Fuel Price Crisis : UAE में 52%, यूएस में 44%, भारत में 3 रुपये की पेट्रोल पर बढ़ोतरी, दुनिया बाकी देशों का क्या हाल?
पश्चिम एशिया संकट के बीच कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 100% तक बढ़ीं, लेकिन भारत में बढ़ोतरी सीमित रही। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी बड़ी वजह बताई।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है. कुछ में तो बढ़ोत्तरी 100 फीसदी को भी पार कर गई है. भारत में शुक्रवार (15 मई 2026) को पेट्रोल की कीमत में केवल 3.2% और डीजल में 3.4% की वृद्धि हुई है, जिसको लेकर विपक्ष सरकार को घेर रहा है. विपक्ष के हमलों के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने देश के सामने उन देशों की लिस्ट रखी है, जहां कीमतों में बेतहाशा उछाल दर्ज किया गया है.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक म्यांमार में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 89.7% और डीजल में 112.7% तक बढ़ोतरी हुई. पाकिस्तान, अमेरिका, फिलीपींस, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में भी ईंधन कीमतों में बड़ा उछाल दर्ज किया गया.
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100 डॉलर क्रूड के बीच भारत का संतुलन- किरेन रिजिजू
किरेन रिजिजू ने कहा कि अंतर राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॅालर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था और वैश्विक बाजार अस्थिरता के बावजूद भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने लंबे समय तक भारी नुकसान उठाकर कीमतों को नियंत्रित रखा, ताकि आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े. इसका असर यह हुआ कि दूसरे देशों की तुलना में भारत में ईंधन की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी देखने को मिली. रिजिजू ने ये भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने ऐसी नीतियों पर जोर दिया, जिससे देश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहे और आम लोगों पर ज्यादा बोझ भी न पड़े. इसे जनता को राहत देने वाला और जिम्मेदार नेतृत्व का उदाहरण माना जा रहा है.
अलग-अलग देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी (%)
| देश | पेट्रोल | डीजल |
| म्यांमार | +89.7% | +112.7% |
| मलेशिया | +56.3% | +71.2% |
| पाकिस्तान | +54.9% | +44.9% |
| संयुक्त अरब अमीरात | +52.4% | +86.1% |
| अमेरिका | +44.5% | +48.1% |
| फिलीपींस | +40.6% | +53.8% |
| श्रीलंका | +38.2% | +41.8% |
| नेपाल | +38.2% | +58.5% |
| दक्षिण अफ्रीका | +33.1% | +63.6% |
| कनाडा | +31.9% | +32.8% |
| न्यूजीलैंड | +30.7% | +88.6% |
| थाईलैंड | +29.7% | +32.4% |
| बेल्जियम | +25.3% | +30.9% |
| वियतनाम | +23.8% | +50.6% |
| चीन | +21.7% | +23.7% |
| फ्रांस | +20.9% | +31.0% |
| यूनाइटेड किंगडम | +19.2% | +34.2% |
| दक्षिण कोरिया | +19.0% | +26.2% |
| ऑस्ट्रेलिया | +18.5% | +43.1% |
| बांग्लादेश | +16.7% | +15.0% |
| इटली | +15.4% | +19.8% |
| जर्मनी | +13.7% | +19.8% |
| सिंगापुर | +12.7% | +64.7% |
| जापान | +9.7% | +11.2% |
| सऊदी अरब | +0.0% | +0.0% |
| भारत | +3.2% | +3.4% |
अमित मालवीय ने भारत की तुलना वैश्विक बाजार से की
बीजेपी आईटी सेल के प्रभारी अमीत मालवीय ने भी भारत की तुलना दूसरे देशों से करते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों का सीधा असर जनता पर पड़ा, लेकिन भारत ने लंबे समय तक लोगों को राहत देने की कोशिश की. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें तीन महीने में करीब 55% तक बढ़ गईं, जबकि मलेशिया में 56% और अमेरिका में करीब 45% तक बढ़ोतरी हुई.
कई देशों में डीजल की कीमतों में भी 50 से 100 प्रतिशत तक इजाफा देखने को मिला. अमित मालवीय ने कहा कि भारत ने करीब दो महीने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार के असर से लोगों को बचाए रखा और बाद में सीमित बढ़ोतरी की गई. उनका कहना था कि भारत में केवल लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो बाकी देशों की तुलना में काफी कम है. बीजेपी का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इसका असर ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने की चीजों, लॉजिस्टिक्स और घर के बजट पर भी पड़ता है. इसलिए ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखना महंगाई को काबू में रखने के लिए जरूरी माना गया.
विपक्ष ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है. कर्नाटक के मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि केंद्र सरकार को पहले से अंदाजा था कि ऐसी स्थिति आ सकती है, इसलिए उन्हें पहले से तैयारी करनी चाहिए थी.उन्होंने कहा कि पहले ही जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ रही हैं और ऐसे समय में पेट्रोल-डीजल महंगा करना आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है. उनका मानना है कि अगर सरकार ईंधन पर सब्सिडी देती तो इसका फायदा सीधे आम जनता को मिलता.
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