देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व में सोमवार (8 जून, 2026) को इंडिया गठबंधन की होने वाली बैठक को लेकर इस वक्त खूब चर्चा हो रही है. कांग्रेस पार्टी इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ कल सोमवार (8 जून, 2026) को नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को ऊर्जा आपूर्ति संकट, LPG सिलेंडरों के बढ़ते दामों, सीबीएसई विवाद, नीट परीक्षा में गड़बड़ी के साथ-साथ 2029 के आगामी लोकसभा चुनावों की रणनीति पर मंथन करने और विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के विषय पर चर्चा करेगी.

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हालांकि, विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों की होने वाली अहम बैठक में तमिलनाडु के पूर्व सीएम एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके ने न शामिल होने का फैसला किया है. डीएमके ने फिलहाल खुद को इस बैठक से अलग रखा है और उसने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराने का फैसला किया है. जबकि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पहली बार दिल्ली में आयोजित बैठक में शामिल होने वाली हैं. इंडिया गठबंधन की होने वाली इस बैठक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के नेताओं की तरफ से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं हैं.

इंडिया गठबंधन की बैठक बहुत महत्वपूर्णः केसी वेणुगोपाल 

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कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ‘इंडिया गठबंधन की यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण है. हम बैठक के बाद इसके पीछे के एजेंडे की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘इस बैठक में देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा होगी. केंद्र सरकार जिस तरह से लोकतांत्रिक मूल्यों को दरकिनार कर रही है, उस भी विचार-विमर्श होगा. छात्रों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के प्रमुख विषय होंगे. इसके अलावा भी बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जानी है.

आए तो ठीक, नहीं तो उन्हें जबरन नहीं बुलाया जा सकताः उदित राज

कांग्रेस नेता उदित राज ने इंडिया गठबंधन की होने वाली अहम बैठक में डीएमके के शामिल न होने को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा, ‘वे आते हैं, तो अच्छा है, नहीं तो फिर भी संविधान को और लोकतंत्र को बचाने की हमारी लड़ाई जारी रहेगी. उन्हें जबरन तो बुलाया नहीं जा सकता है.’ उन्होंने कहा, ‘डीएमके की जो विचारधारा है, वो कहीं से भी आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से मेल नहीं खाती है, तो आखिर में वो किसे ताकत देना चाहते हैं. इस देश में सिर्फ दो ही धूरी हैं, एक कांग्रेस और दूसरा बीजेपी. उन्हें किसी न किसी के साथ तो रहना ही है. अगर वे न्यूट्रल रहते हैं, तो ये बीजेपी को समर्थन देने जैसा ही होगा.’

उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘जहां तक आम आदमी पार्टी की बात है, तो वो तो भाजपा का बाई-प्रोडक्ट है. वो ये न भूलें कि अन्ना आंदोलन अपने आप में कुछ नहीं था और अरविंद केजरीवाल भी अपने आप में कुछ नहीं थे. उनके पीछे आरएसएस और भाजपा का समर्थन था, जिसकी वजह से वो खड़े हो गए थे. तो ऐसे में अगर आम आदमी पार्टी कांग्रेस या इंडिया गठबंधन के साथ नहीं आती है, तो वे परोक्ष रूप से भाजपा की मदद ही कर रहे हैं.’

क्या विपक्ष को छात्रों, बढ़ती महंगाई की चिंता नहीं होनी चाहिएः मनोज

वहीं, राजद से राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘इस वक्त देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय पश्चिम एशिया और ईरान में जो हो रहा है और उसका असर भारत पर क्या हो रहा है, वो है. चंद घंटों पहले LPG सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की वृद्धि हुई है, ये मार किस पर पड़ रही है, निम्न आय वर्ग और मध्यम वर्ग पर. क्या इस बात की चिंता देश के विपक्ष को नहीं करनी चाहिए?’

उन्होंने कहा, ‘यहां छात्रों और नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, क्या इसकी चिंता विपक्ष को नहीं करनी चाहिए? मैं समझता हूं कि इस संदर्भ में कल होने वाली इंडिया गठबंधन की मीटिंग को देखा जाएगा. क्योंकि आज की तारीख में यही राष्ट्रीय मुद्दे हैं – बेरोजगारी, छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़, निम्न और मध्यम आय वर्ग की जिंदगी को तहस-नहस करने की कोशिश, सरकार का ढुलमूल रवैया और उसके अलावा संस्थाओं और संस्थानों पर जो कब्जे और आधिपत्य की प्रवृति है वो.‘

जहां कांग्रेस है, वहां कोई गठबंधन नहीं हो सकताः रेखा शर्मा

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता रेखा शर्मा ने इंडिया ब्लॉक की मीटिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘इंडिया गठबंधन जैसी कोई चीज अब नहीं रह गई है. हम सभी देख लिया कि जहां भी कोई समस्या होती है, वहां गठबंधन टूटता नजर आता है, चाहे पश्चिम बंगाल को देखा जाए या तमिलनाडु को ही देख लिया जाए.’

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस जहां है, वहां कोई गठबंधन नहीं हो सकता, क्योंकि ये सब कांग्रेस से ही टूटे हुए हैं. वे कांग्रेस से पहले से खफा थे, इसलिए इन्होंने अपनी पार्टी बनाई. अगर इसे जबरदस्ती जोड़ेंगे, तो वो ज्यादा दिन तक नहीं चलता.’

धीरे-धीरे अपनी समाप्ति की ओर है इंडी गठबंधनः मनन मिश्रा

वहीं, भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा विपक्षी दलों की बैठक पर कहा, ‘इंडिया गठबंधन नाम की अब कोई चीज बची नहीं है. कांग्रेस से डीएमके ने दरकिनार कर लिया, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी आज कुछ कहा है. कम्युनिस्टों ने भी कुछ कहा है, तो धीरे-धीरे इंडी गठबंधन टूटता जा रहा है, वो अपनी समाप्ती की ओर है.’

उन्होंने कहा, ‘सभी लोग अपने आपको कांग्रेस से अलग करना चाह रहे हैं, तो ऐसे में ये मीटिंग हो या न हो, इससे कोई फर्क देश पर नहीं पड़ता है. देश की राजनीति पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ेगा.’

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