बांग्लादेश में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारत ने मंगलवार (20 जनवरी 2026) को वहां तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया. बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने से कुछ सप्ताह पहले भारत ने यह कदम उठाया है. आधिकारिक सूत्रों ने कहा, ‘‘सुरक्षा स्थिति को देखते हुए एहतियात के तौर पर हमने उच्चायोग और अन्य पदों पर तैनात अपने अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी है.’’ उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मिशन (उच्चायोग) खुले हैं और सभी पदों पर कर्मी कार्यरत हैं.

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ढाका में स्थित उच्चायोग के अलावा चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट में भी भारत के राजनयिक कार्यरत हैं. अभी यह पता नहीं चल पाया है कि राजनयिकों और अन्य अधिकारियों के परिवार भारत कब लौटेंगे. ऐसी सूचना है कि भारत ने बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लिए बांग्लादेश को ‘‘गैर-पारिवारिक’’ गंतव्य बनाने का निर्णय लिया है. पड़ोसी देश पाकिस्तान भी भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लिए एक ‘गैर-पारिवारिक’ गंतव्य है.

शेख हसीना सरकार का पतन

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अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने पर भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए. भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर होने वाले हमलों को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है. बीते महीने ही दीपू चंद्र दास नाम के व्यक्ति को भीड़ ने ईशानिंदा के झूठे आरोप में मार दिया था. इसके बाद उसकी लाश को बीच चौराहे पर लटका कर जला दिया था. इस मामले के बाद दोनों देशों के संबंधों में और भी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है.

अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी घटना

बता दें कि बांग्लादेश में जारी आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक जनवरी से दिसंबर, 2025 के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी 645 घटना दर्ज की जा चुकी हैं.  यह रिपोर्ट देशभर से वेरिफाइड FIR, जनरल डायरी, चार्जशीट  के आधार पर तैयार की गई थी.

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