एक्सप्लोरर

अमेरिका ने दी थी इमरान खान सरकार गिराने की धमकी? लीक डॉक्यूमेंट से पाकिस्तानी राजनीति में मचा भूचाल

पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान की सत्ता से विदाई को लेकर अब एक ऐसा दस्तावेज सामने आया है जिसने पुराने सवालों को फिर जिंदा कर दिया है.

पाकिस्तान की राजनीति में 2022 में आए सबसे बड़े भूचाल, तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान की सत्ता से विदाई को लेकर अब एक ऐसा दस्तावेज सामने आया है जिसने पुराने सवालों को फिर जिंदा कर दिया है. अमेरिकी खोजी मीडिया प्लेटफॉर्म ड्रॉप साइट न्यूज ने पहली बार पाकिस्तान के बहुचर्चित 'साइफर' यानी राजनयिक गोपनीय केबल( Cable I-0678) का पूरा ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक किया है.

यह वही दस्तावेज है जिसे इमरान खान लगातार अपनी सरकार गिराने की 'विदेशी साजिश' का सबूत बताते रहे हैं. इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की सेना, अमेरिका और पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति को लेकर गंभीर सवाल फिर से उठ खड़े हुए हैं.

क्या है पूरा मामला?

पाकिस्तान की राजनीति में 2022 में आए बड़े सत्ता परिवर्तन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है. इसकी वजह है 7 मार्च 2022 का वह गोपनीय राजनयिक केबल, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है. यह केबल वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान ने इस्लामाबाद भेजा था. इसमें अमेरिकी विदेश विभाग के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू के साथ हुई अहम बैठक का पूरा ब्यौरा दर्ज है.

दस्तावेज के मुताबिक, बैठक के दौरान डोनाल्ड लू ने इमरान खान सरकार की विदेश नीति, खासकर रूस दौरे को लेकर नाराजगी जाहिर की थी. उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू ही हुआ था और इमरान खान मॉस्को दौरे पर थे. अमेरिका इस कदम को लेकर बेहद असहज था. केबल में दर्ज बातचीत के अनुसार, डोनाल्ड लू ने कहा था, 'अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है, तो वॉशिंगटन में सब कुछ माफ कर दिया जाएगा. अन्यथा आगे हालात मुश्किल होंगे.'

यही वह बयान है जिसे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार अमेरिकी हस्तक्षेप का सबूत बताते रहे हैं. इमरान खान का दावा रहा है कि उनकी सरकार को विदेशी दबाव और पाकिस्तान के अंदरूनी सत्ता तंत्र की मिलीभगत से हटाया गया.

ईरान के साथ खेल रहा था पाकिस्तान, चीन से लौटते ही ट्रंप ने खोल दी पोल, कहा- मुनीर-शहबाज मेरे पास आकर...

रूस दौरा बना टकराव की जड़

फरवरी 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया, उसी दिन इमरान खान मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर रहे थे. पश्चिमी देशों ने इसे बेहद नकारात्मक रूप में देखा. साइफर में अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू ने पाकिस्तान के “आक्रामक न्यूट्रल” रुख पर सवाल उठाया और कहा कि वॉशिंगटन को यह नीति सीधे इमरान खान की व्यक्तिगत नीति लगती है. इसके जवाब में पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान का रुख संस्थागत विचार-विमर्श के बाद तय हुआ था और यह केवल इमरान खान का निजी फैसला नहीं था.

क्या अमेरिका ने सत्ता परिवर्तन का संकेत दिया? दस्तावेज का सबसे विस्फोटक हिस्सा वही माना जा रहा है, जिसमें डोनाल्ड लू कथित तौर पर कहते हैं, 'अगर नो-कॉन्फिडेंस वोट सफल हो जाता है तो सब माफ कर दिया जाएगा.' राजदूत असद मजीद खान ने अपने आकलन में लिखा, 'डोनाल्ड लू व्हाइट हाउस की स्पष्ट मंजूरी के बिना इतनी कठोर भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे.' उन्होंने यह भी लिखा कि अमेरिकी अधिकारी ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक प्रक्रिया पर 'सीमा से बाहर जाकर' टिप्पणी की.

सेना के भीतर से लीक हुआ दस्तावेज

Drop Site News ने दावा किया है कि यह दस्तावेज प्रधानमंत्री कार्यालय से नहीं बल्कि पाकिस्तान की सेना के भीतर से लीक हुआ. रिपोर्ट के अनुसार, दस्तावेज सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया था. इसमें सेना प्रमुख, ISI प्रमुख और प्रधानमंत्री कार्यालय शामिल थे. लीक करने वाला व्यक्ति पाकिस्तान की राजनीतिक दिशा और सेना की भूमिका से निराश था. रिपोर्ट में कहा गया है कि सैन्य सूत्र ने माना कि पाकिस्तान की सेना देश को '1971 जैसी स्थिति' की ओर धकेल रही है, जब पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना था. 

