एक्सप्लोरर

Explained: क्या ममता बनर्जी की TMC टूटने वाली है? 20 सासंदों के पार्टी छोड़ने के बाद मिले 5 बड़े संकेत

TMC Will Fallen: 20 सांसदों का TMC छोड़कर जाना बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय का आगाज भर है. आने वाले दिन बताएंगे कि ममता इस तूफान का मुकाबला कर पाती हैं या फिर 'घास-फूल' सच में मुरझा जाता है.

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के इतिहास में 8 जून 2026 की तारीख एक काले अध्याय की तरह दर्ज हो गई. एक साथ 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी की पार्टी से बगावत कर दी और लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर NDA को समर्थन देने का ऐलान कर दिया. खबर जैसे ही मीडिया में ब्रेक हुई, पूरा देश चौंक गया. वही TMC, जो कभी ममता बनर्जी की अकेली जिद और स्ट्रीट फाइट के दम पर पूरे वाममोर्चे को धूल चटाकर सत्ता में आई थी, आज उसके मंजर से सियासी पंडित भी हैरान हैं. तो क्या यह TMC के खात्मे की शुरुआत है? क्या ममता बनर्जी का राजनीतिक करियर अब ढलान पर है? और किसी भी पार्टी को लंबे वक्त तक जिंदा बने रहने के लिए आखिर चाहिए क्या?

TMC की जड़ें खोखली होने के 5 बड़े संकेत क्या?

संकेत-1: पार्टी का पूरा पुराना ढांचा ढहा, संस्थापक नेताओं का साथ छूटा

किसी भी पार्टी की असली ताकत उसके वे नेता होते हैं जिन्होंने उसे अपने खून-पसीने से सींचा हो. TMC के मामले में ये वे चेहरे हैं जो 1998 में पार्टी के गठन से लेकर 2011 के सत्ता परिवर्तन तक ममता के साथ खड़े रहे. लेकिन पिछले कुछ सालों में इन्हीं पुराने नेताओं के साथ ममता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का व्यवहार लगातार खराब होता गया.

टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ममता ने संस्थापक सदस्यों को दरकिनार कर अभिषेक बनर्जी और युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई. इससे पार्टी का बुनियादी ढांचा ही टूट गया. कई वरिष्ठ नेता लंबे वक्त से पार्टी में अपमानित महसूस कर रहे थे और बस एक मौके की तलाश में थे. कल 20 सांसदों का एक साथ टूटना इसी सालों पुराने बर्दाश्त का नतीजा है. जिस पार्टी से उसके बुजुर्ग ही किनारा कर लें, उसकी सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है.

संकेत-2: पार्टी में अब अंदरूनी लोकतंत्र पूरी तरह खत्म

TMC आज जिस दौर से गुजर रही है, वहां असल सियासी लड़ाई किसी नीति या विचारधारा पर नहीं, बल्कि सिर्फ सत्ता और परिवार पर केंद्रित हो गई है. 'द फॉल ऑफ द ट्विन फ्लावर्स' रिपोर्ट के मुताबिक, ममता के अलावा अभिषेक बनर्जी भी दूसरा केंद्र बन गए थे. अभिषेक का बढ़ता वर्चस्व और उनके पक्ष में लिए जा रहे फैसलों ने पार्टी के भीतर एक ऐसा विभाजन खड़ा कर दिया, जिसमें एक गुट 'ममता भक्त' और दूसरा 'अभिषेक समर्थक' बनकर रह गया. बीच के नेता या तो खामोश रहे या फिर धीरे-धीरे किनारे लगा दिए गए. अब यही नेता एक झटके में बाहर निकल आए हैं.

संकेत-3: विपक्ष से लड़ने की वैचारिक ताकत ही खत्म हो गई

TMC की पूरी राजनीति बीते दो दशकों में एक ही चीज के इर्द-गिर्द घूमती रही- बीजेपी विरोध और ममता बनर्जी का एकछत्र नेतृत्व. लेकिन जैसे ही 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी बीजेपी के सामने कमजोर हुई और 42 में सिर्फ 29 सीटें जीत पाई, वैसे ही उसकी यह इकलौती पूंजी भी कमजोर हो गई. 'एक्सीडेंटल मीटिंग से ममता के पतन तक' रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने बहुत सधी हुई रणनीति के तहत उन तमाम TMC नेताओं से लगातार संपर्क बनाए रखा जो पार्टी से नाराज थे.

