देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद जनगणना अब बड़े बदलावों के साथ होने जा रही है. सरकार ने जनगणना 2027 को दो चरणों में कराने का फैसला किया है, जिसमें इस बार जातियों की गणना भी शामिल होगी. साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर लिया गया फैसला भी चर्चा में है.

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रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर मृत्युञ्जय कुमार नारायण ने बताया कि जनगणना 2027 में डेटा डिजिटल माध्यम से जुटाया जाएगा. गणनाकर्ता मोबाइल ऐप के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे और पहली बार सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा भी दी गई है. यानी लोग अब खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे.

लिव-इन को लेकर बड़ा बदलाव

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जनगणना 2027 में इस बार सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए एक अहम बदलाव किया गया है. सरकार की FAQ गाइडलाइन के अनुसार, अगर कोई लिव-इन कपल अपने रिश्ते को स्थायी मानता है, तो उसे जनगणना में शादीशुदा के रूप में दर्ज किया जाएगा. गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि क्या लिव-इन रिश्ते में रहने वाले कपल को शादीशुदा माना जाएगा? यदि वे अपने रिश्ते को स्थायी मानते हैं, तो उन्हें शादीशुदा माना जाना चाहिए.” यह प्रावधान सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल पर जारी FAQs में शामिल है, जिसे खास तौर पर लोगों की सुविधा के लिए तैयार किया गया है ताकि वे जनगणना के सवालों का सही और आसान जवाब दे सकें. 

सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प

सरकार ने जनगणना के दौरान सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प भी दिया है, जिसके लिए यह पोर्टल खोला गया है. यह सुविधा दोनों चरणों हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (HLO) और पॉपुलेशन एन्यूमरेशन में उपलब्ध रहेगी. इसके अलावा, पहले चरण के लिए 33 सवाल तय किए गए हैं, जिन्हें 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली हाउस लिस्टिंग प्रक्रिया के दौरान नागरिकों से पूछा जाएगा. यह बदलाव साफ संकेत देता है कि जनगणना 2027 सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक यथार्थ को दर्ज करने की भी कोशिश है.

कब होगी जनगणना?

सरकार के मुताबिक, जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की आधी रात होगी. नारायण ने कहा, “जनगणना की संदर्भ तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है… 28 फरवरी और 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि की स्थिति ही पूरे डेटा का आधार बनेगी.” हालांकि, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल-उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में यह प्रक्रिया अक्टूबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी.

दो चरणों में पूरी प्रक्रिया

जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में घरों की गिनती, उनकी स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में आबादी का विस्तृत डेटा दर्ज होगा. पहले चरण के लिए 33 सवाल तय किए गए हैं, जिनमें घर की बनावट, परिवार की संरचना, बुनियादी सुविधाएं और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलू शामिल होंगे.

डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी. गणनाकर्ता मोबाइल ऐप के जरिए डेटा जुटाएंगे, वहीं पहली बार लोगों को वेब पोर्टल के माध्यम से खुद अपनी जानकारी दर्ज करने यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा भी दी गई है. इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया के संचालन, प्रबंधन और निगरानी के लिए एक वेब पोर्टल तैयार किया गया है, जिससे हर स्तर पर रियल टाइम ट्रैकिंग संभव होगी.

रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर मृत्युञ्जय कुमार नारायण ने कहा, 'जनगणना की संदर्भ तिथि बेहद महत्वपूर्ण होती है. यह 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि यानी 28 फरवरी और 1 मार्च के बीच 12 बजे तय की गई है. 16 जून 2025 को जारी पहली अधिसूचना में इसी तिथि के आधार पर जनगणना कराने का इरादा जताया गया था. इसी वजह से इसे जनगणना 2027 कहा जा रहा है. इस तिथि के आधार पर देश के हर प्रशासनिक इकाई, राज्य, जिला, गांव और वार्ड की आबादी और अन्य आंकड़ों की तस्वीर सामने आएगी. भारत में जनगणना दो चरणों में होती है, जिसमें पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का होता है.'

डेटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित

सरकार ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान दी गई हर व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी. यह डेटा न तो RTI के तहत साझा किया जा सकेगा और न ही किसी अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल होगा. रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर मृत्युञ्जय कुमार नारायण ने कहा, 'जैसा कि आप जानते हैं, जनगणना 2027 में डेटा पूरी तरह डिजिटल माध्यम से जुटाया जाएगा. गणनाकर्ता और सुपरवाइजर मोबाइल ऐप से लैस फोन लेकर घर-घर जाएंगे और उसी के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे. यह ऐप भारत सरकार की संस्था C-DAC ने तैयार किया है. इस बार पहली बार सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा भी दी गई है. साथ ही, पूरी जनगणना प्रक्रिया चाहे राज्य स्तर हो या केंद्र स्तर के संचालन, प्रबंधन, निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक वेब-आधारित पोर्टल बनाया गया है, जिससे रियल टाइम में प्रगति पर नजर रखी जा सकेगी.'

क्यों अहम है जनगणना 2027?

कोविड-19 की वजह से 2021 की जनगणना टल गई थी. अब 2027 में होने वाली यह प्रक्रिया देश की नीतियों, विकास योजनाओं और संसाधनों के बंटवारे के लिए बेहद अहम होगी. नारायण ने लोगों से अपील करते हुए कहा, 'मैं हर व्यक्ति से अपील करता हूं कि वह खुले मन से जनगणना में भाग लें और सही जानकारी दें.' स्पष्ट है कि जनगणना 2027 सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि देश के भविष्य की दिशा तय करने वाली बड़ी प्रक्रिया है.

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