इमरान खान का दावा कितना मजबूत हुआ?

इमरान खान शुरू से कहते रहे हैं कि उनकी सरकार को अमेरिकी दबाव में हटाया गया. उस समय पाकिस्तान की तत्कालीन विपक्षी पार्टियों और सेना ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था, लेकिन अब पूरे दस्तावेज के सामने आने से बहस फिर तेज हो गई है कि क्या अमेरिका ने वास्तव में राजनीतिक संकेत दिया था?
क्या पाकिस्तान की सेना ने अमेरिकी इच्छाओं के अनुरूप भूमिका निभाई? क्या अविश्वास प्रस्ताव केवल घरेलू राजनीति नहीं बल्कि भू-राजनीतिक दबाव का परिणाम था? हालांकि दस्तावेज में कहीं भी सीधे तौर पर “सरकार गिराने” का आदेश नहीं है, लेकिन भाषा और संदर्भ ने राजनीतिक शक को मजबूत किया है.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खुलासा?

पाकिस्तान का यह चर्चित 'साइफर' सामने आने के बाद मामला सिर्फ वहां की राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है. भारत के नजरिये से भी यह खुलासा काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे दक्षिण एशिया की राजनीति, अमेरिका की रणनीति और पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था को लेकर कई बातें साफ होती हैं.

सबसे पहले, यह मामला फिर दिखाता है कि पाकिस्तान में असली ताकत सिर्फ चुनी हुई सरकार के पास नहीं होती. वहां सेना, खुफिया एजेंसियां और राजनीतिक सत्ता के बीच हमेशा एक अलग तरह का पावर गेम चलता रहा है. भारत लंबे समय से यही कहता आया है कि पाकिस्तान में कई बड़े फैसले पर्दे के पीछे से तय होते हैं. अब इस साइफर में सेना और आईएसआई के शीर्ष अधिकारियों का जिक्र आने से यह बहस फिर तेज हो गई है.

दूसरी अहम बात रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी है. भारत ने भी इस युद्ध पर पूरी तरह किसी एक पक्ष का साथ नहीं लिया और संतुलित रुख अपनाया. दिलचस्प बात यह है कि साइफर में अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू कथित तौर पर कहते हैं कि अमेरिका भारत को 'चीन के नजरिये' से देखता है. इसका मतलब साफ है कि वॉशिंगटन भारत को अपनी बड़ी रणनीतिक जरूरत मानता है, इसलिए भारत के लिए उसका रवैया अलग है. वहीं पाकिस्तान के मामले में अमेरिका ज्यादा सख्त और दबाव वाली नीति अपनाता दिखता है.

तीसरी बात अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों की है. अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद माना जा रहा था कि पाकिस्तान अब अमेरिका के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं रहा. लेकिन इस दस्तावेज से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका अब भी पाकिस्तान की राजनीति और वहां के सत्ता समीकरणों पर करीबी नजर रखे हुए था.

क्या पाकिस्तान का ‘वॉटरगेट’ बन रहा है साइफर विवाद?

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव हारने के बाद सत्ता से बाहर हो गए थे. इसके बाद से उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती गईं. 2023 से इमरान खान जेल में हैं और कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्हें लंबे समय से एकांत कारावास में रखा गया है. उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ लगातार आरोप लगाती रही है कि पाकिस्तान में चुनावी प्रक्रिया, अदालतों की कार्रवाई और राजनीतिक फैसलों के पीछे सेना समर्थित 'पॉलिटिकल इंजीनियरिंग' काम कर रही है. पार्टी का कहना है कि इमरान खान को राजनीति से बाहर करने के लिए पूरा सिस्टम इस्तेमाल किया गया.

अब अमेरिकी-पाकिस्तानी साइफर सामने आने के बाद यह बहस और तेज हो गई है. पाकिस्तान में पहले भी सेना के दखल, सत्ता पलट और विदेशी प्रभाव के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन पहली बार इतना संवेदनशील राजनयिक दस्तावेज सार्वजनिक हुआ है. यही वजह है कि कई लोग इसे पाकिस्तान का संभावित 'वॉटरगेट मोमेंट' मान रहे हैं.

