जब भी जोजिला टनल, लद्दाख कनेक्टिविटी या बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की उपलब्धियों की बात होती है, तो चर्चा भारी-भरकम मशीनों और इंजीनियरिंग चमत्कारों की होती है. लेकिन इस कठिन भूभाग की एक ऐसी कहानी भी है, जिसके केंद्र में कोई अधिकारी या इंजीनियर नहीं, बल्कि एक मूक-बधिर बुलडोजर चालक है. उसका नाम है इनायतुल्लाह खान, जिसे पूरा इलाका प्यार से "तुल्ला" कहता है.

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दिलचस्प बात यह है कि इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद तुल्ला स्थायी कर्मचारी नहीं हैं. सोनमर्ग के गगनगीर के पास नीलगिरी गांव में रहने वाले इस अविवाहित और निरक्षर शख्स को वर्षों तक बेहद मामूली वेतन पर काम करना पड़ा. फिर भी वह हर साल मौत जैसे जोखिमों के बीच लौटते हैं ताकि लद्दाख का रास्ता खुल सके.

तुल्ला की हैरान करने वाली कहानी

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कश्मीर और लद्दाख को जोड़ने वाला जोजिला दर्रा दुनिया के सबसे दुर्गम इलाकों में गिना जाता है. यहां से गुजरने वाली सड़क दुनिया की 10 सबसे खतरनाक सड़कों में शामिल मानी जाती है. सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण 434 किलोमीटर लंबा यह मार्ग कई महीनों तक बंद रहता है. मई में जब रास्ता खोलने का काम शुरू होता है, तब मशीनों से पहले जिस शख्स पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है, वह तुल्ला हैं.

बीआरओ के अधिकारियों के मुताबिक, एक बार उनकी गैरमौजूदगी में टीम ने काम शुरू किया और गलती से सड़क छोड़कर ग्लेशियर पर पहुंच गई. दो घंटे बाद लौटे तुल्ला ने असली सड़क का रास्ता दिखाया, जो महज 15 फीट दूर थी.

उनकी बहादुरी की कहानियां अब स्थानीय किंवदंतियों का हिस्सा बन चुकी हैं. सहकर्मियों के मुताबिक, पिछले 15 वर्षों में तीन बार ऐसा हुआ जब काम के दौरान तुल्ला हिमस्खलन में बह गए. बुलडोजर तक नहीं मिला, लेकिन हर बार उन्होंने नाटकीय वापसी की. हार मानना शायद उनकी फितरत में ही नहीं है.

कौन है तुल्ला?

तुल्ला न तो सुन सकते हैं और न ही बोल सकते हैं. लेकिन जोजिला की पहाड़ियों, चट्टानों और बर्फीले रास्तों की समझ उन्हें किसी भी आधुनिक तकनीक से अलग पहचान देती है. वह सैकड़ों फीट जमी बर्फ हटाते हैं, खतरनाक चट्टानों को समतल करते हैं और हिमस्खलन के बाद सड़क पर जमा मलबे को साफ करते हैं.

तुल्ला कभी स्कूल नहीं गए. गरीबी, अशिक्षा और दो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने बुलडोजर चलाना सीखा और फिर उसमें ऐसी महारत हासिल की कि आज उन्हें बीआरओ की बीकन परियोजना का विशेषज्ञ माना जाता है. उनके वरिष्ठ अमित चंदर कहते हैं, "वह किसी भी मशीन को संभाल सकते हैं और इलाके के बारे में उन्हें पूरी जानकारी है."

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