केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार (23 फरवरी) को देश की पहली आतंकवाद विरोधी पॉलिसी को जारी किया है. जिसका नाम है, ‘प्रहार (PRAHAAR)’. यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति पर आधारित है. नीति का मकसद खुफिया आधारित कार्रवाई से आतंकी हमलों की रोकथाम और फौरन प्रतिक्रिया देना है. 8 पेज की नीति में आतंकी हमलों से रोकने पर फोकस किया गया है. आइए जानते हैं इस नीति के बारे में.

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क्या है ‘प्रहार (PRAHAAR)’?

Prevention- भारतीयों और उनके हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलों की रोकथाम.Responses-  खतरे के जवाब में फौरन और संतुलित जवाबी कार्रवाई.Aggregating-  सुरक्षा एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता वृद्धि.Human rights and ‘Rule of Law’ -  मानवाधिकार और विधि के शासन का पालन.Attenuating -  आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली स्थितियों को कम करना, जिसमें कट्टरपंथ भी शामिल है.Aligning and shaping -  आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करनाRecovery and resilience -  समाज की भागीदारी से पुनर्वास और लचीलापन बढ़ाना

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‘प्रहार (PRAHAAR)’ में इन बिंदुओं पर फोकस?

8 पेज की इस पॉलिसी में आतंकी हमलों की चुनौती से निपटने, फौरन सिस्टम और सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत करने पर फोकस है. रणनीति में सुरक्षा एजेंसियों की क्षमताओं में इजाफा करना, मानवाधिकारों का सम्मान और कट्टरपंथ को रोकने पर जोर दिया गया है. प्रहार में टेररिज्म को रोकने और उससे निपटने के लिए एक व्यवस्थित और खुफिया जानकारी के स्ट्रक्टर के बारे में बताया गया है. 

पॉलिसी में आतंकवाद के खिलाफ चुनौती का जिक्र इस पॉलिसी में साफ कहा गया है कि भारत को सीमा पार से आतंकवाद, साइबर अटैक, ड्रोन दुरुपयोग और आतंकियों को आर्थिक मदद करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इंटरनेशनल सहयोग और सामाजिक भागीदारी के साथ टेक्नोलॉजी को हाईटेक करके टेररिज्म के खिलाफ लड़ाई जारी है. कुछ पड़ोसी देशों ने आतंकवाद को अपनी सरकार की नीति में हथियार की तरह इस्तेमाल किया है. बावजूद इसके भारत आतंकवाद को किसी खास धर्म, समुदाय, जाति, देश या सभ्यता से जोड़कर नहीं देखता है. भारत हमेशा आतंकवाद की कड़ी निंदा करता है.

‘प्रहार (PRAHAAR)’ में क्या होगा खास

-  नीति का मुख्य मकसद भारतीयों और देश के हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलों को रोकना है. साथ ही संभावित खतरों का फौरन संतुलित जवाब देना है.-  इसके अलावा इस पॉलिसी में समाज को एकजुट कर भागीदारी का तरीका अपनाने और कट्टरपंथ के खात्मे की बात कही गई है.- नीति में यह भी कहा गया है कि आतंक के खिलाफ सरकार के अलग-अलग विभागों को एकजुट करने के साथ ही खतरों से निपटने के लिए मानवाधिकार और कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी.-  नीति में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयासों में तालमेल बिठाने की बात कही गई है.-  अलकायदा और ISIS जैसे आतंकी संगठनों के खतरे का भी पॉलिसी में जिक्र किया गया है. -  क्रिप्टो वॉलेट, एन्क्रिप्शन और डार्क वेब जैसी टेक्नोलॉजी को भी चुनौती बताया गया है.- इसके अलावा CBRNED (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक और डिजिटल सामग्री) तक पहुंच को रोकने की चुनौती के बारे में बताया गया है.