इस पूरे मामले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या पाकिस्तान सच में अपनी स्वतंत्र विदेश नीति चला पाता है? क्या वहां चुनी हुई सरकार से ज्यादा ताकत अब भी सेना के पास है? क्या अमेरिका ने परोक्ष तरीके से दबाव बनाने की कोशिश की? और सबसे अहम सवाल क्या अब इमरान खान का 'विदेशी साजिश' वाला दावा पाकिस्तान की जनता के बीच और मजबूत हो जाएगा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक डिप्लोमैटिक केबल नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सत्ता, सेना और वैश्विक ताकतों के रिश्तों की अंदरूनी तस्वीर है, जिसने पूरे सिस्टम पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

पाक सेना में दरार के संकेत? साइफर लीक से उठे बड़े सवाल

हाल के महीनों में आसिम मुनीर की पकड़ पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था में और मजबूत होती दिखाई दी है. 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से लेकर ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के दौर तक, मुनीर लगातार पाकिस्तान का फ्रंट फेस बनकर उभरे हैं. क्षेत्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और रणनीतिक मामलों में उनकी भूमिका पहले से कहीं ज्यादा प्रमुख नजर आई.

पाकिस्तान इस समय खुद को मध्यस्थ की भूमिका में दिखाने की कोशिश कर रहा है. एक तरफ वह अमेरिका से रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, वहीं दूसरी तरफ ईरान के खिलाफ खुलकर किसी पश्चिमी धड़े का हिस्सा भी नहीं दिखना चाहता. इस संतुलन की राजनीति के बीच यह साइफर लीक कई नए सवाल खड़े करता है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सेना के भीतर से ही इतना संवेदनशील दस्तावेज बाहर आया है, तो क्या सैन्य प्रतिष्ठान पूरी तरह एकजुट नहीं है? क्या विदेश नीति और अमेरिका को लेकर सेना के भीतर अलग-अलग सोच मौजूद है? और क्या यह लीक ऐसे समय में सामने आना महज संयोग है, जब पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय कूटनीति में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है?

महाराष्ट्र ATS का सबसे बड़ा ऑपरेशन, पाकिस्तान से जुड़े आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क पर बड़ा प्रहार

यह खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पाकिस्तान की सत्ता, सेना और वैश्विक ताकतों के बीच चल रहे जटिल समीकरणों की ओर इशारा करता है.

मयंक प्रताप सिंह एक वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ प्रोफेशनल हैं, जिनके पास इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 18 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उन्होंने देश के प्रमुख मीडिया संगठनों के साथ काम करते हुए ब्रेकिंग न्यूज़, पॉलिटिकल कवरेज, ग्राउंड रिपोर्टिंग और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है. अपने करियर की शुरुआत से ही मयंक ने न्यूज़रूम की बदलती जरूरतों के अनुरूप टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों पर कंटेंट डेवलपमेंट और न्यूज़ मैनेजमेंट में विशेषज्ञता हासिल की. उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप में लंबे समय तक कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख खबरों, विशेष श्रृंखलाओं और डिजिटल न्यूज़ पैकेजिंग पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने GNT (Good News Today) में इनपुट लीड के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़रूम ऑपरेशन, स्टोरी प्लानिंग, रिपोर्टर कोऑर्डिनेशन और कंटेंट क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारियाँ संभालीं. ज़ी न्यूज़ में रहते हुए उन्होंने मल्टी-प्लेटफॉर्म न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल एंगल स्टोरीज़ और स्पेशल प्रोजेक्ट्स पर काम किया. IBN7 (वर्तमान News18 India) में इनपुट टीम का हिस्सा रहते हुए मयंक ने पॉलिटिकल, सोशल और नेशनल इश्यूज़ पर कई महत्वपूर्ण कवरेज को लीड किया. वर्तमान में मयंक सिंह ABP News में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ वे डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए कंटेंट स्ट्रेटेजी, ब्रेकिंग न्यूज़ मैनेजमेंट, एक्सप्लेनेर और इन-डेप्थ वेब कॉपीज़ पर विशेष ध्यान देते हैं. वे SEO-फ्रेंडली न्यूज़ लेखन, डेटा-ड्रिवन स्टोरीज़, ग्राउंड-आधारित रिपोर्टिंग और रियल-टाइम डिजिटल पब्लिशिंग में दक्ष हैं. मयंक की पत्रकारिता का फोकस राजनीति, चुनाव, सामाजिक मुद्दे, पब्लिक पॉलिसी और ग्राउंड रियलिटी आधारित रिपोर्टिंग रहा है. वे न्यूज़रूम में स्पीड, एक्युरेसी और एनालिटिकल अप्रोच के लिए जाने जाते हैं. उनका उद्देश्य डिजिटल युग में पाठकों को विश्वसनीय, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उपलब्ध कराना है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

