपा हुआ है. चीन ने अलग-अलग आइलैंड पर दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर वाले इलाके में अपनी सेना का बेस तैयार कर लिया है. ये दोनों ही हिस्से तेल और खनिज संपदा का अपार भंडार माने जाते हैं जो किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं और इसीलिए चीन इस इलाके में गिद्ध की तरह नजर गड़ाए हुए है क्योंकि उसे जहां फायदा दिखता है उस हिस्से को वो किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहता है. फिर चाहे बल की जरूरत पड़े या फिर छल की बल और छल की इसी रणनीति को भारत के साथ आज़माने की कोशिश कर रहा है.
ये चीन का छल ही तो है कि वो एक साथ भारत के अलग-अलग बॉर्डर पर उकसाने की कोशिश कर रहा है. लद्दाख में भारत चीन सीमा के पास वो अपने सैन्य हेलिकॉप्टरों को भी मंडराने के लिए भेज चुका है. दरअसल चीन पहले से ही सीमा के पास कंस्ट्रक्शन का काम कर चुका है लेकिन जैसे ही भारत ने सीमा वाले हिस्सों में सड़कों का जाल बनाना शुरू किया.
ड्रैगन परेशान हो गया और वो भारत के इस कदम को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की तरफ बढ़ते भारत के कदमों से भी चीन के पसीने छूट रहे हैं. पीओके में आने वाले गिलगित और बालटिस्तान में चीनी कंपनियां लगातार खनिज संपदा का खनन कर रही हैं. वहां सोने की खान से लेकर बेशकीमती पत्थरों तक का खजाना मौजूद है और गिलगित बालटिस्तान की भौगोलिक स्थिति उसे सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है इसलिए पीओके हाथ से निकला तो सबसे बड़ा नुकसान चीन को होगा. इसलिए ड्रैगन आक्रामकता दिखाकर भारत पर हावी होने की कोशिश भी कर रहा है.
चीन जिस छोटे से देश ताइवान पर दावा करता है वो ताइवान अब चीन को तबाह करने वाला है. जिस हांगकांग को चीन अपनी ताकत के दम पर दबाना चाहता है अब वो हांगकांग चीन की हवा निकालने वाला है. ताइवान और हांगकांग छोटे छोटे देश हैं जिन्हें दुनिया के कई देश स्वतंत्र देश का दर्जा देते हैं लेकिन चीन ताकत के दम पर इसे अपनी जागीर मानता है. जब से चीन कोरोना के चक्रव्यूह में फंसा है तब से इन छोटे देशों ने चीन की नाक में दम कर रखा है.
ताइवान ने कैसे चीन को चुनौती दी है उसके बारे में बताएं उससे पहले ये जान लीजिए कि चीन इन छोटी ताकतों पर दुनिया की नजर नहीं पहुंचने देने चाहता है और इसीलिए वो इन दिनों बॉर्डर पर अपनी हरकतों से हिंदुस्तानी सैनिकों को उलझाने में जुटा है. जल थल और वायु-हाल के दिनों ने इन तीनों रास्ते से चीन ने हिंदुस्तानी सैनिकों को बॉर्डर पर उलझाने की जुर्रत की है और हिंदुस्तानी सैनिकों ने चीन की इस जुर्रत का बखूबी जवाब भी दिया है . लेकिन चीन को ठहरा चीन धोखेबाजी और मक्कारी इसकी रूह में है. लिहाजा मंगलवार और बुधवार को दो राउंड की हुई मीटिंग में कोई नतीजा नहीं निकला.
पेंगॉन्ग झील और गलवान घाटी इलाके में अब भी तनाव की स्थिति बनी हुई है और अब स्थिति पर अमेरिका ने भी नजर गड़ा ली है. जब से कोरोना को लेकर चीन घिरा है तब से दुनिया उसके खिलाफ एकजुट हो गई है और इस माहौल में उस ताइवान को भी ताकत मिली है जिसे चीन अपनी जागीर समझने की गलती करता है.
ताइवान में कल साई इंग वेन ने दोबारा राष्ट्रपति की कुर्सी संभाली है और चीन को ललकारते हुए कह दिया है कि एक देश दो सिस्टम से नहीं चल सकता . ताइवान ने चीन की गुलामी से साफ इनकार कर दिया है . इधर ताइवान ने चीन को आंख दिखा दी है तो उधर हांग कांग के माथे पर अमेरिका ने अपना हाथ रख दिया है.
हांगकांग के लोग चीन से आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और चीन अपनी ताकत के दम पर यहां की आवाज को दबाता रहा है लेकिन मौका मिला है तो चीन अब हांगकांग की आवाज बनकर सामने आया है.
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि चीन हांगकांग की स्वायत्तता एवं स्वतंत्रता में दखल ना दे. चीन इन दिनों गुलामी के अपने दावे वाले देशों से उठ रही आवाज को लेकर परेशान है क्योंकि गुलामी की ये दीवार ज्यादा दिनों तक खड़ी नहीं रहने वाली.
यही वजह है कि चीन हिंदुस्तानी सैनिकों से उलझकर अपने घर में उठे विद्रोह की आवाज को दूर तक जाने से रोकना चाहता है. लेकिन इस बार गृह युद्ध में घिरे चीन को दुनिया की गोलबंदी का नुकसान उठाना पड़ेगा और उसे ये याद रख लेना चाहिए कि हिंदुस्तानी सीमा पर वो लाख जुर्रत कर ले, ये आज का हिंदुस्तान है जो दुश्मन को सिर्फ हथियार से ही नहीं बल्कि बहिष्कार से बर्बाद करने की ताकत रखता है.
सैन्य तनातनी के बीच भारत और चीन के सैन्य कमांडर्स की मीटिंग रही बेनतीजा, सीमा पर विवाद जारी