पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान जंग और बढ़ती तेल की कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया है. 10 मई को उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए हमें एक बार फिर कोरोना महामारी के दौरान अपनाई गई रणनीतियों को राष्ट्रीय हित में दोहराना चाहिए. PM मोदी की इस अपील में वर्क फ्रॉम होम (WFH), ऑनलाइन मीटिंग, कार पूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने को कहा है. लेकिन यह सब होना कितना मुमकिन है?

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कोरोना काल में क्या-क्या प्रक्रिया शुरू हुई थीं?

कोरोना महामारी के दौरान आम जनजीवन को सुरक्षित रखने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारों ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए थे. उस वक्त:

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1. देशव्यापी लॉकडाउन और कंटेनमेंट जोनः यह सबसे कठोर कदम था. 24 मार्च 2020 को पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया था. इसके तहत सभी गैर-जरूरी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई और लोगों को अपने घरों में ही रहने का निर्देश दिया गया. संक्रमण के हॉटस्पॉट वाले इलाकों को 'कंटेनमेंट जोन' घोषित कर वहां आवाजाही पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई थी. सिर्फ जरूरी सेवाओं को ही अनुमति थी.

2. नाइट कर्फ्यूः अनलॉक प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी वायरस की रफ्तार को कम करने के लिए सभी गैर-जरूरी गतिविधियों के लिए रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक रात्रि कर्फ्यू (नाइट कर्फ्यू) लागू कर दिया गया था.

3. सार्वजनिक जगहों और आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंधः संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए उन सभी जगहों पर ताला लगा दिया गया जहां भीड़ इकट्ठा होने की संभावना थी. इनमें धार्मिक स्थल और सार्वजनिक पूजा स्थल, सिनेमाघर, जिम, स्विमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थिएटर और बार जैसी जगहें शामिल थीं. सभी तरह के सामाजिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और धार्मिक समागम एवं बड़े आयोजन भी बंद थे.

4. स्कूल-कॉलेजों को बंद करना और ऑनलाइन क्लासेस: शिक्षण संस्थानों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. पढ़ाई जारी रखने के लिए बड़े पैमाने पर ऑनलाइन क्लासेस की व्यवस्था लागू की गई थी.

5. परिवहन सेवाओं का निलंबनः संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सभी तरह की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राएं, मेट्रो रेल और इंटरसिटी बस सेवाओं को पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया था.

6. अनिवार्य मास्क और सोशल डिस्टेंसिंगः घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया था. साथ ही, सार्वजनिक जगहों पर कम से कम 2 गज की दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) बनाए रखने का सख्त नियम लागू किया गया था.

7. हैंड सैनिटाइजेशन और थर्मल स्क्रीनिंगः सभी सार्वजनिक जगहों, कार्यालयों और दुकानों में एंट्री से पहले थर्मल स्क्रीनिंग और हैंड सैनिटाइजेशन अनिवार्य कर दिया गया था.

8. शराब और पान मसाला बिक्रीः कई राज्यों ने सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ इकट्ठा होने और थूकने की आदत को रोकने के लिए शराब और पान मसाले की दुकानों पर भी अस्थायी रोक लगा दी थी.

तो क्या कोरोना काल वाली प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकती हैं?

यहीं पर पेंच फंसता है. कोरोना काल में लॉकडाउन का डर था और कानूनी ताकत से काम चलता था, लेकिन इस बार PM ने इसे 'अपील' कहा है, हिदायत या आदेश नहीं. इसे पूरी तरह से लागू करना आसान नहीं होगा, लेकिन नामुमकिन भी नहीं: 

  • वर्क फ्रॉम होम (WFH): यह इकलौती ऐसी प्रक्रिया है जिसे सबसे आसानी से दोबारा लागू किया जा सकता है. कोरोना काल में IT और सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने साबित कर दिया था कि प्रोडक्शन को नुकसान पहुंचाए बिना WFH मुमकिन है. हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल जैसे सेक्टर्स में इसे लागू करना अब भी मुश्किल है.
  • यात्रा और सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिबंध: बिना किसी स्वास्थ्य आपातकाल के, हर दिन करोड़ों की कमाई करने वाली एयरलाइंस, मेट्रो, सिनेमाघर और मॉल्स को पूरी तरह से बंद करना लगभग असंभव है. इससे अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा और बेरोजगारी बढ़ेगी.
  • स्कूल-कॉलेज बंद करना: शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन और ऑफलाइन का मिलाजुला (हाइब्रिड) मॉडल तो सफल हो सकता है, लेकिन सभी स्कूलों को पूर्ण रूप से बंद करना एक कारगर समाधान नहीं है.
  • कार पूलिंग: दिलचस्प बात यह है कि PM मोदी की अपील में कार पूलिंग पर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही गई है. बल्कि, इस बार कार पूलिंग को प्रोत्साहित करने की बात कही गई है. इसका मकसद फ्यूल की बचत करना है, जिसे लोगों के बीच जागरूकता फैलाकर हासिल किया जा सकता है.

PM मोदी की हिदायत पर अमल करना कितना मुमकिन है?

PM मोदी की ओर से की गई यह अपील नैतिक और राष्ट्रीय कर्तव्य की भावना से की गई एक सलाह है, लेकिन इसके अमल में कई व्यावहारिक और कानूनी चुनौतियां हैं...

  • कानूनी हैसियत: एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील अभी सिर्फ एक सलाह है, कानूनी रूप से बाध्यकारी आदेश नहीं है. भारत में अभी तक कोई ऐसा समर्पित कानून नहीं है जो कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का कानूनी अधिकार देता हो. कोरोना काल में WFH को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत बाध्यकारी बनाया गया था, लेकिन वर्तमान में ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है. इसलिए, कंपनियां अपने मुताबिक कर्मचारियों को ऑफिस बुलाने का फैसला ले सकती हैं.
  • कंपनियों का रुख: हालांकि, PM की अपील का असर भी दिखने लगा है. IT कर्मचारियों की संस्था 'नैसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (NITES)' ने श्रम मंत्रालय को पत्र लिखकर देश के 58 लाख IT कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य करने की सलाह जारी करने का आग्रह किया है. NITES का तर्क है कि कोरोना काल ने यह साबित कर दिया है कि IT सेक्टर में प्रोडक्टिविटी को नुकसान पहुंचाए बिना WFH को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है.
  • सामाजिक स्वीकार्यता और चुनौतियां: जहां IT जैसे सेक्टर्स में यह संभव है, वहीं विनिर्माण, खुदरा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में इसे लागू करना बेहद मुश्किल है. यह एक बड़ी बहस का विषय है. PM मोदी के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है. जहां कुछ लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं कुछ ने इसे ‘नाकामी के सबूत’ के रूप में देखा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने PM की अपील पर पलटवार करते हुए इसे आर्थिक नीतियों की विफलता करार दिया.

कुल मिलाकर, PM मोदी की अपील एक ऐसे समय में आई है जब देश को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उनकी मंशा कोरोना काल की सीख की मदद से आर्थिक संकट से उबरने की है. हालांकि, यह एक कानूनी बाध्यता नहीं बल्कि एक नैतिक अपील है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस दिशा में कोई ठोस नीतिगत कदम उठाती है या फिर यह सिर्फ एक अस्थायी सुझाव बनकर रह जाएगा.