अन्नामलाई के BJP छोड़ने के बाद इस्तीफों की झड़ी, वाइस प्रेसिडेंट और स्टेट सेक्रेटरी ने भी छोड़ी पार्टी
अन्नामलाई के BJP छोड़ने के बाद इस्तीफों की झड़ी, वाइस प्रेसिडेंट और स्टेट सेक्रेटरी ने भी छोड़ी पार्टी
शपथ के दो दिन बाद कर्नाटक में मंत्री रामलिंगा का इस्तीफा, जानें CM डीके शिवकुमार ने क्या दिया रिएक्शन?
शपथ के दो दिन बाद कर्नाटक में मंत्री रामलिंगा का इस्तीफा, जानें CM डीके शिवकुमार का रिएक्शन
LIC लगातार राजेश एक्सपोर्ट्स में पैसे लगाता रहा, आखिर ऐसा क्यों हुआ? कांग्रेस ने खोली पोल
LIC लगातार राजेश एक्सपोर्ट्स में पैसे लगाता रहा, आखिर ऐसा क्यों हुआ? कांग्रेस ने खोली पोल
TMC का सांसद बना बागी! ममता बनर्जी ने बहरामपुर सीट छोड़ने के लिए कहा, यूसुफ पठान का इनकार
TMC का सांसद बना बागी! ममता बनर्जी ने बहरामपुर सीट छोड़ने के लिए कहा, यूसुफ पठान का इनकार
Advertisement

वीडियोज

Bollywood News: आमिर खान ने गौरी स्प्रैट संग शादी की पुष्टि की, 5 जुलाई को लेंगे सात फेरे (05.06.26)
Laxmi Niwas:😯Radhika को हुआ Veer पर शक, क्या सामने आएगा मंगलसूत्र का सच? #sbs
Cannes में भारत का प्रतिनिधित्व कर भावुक हुईं Nidhi Kumar Malhotra, बताया खास अनुभव
'Peddi' में Ram Charan का शानदार प्रदर्शन, क्लाइमैक्स ने छोड़ी गहरी छाप
Madhuri Dixit के नए अवतार ने जीता दिल, 'Maa Behen' बनी मजेदार एंटरटेनर
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
Monsoon Alert: केरल पहुंचा मानसून! IMD ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट, जानिए यूपी-बिहार और दिल्ली में कब होगी एंट्री?
केरल पहुंचा मानसून! IMD ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट, जानिए यूपी-बिहार और दिल्ली में कब होगी एंट्री?
2017 से पहले सपा के गुंडे लोगों का राशन खा जाते थे..., बलरामपुर में बोले CM योगी आदित्यनाथ
2017 से पहले सपा के गुंडे लोगों का राशन खा जाते थे..., बलरामपुर में बोले CM योगी आदित्यनाथ
6 फिल्में, 2 सीरीज... थियेटर से OTT तक लगा एंटरटेनमेंट का मेला, जानें क्या देखें और क्या Skip करें
6 फिल्में, 2 सीरीज... थियेटर से OTT तक लगा एंटरटेनमेंट का मेला, जानें क्या देखें और क्या Skip करें
IND vs AFG Test Live Streaming: कब, कहां और कैसे 'फ्री' में देखें भारत-अफगानिस्तान का टेस्ट; यहां मिलेगी A टू Z डिटेल
कब, कहां और कैसे 'फ्री' में देखें भारत-अफगानिस्तान का टेस्ट; यहां मिलेगी A टू Z डिटेल
जिस समय खामनेई पर हुआ था अटैक, मैं वहीं था..., ईरान के विदेश मंत्री ने सुनाया वो खौफनाक मंजर
जिस समय खामनेई पर हुआ था अटैक, मैं वहीं था..., ईरान के विदेश मंत्री ने सुनाया वो खौफनाक मंजर
6 जून से दिल्ली में मचेगा सियासी घमासान! दलित-मुस्लिम गठबंधन के लिए कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव
6 जून से दिल्ली में मचेगा सियासी घमासान! दलित-मुस्लिम गठबंधन के लिए कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव
Explained: पेपर लीक का लंबा इतिहास लेकिन सजा सीमित क्यों? कैसे कुछ ही आरोपी पहुंचते कटघरे और ज्यादातर बच निकलते
पेपर लीक का लंबा इतिहास लेकिन सजा सीमित क्यों? कैसे कुछ आरोपी पहुंचते कटघरे और ज्यादातर बच जाते
Climate Change: रिकॉर्ड तोड़ तापमान की ओर जा रहे हम! जानिए कितने साल बाद आग का गोला बन जाएगी धरती?
रिकॉर्ड तोड़ तापमान की ओर जा रहे हम! जानिए कितने साल बाद आग का गोला बन जाएगी धरती?
Embed widget