'31 मार्च के बाद हुआ बस्तर में आजादी का सूर्योदय, खत्म हो चुका है नक्सलवाद', गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान
Amit Shah Chhattisgarh Visit: अमित शाह ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और जब पूरे बस्तर में ऐसे 70 जन सुविधा केंद्र बन जाएंगे, तब वह नए सूर्योदय का दिन होगा.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (18 मई) को कहा कि देश को भले ही 77-78 वर्ष पहले आजादी मिल गई थी, लेकिन बस्तर में आजादी का सूर्योदय 31 मार्च 2026 के बाद हुआ है. उन्होंने इसी साल 31 मार्च को छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद की समाप्ति की घोषणा की थी. इसके बाद सोमवार को पहली बार बस्तर पहुंचे जहां उन्होंने जिले के नेतानार गांव में पहले जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया.
अमित शाह ने कहा, “देश को आजादी भले ही 77-78 साल पहले मिल गई थी, लेकिन हमारे बस्तर में 31 मार्च 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है. मैं विश्वास दिला कर जाता हूं, जो देरी हुई उसके नुकसान की पूरी भरपाई की जाएगी. क्षेत्र के विकास के लिए भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी.”
उन्होंने लोगों से विकास कार्यों में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा, “अलग-अलग तरह की बातें करने वाले लोग आएंगे, लेकिन विकास को रोकना कभी विकास को नहीं लाता है. विकास को गति मिलेगी तभी उसका लाभ लोगों तक पहुंचेगा.”
बस्तर में बनाए जाएंगे 70 जन सुविधा केंद्र
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और जब पूरे बस्तर में ऐसे 70 जन सुविधा केंद्र बन जाएंगे, तब वह ‘‘नए सूर्योदय’’ का दिन होगा. राज्य से नक्सलवाद समाप्त होने की घोषणा के बाद सरकार ने बस्तर क्षेत्र में स्थापित सुरक्षा शिविरों को जन सुविधा केंद्रों में बदलने का फैसला किया है. इन केंद्रों में लोगों को एक ही परिसर में विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
शाह ने केंद्र की शुरूआत करते हुए कहा, ''आज आप सबके लिए और विशेष कर कर मेरे लिए बहुत ऐतिहासिक दिन है. शायद आप लोगों को अभी इसका महत्व समझ में नहीं आएगा, परंतु मैं आपको भरोसा दिला कर जाता हूं कि यह केंद्र आने वाले समय में आदिवासी भाई-बहन और बच्चों से हरा भरा हंसता खेलता दिखाई पड़ेगा, हम इसे ऐसे परिवर्तित करेंगे.''
'आदिवासियों की सेवा करने का तीर्थ स्थल बनने का काम शुरू' - अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एक जमाने में यहां एक साथ छह पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी गई थी. यहां के स्कूल उजाड़े गए थे. यहां अस्पताल उजाड़े गए, यहां राशन नहीं पहुंचने दिया, यहां रोजगार और शिक्षा नहीं पहुंचने दिया, बैंक की कल्पना भी नहीं कर सकते थे, आज उस जगह पर गरीब आदिवासियों की सेवा करने का तीर्थ स्थल बनने का काम शुरू हो रहा है.
शाह ने कहा, ''ढेर सारे आदिवासी भाई बहन जिनका कोई दोष नहीं था, खेत में जाते थे और आईईडी से उनके पैर उड़ जाते थे. ढेर सारे बच्चों को स्कूल से उठाकर पूरे जीवन के लिए नक्सलवादी बनाया गया और जनताना सरकार के न्याय के नाम से कई निर्देशों को सार्वजनिक रूप से फांसी देने का काम किया गया.''
उन्होंने कहा, ''देश आजाद तो हो गया मगर आजादी यहां तक नहीं पहुंचने दी गई थी. ना बिजली आई, ना पानी आया, ना स्कूल था, ना सरकार का सस्ता अनाज का फायदा मिला. जब नक्सलवाद की समाप्ति का संकल्प लिया गया तब इसका उद्देश्य नक्सलवादियों को समाप्त करना नहीं था. इसका उद्देश्य इस क्षेत्र के गरीब आदिवासियों के जीवन में वह सभी सुविधाएं जो बड़े-बड़े शहरों में होती हैं वह आपके बच्चों के लिए ला पाए यह हमारा उद्देश्य था.''
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