भारतीय सेना अब दुश्मन के अंदर गहराई तक सटीक हमला करने के लिए स्वदेशी लॉयटरिंग मुनिशन यानी 'सुसाइड' ड्रोन खरीदने की तैयारी में है. ये ड्रोन दुश्मन के ठिकानों को बिना पता चलने के चुपके से तबाह कर सकते हैं.
फास्ट-ट्रैक प्रोसेस से बनेंगे ड्रोन
इंडियन आर्मी के सूत्रों के मुताबिक, यह खरीद लगभग 2,000 करोड़ रुपए की डील के तहत होगी. टेंडर जल्द जारी होने वाला है और फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया से काम होगा. डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रायल के आधार पर दो भारतीय कंपनियों को 60:40 के अनुपात में ऑर्डर दिया जाएगा. शुरुआती डील के बाद आने वाले सालों में इसकी संख्या कई गुना बढ़ सकती है.
कौन सी कंपनियों के शामिल होने की संभावना है?
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम कर रही कुछ बड़ी भारतीय कंपनियां पहले भी सेना को ऐसे सिस्टम दे चुकी हैं. इसमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, अडाणी डिफेंस, सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड और न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों में शामिल हैं. निबे डिफेंस, ए विजन और SMPP जैसी कंपनियां भी बोली में शामिल हो सकती हैं.
ये ड्रोन क्या कर सकते हैं?
- दुश्मन क्षेत्र में गहराई तक घुसकर हमला (शॉर्ट रेंज से लेकर लंबी दूरी तक) करना.
- दुश्मन के बेस, पोस्ट और ठिकानों को तबाह करना.
- जेमिंग (रडार सिग्नल रोकना) और स्पूफिंग (झूठे सिग्नल भेजना) जैसे इलेक्ट्रॉनिक हमलों में भी काम करना.
- एक्सप्लोसिव से लैस, लक्ष्य ढूंढकर हमला करने की क्षमता है.
- दुश्मन को पहले पता नहीं चलता, अचानक विनाश होता है.
स्पेशल ड्रोन यूनिट्स भी बनाई जाएंगी
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पिछले साल 'ईगल ऑन एवरी आर्म' का कॉन्सेप्ट दिया था. इसका मतलब है हर जवान के पास ड्रोन क्षमता हो. इसके तहत स्पेशल ड्रोन यूनिट्स भी बनाई जा रही हैं. ये आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है, क्योंकि अब सेना विदेशी हथियारों की जगह देशी तकनीक पर भरोसा बढ़ा रही है.
स्वदेशी औद्योगिक इकोसिस्टम बनेगा
सूत्रों के मुताबिक इस ऑर्डर से एक ऐसा स्वदेशी औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार होगा, जिससे सेना को जब भी जरूरत पड़े, भारतीय कंपनियां ऐसे सिस्टम तैयार करके दे सकें. यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी, ट्रायल और ऑर्डर कुछ महीनों में हो जाएंगे. इससे बॉर्डर पर दुश्मन के खिलाफ भारतीय सेना की मारक क्षमता और मजबूत होगी.