तहलका के संस्थापक और पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को अपनी एक जूनियर महिला सहकर्मी के साथ दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई है. इस मामले में सरकारी वकील के लिए तेजपाल के घटना के बाद पीड़ित महिला को भेजा गया एक ईमेल सबसे अहम सबूत बना है.

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क्या है मामलातेजपाल पर आरोप था कि उन्होंने 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा के एक 5-स्टार होटल की लिफ्ट में अपनी महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया. यह घटना पत्रिका के आयोजित 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम के दौरान हुई थी.

हो गए थे बरीमई 2021 में एक ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था लेकिन गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट ने बरी किए जाने के फैसले को रद्द करते हुए तेजपाल को दोषी पाया और सजा सुनाई.

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मांगी थी माफीमहिला सहकर्मी के तेजपाल के खिलाफ शिकायत करने के अगले ही दिन उन्होंने एक मेल किया था. इस मेंल तेजपाल ने स्वीकार किया कि उन्होंने महिला के परिवार के साथ वर्षों से चले आ रहे भरोसे और सम्मान के रिश्ते को तोड़ा है. उन्होंने लिखा- 'मैं उस शर्मनाक गलती के लिए बिना शर्त माफी मांगता हूं, जिसके कारण मैंने 7 और 8 नवंबर 2013 को आपके साथ जबरन संबंध बनाने की कोशिश की, जबकि आपने साफ कर दिया था कि आप ऐसा नहीं चाहती हैं. उन्होंने माना कि उनके और महिला के बीच पद का अंतर था और उन्हें इस भरोसे का फायदा नहीं उठाना चाहिए था. उन्होंने लिखा कि उन्हें खुद पर बेहद शर्मिंदगी महसूस हो रही है और वे इस घटना की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं.'

'मैं जानता हूं कि आपको लगता है कि मैंने तहलका के संपादक के रूप में अपने पद का इस्तेमाल आप पर दबाव बनाने के लिए किया. मैं यह मानता हूं कि जब आपने कहा था कि मैं तुम्हारा बॉस हूं, तब मैंने कहा था, 'इससे काम आसान हो जाता है'. लेकिन मैं यह भी रिकॉर्ड पर रखना चाहता हूं कि जैसे ही ये शब्द मेरे मुंह से निकले, मैंने तुरंत इन्हें वापस ले लिया था और कहा था, 'मैं अपने ये शब्द तुरंत वापस लेता हूं. मेरे किसी भी रिश्ते का मेरे पद से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा है.'

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