नई दिल्ली: सड़क हादसों की बढ़ती घटनाओं पर सरकार सख्त है. संसद की स्थायी समिति ने सड़क हादसों को लेकर कई बड़े सुझाव दिए हैं. रोडरेज की घटनाओं को रोकने के लिए भी कई सिफारिशें की गई हैं. भारत में सड़क हादसों में एक घंटे में औसतन 17 लोगों की जान चली जाती है.
लोकसभा में पेश की गई संसदीय समिति की रिपोर्ट
सड़क हादसे रोकने के लिए सरकार ने पहल की है. बढ़ते हादसों को रोकने के लिए सरकार ने पिछले साल अगस्त में मोटर यान संशोधन बिल लोकसभा में पेश किया था. बाद में इसे परिवहन मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति के पास भेज दिया गया था. समिति की रिपोर्ट आ गई है. कल इसे लोकसभा में पेश किया गया. रिपोर्ट में कई सुझाव दिए गए हैं.
- ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के ख़िलाफ़ ज्यादा ज़ुर्माना लगे.
- नियम तोड़ने वालों पर हर साल ज़ुर्माना बढ़ाया जाए.
- हर साल ज़ुर्माने में 10 फीसद बढ़ोतरी करने की सिफ़ारिश भी की गई है.
- बिल में ही ये प्रावधान हो कि संसद की इजाजत लिए बिना सरकार हर साल ज़ुर्माना बढ़ा सके.
हर 30 किमी पर एंबुलेंस और राष्ट्रीय राजमार्गों पर न्यूनतम स्पीड सीमा भी तय करने जैसे सुझाव दिए गए हैं. कई बार ऐसा होता है कि शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से हादसे की बात सामने आती है. ऐसे मामलों में लापरवाही की बात कह कर गुनहगार बच निकलते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
हादसे में मौत हुई तो गैर इरादतन हत्या का केस चले
कमेटी ने सुझाव दिया है कि शराब पीकर गाड़ी चलाने पर दुर्घटना में किसी की मौत होती है तो ऐसे मामलों को गैर इरादतन हत्या का दोषी माना जाए और लापरवाही नहीं बल्कि प्री प्लान्ड क्राइम की श्रेणी में रखा जाए.
निजी गाड़ियों में लाइसेंसी बंदूक ले जाने पर रोक लगे
ऐसे मामले भी सामने आते है जिसमें कोई बेगुनाह गाड़ी चलाने वाले के गुस्से का शिकार हो जाता है. ऐसी घटनाएं रोड रेज कही जाती हैं. इसको रोकने के लिए समिति ने कहा है कि महानगरों और बड़े शहरों में प्राइवेट गाड़ियों में लाइसेंसी बंदूक ले जाने पर रोक लगे.
नाबालिग हादसा करे तो गाड़ी का मालिक ही जिम्मेदार होगानाबालिगों के गाड़ी चलाने की वजह से बढ़ते हादसों पर समिति ने कहा है कि ऐसे मामलों में गाड़ी के मालिक को ही ज़िम्मेदार माना जाए और इसके लिए ज्यादा से ज्यादा तीन साल की सजा का भी प्रावधान हो.
सुबह 3 से 5 बजे कमर्शियल वाहनों के चलने पर रोक हो
समिति ने सुबह तीन से पांच बजे के बीच कॉमर्शियल वाहनों के चलने पर भी रोक लगाने की सिफ़ारिश की है ताकि ड्राइवरों को आराम मिल सके. सरकार के सूत्रों के मुताबिक नौ मार्च से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे भाग में संसद से बिल को मंजूरी मिल सकती है.