पंचायती राज मंत्रालय ने आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत पहल की शुरुआत की है, जिसके तहत देश के हर जिले में एक मॉडल ग्राम पंचायत बनाई जाएगी. इस पहल के तहत महिलाओं के लिए पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूत किया जाएगा.

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और पंचायतीराज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कार्यक्रम के दौरान महिला प्रधानों से अपील की कि वे केंद्र सरकार की योजनाओं को अपने गांवों में सक्रिय रूप से लागू करें ताकि महिलाओं और बच्चों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके.

महिला हितैषी ग्राम पंचायतों के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टमइस पहल के तहत रियल-टाइम मॉनिटरिंग डैशबोर्ड लॉन्च किया गया है, जो इन महिला-हितैषी ग्राम पंचायतों की प्रगति पर नजर रखेगा. ये डिजिटल प्लेटफॉर्म पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी और उनके कल्याण से जुड़े डेटा का विश्लेषण करेगा, जिससे योजनाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा.

महिला प्रधानों की अहम भूमिकाराज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा, 'महिला प्रधानों की जिम्मेदारी है कि वे अपने गांवों में सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को ठीक से लागू करें. हर ग्राम पंचायत में ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण समिति होती है, जो समुदाय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है. उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना के बारे में बताया जो 12 तरह की स्वास्थ्य सेवाएं जैसे कि बुजुर्गों की देखभाल, दंत चिकित्सा, कैंसर जांच और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाएं प्रदान करती है. उन्होंने जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जो गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल पर केंद्रित है'.

770 ग्राम पंचायतों का होगा विशेष प्रशिक्षणराज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने घोषणा की कि देशभर में 770 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है, जहां महिला प्रधानों को नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. उन्होंने महिला प्रधानों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, विधवा और दिव्यांगजन पेंशन योजना, आयुष्मान भारत और अंगदान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को अपने गांवों में बढ़ावा दें.

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदमपंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि यह पहल महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने और उन्हें नेतृत्व की भूमिका में लाने के लिए बनाई गई है. उन्होंने कहा कि पंचायतों को एक ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जिससे महिलाएं अपने सपनों को पूरा कर सकें और समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें.

अन्य राज्यों के सफल मॉडल से प्रेरणासंयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की डॉ. दीपा प्रसाद ने केरल, ओडिशा और राजस्थान के सफल ग्राम पंचायत मॉडल का उदाहरण दिया. जानकारी देते हुए बताया कि केरल की जागरथा समिति महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करती है. ओडिशा की पहल बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को रोकने पर केंद्रित है. राजस्थान में UNFPA का सहयोग महिला-हितैषी और बाल-हितैषी ग्राम पंचायतों के विकास पर केंद्रित है.

8 मार्च को सभी ग्राम पंचायतों में महिला ग्राम सभामहिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए (8 मार्च, 2025) को पूरे देश में "महिला ग्राम सभा" आयोजित की जाएगी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनके अधिकारों को मजबूत करने पर चर्चा होगी. यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सशक्त महिला, सशक्त पंचायत, सशक्त भारत" के विजन को आगे बढ़ाने में दिशा में है.

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