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गिग वर्कर्स की यूनियन ने किया बड़ा ऐलान, 26 जनवरी को ऑनलाइन ऐप बंद हड़ताल, 3 फरवरी को विरोध-प्रदर्शन

गिग और प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने 26 जनवरी 2026 को देश में ऑनलाइन हड़ताल की अपील की है. यूनियन का आरोप है कि जोमेटो जैसे प्लेटफॉर्म हर महीने 5,000 से ज्यादा वर्कर्स को टर्मिनेट कर देते हैं.

गिग और प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने देशभर के लाखों डिलीवरी पार्टनर्स, राइड-हेलिंग ड्राइवर्स और अन्य ऐप-बेस्ड वर्कर्स को एकजुट करने का बड़ा कदम उठाया है. यूनियन ने 26 जनवरी 2026 को पूरे देश में ऑनलाइन हड़ताल का आह्वान किया है, जिसमें वर्कर्स अपने ऐप बंद कर विरोध जताएंगे. इसके बाद 3 फरवरी को विभिन्न शहरों में सड़कों पर राष्ट्रव्यापी भौतिक प्रदर्शन होगा.

आंदोलन का नेतृत्व महिला गिग वर्कर्स करेंगी

खास बात यह है कि इस आंदोलन का नेतृत्व महिला गिग वर्कर्स करेंगी. यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में महिलाओं का शोषण सबसे ज्यादा हो रहा है. कई महिला वर्कर्स को सर्विस देने के बाद  पैसे कम दिए जाते है, मारपीट का सामना करना पड़ता है, और जब वे कंपनी से शिकायत करती हैं तो AI सिस्टम बस टाइम पास करता है. अंत में उनकी आईडी ब्लॉक कर दी जाती है और रोजगार छीन लिया जाता है. कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, लेकिन सरकार चुप है.

जोमेटो हर महीने हजारों वर्कर्स टर्मिनेट कर देते हैं

यूनियन का आरोप है कि जोमेटो जैसे प्लेटफॉर्म्स हर महीने 5,000 से ज्यादा वर्कर्स को टर्मिनेट कर देते हैं. अर्बन कंपनी के वर्कर्स इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जो मीडिया से बात करना चाहते हैं लेकिन डर के मारे चेहरा छुपाते हैं. क्या यह मौलिक अधिकारों का हनन नहीं है? वर्कर्स मजबूर होकर काम कर रहे हैं, फिर भी उनकी आवाज दबाई जा रही है.

सीमा सिंह ने बताया कि यूनियन ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को कई बार ज्ञापन दिए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. हाल ही में मंत्री मनसुख मांडविया ने 10 मिनट वाली इंस्टेंट डिलीवरी बंद करने की बात कही थी, लेकिन कोई लिखित आदेश या अधिसूचना नहीं आई. सरकार सिर्फ बातें करती है, लेकिन गिग वर्कर्स की असली समस्याओं आईडी ब्लॉकिंग, सुरक्षा, वर्कर स्टेटस पर चुप्पी साधे हुए है.


वर्कर्स की मुख्य शिकायतें क्या हैं?

मनमानी तरीके से आईडी ब्लॉकिंग और अनुचित रेटिंग सिस्टम

आय में लगातार कटौती, कमीशन बढ़ना और पारदर्शिता की कमी

ग्राहक शिकायतों पर वर्कर को सफाई देने का मौका न मिलना

डबल कैंसिलेशन पेनल्टी, टाइम कैप, बंडल बुकिंग और ऑटो-असाइन जैसी प्रणालियां

महिलाओं के लिए सुरक्षा की कमी, मासिक धर्म अवकाश और 'रेड बटन' इमरजेंसी फीचर की मांग

नई पॉलिसी या बदलाव से पहले वर्कर्स से कोई सलाह न लेना

यूनियन की प्रमुख मांगें

गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए अलग से एक मजबूत केंद्रीय कानून बनाया जाए

मनमानी आईडी ब्लॉकिंग और अनुचित रेटिंग पर तुरंत रोक

आय दरों में बढ़ोतरी, कमीशन कटौती पर लगाम

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न रोकने के लिए आंतरिक शिकायत समितियां

पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र और वर्कर्स-अनुकूल पॉलिसी

GIPSWU सभी गिग वर्कर्स से की अपील

GIPSWU ने सभी गिग वर्कर्स चाहे जोमेटो, स्विगी, अर्बन कंपनी, ओला, उबर या किसी भी अन्य प्लेटफॉर्म से जुड़े हों से अपील की है कि वे 26 जनवरी को ऐप बंद करके और 3 फरवरी को सड़क पर उतरकर एकजुट हों. साथ ही सांसदों, अन्य ट्रेड यूनियनों, महिला संगठनों और आम जनता से समर्थन मांगा है. यह सिर्फ हमारी लड़ाई नहीं है, यह पूरे डिजिटल इकोनॉमी के वर्कर्स की गरिमा और सुरक्षा की लड़ाई है. अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे और बड़े आंदोलन होंगे.

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