जब आपके सांसद यह देखने लगते हैं कि आपकी पार्टी अब बीजेपी को रोकने में सक्षम नहीं है और खुद उनका भविष्य अधर में है, तो वे उसी ओर जाने में देर नहीं लगाते. वैचारिक आधार खत्म होने का सबसे बड़ा लक्षण यही होता है कि नेता बिना किसी हिचक के वैचारिक दुश्मन के खेमे में चले जाएं. यही TMC के साथ हुआ.

संकेत-4: संगठनात्मक ढांचा कमजोर, सिर्फ ममता के चेहरे पर टिकी पार्टी

एक स्वस्थ राजनीतिक पार्टी की पहचान होती है उसका जमीनी संगठन. यानी बूथ कमेटी, जिला परिषद और जिलाध्यक्षों का एक मजबूत नेटवर्क. TMC में यह सब होते हुए भी आखिरी फैसला हमेशा ममता बनर्जी के कमरे से होता था. जब तक ममता का जादू चला, तब तक सब ठीक रहा. लेकिन पिछले कुछ सालों में जिला स्तर पर पार्टी कमजोर हुई. कार्यकर्ताओं का मोहभंग हुआ है और TMC की जमीनी मशीनरी वैसी नहीं रही जैसी 2011 या 2016 में थी. जब संगठन कमजोर होता है तो नेता अपने दम पर जीवित रहने की कोशिश करते हैं और गुटबाजी बढ़ती है. यही कमजोर कड़ी बीजेपी ने पकड़ी और 20 सांसदों को तोड़ने में सफल रही.

संकेत-5: बीजेपी का बंगाल में बढ़ता दबदबा और TMC के पास जवाब नहीं

आखिरी और सबसे बड़ा संकेत है कि बीजेपी ने बंगाल में अब सिर्फ चुनावी लड़ाई ही नहीं, बल्कि संसदीय गणित में भी TMC को पछाड़ने की तैयारी पूरी कर ली है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 सांसदों के टूटने का यह कोई अचानक घटनाक्रम नहीं, बल्कि एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है. इसके तहत बीजेपी लोकसभा में अपना संख्याबल बढ़ाना चाहती है. जब कोई पार्टी लगातार आक्रामक हो और आपके नेताओं को अपने पाले में खींच ले जाए, तो यह पार्टी के कमजोर होने का सबसे बड़ा सबूत है. ममता बनर्जी फिलहाल बंगाल की जनता के बीच लोकप्रिय हैं, लेकिन दिल्ली के सियासी गलियारों में उनकी पार्टी की पकड़ तेजी से ढीली पड़ रही है.

क्या ममता बनर्जी का राजनीतिक करियर और उनकी पार्टी खत्म हो जाएगी?

यह सवाल हर किसी के मन में है, लेकिन इसका जवाब इतना सीधा नहीं है. पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि TMC को एक झटके में खत्म होती हुई पार्टी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि बंगाल में ममता का वर्चस्व बाकी है. हालांकि, इस ताजा विभाजन ने पार्टी की वो कमजोरियां पूरी दुनिया के सामने रख दी हैं जिन्हें ममता अब तक अपने मजबूत व्यक्तित्व के पीछे छिपाती आ रही थीं. यह TMC के पतन की शुरुआत तो हो सकती है, लेकिन ममता का करियर अभी खत्म नहीं हुआ है. बशर्ते वे पार्टी में आमूलचूल बदलाव करें और अपने फैसलों में सुधार लाएं. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो तस्वीर बहुत तेजी से बदल सकती है.

किसी भी पार्टी को लंबे समय तक जिंदा बने रहने के लिए क्या चाहिए?

राजनीति शास्त्र की किताबों से लेकर जमीनी कार्यकर्ता तक, हर कोई जानता है कि कोई भी पार्टी सिर्फ एक नेता के दम पर ज्यादा दिन नहीं चल सकती. TMC के संकट से चार बड़ी सीख निकलती हैं जो किसी भी राजनीतिक दल के अस्तित्व के लिए जरूरी हैं.

  • मजबूत सामूहिक नेतृत्व और अंदरूनी लोकतंत्र होना चाहिए, जहां हर कार्यकर्ता की बात सुनी जाए.
  • एक सुलझी हुई विचारधारा और जिम्मेदारी, ताकि चुनावी हार-जीत के बावजूद पार्टी का आधार बचा रहे.
  • जमीनी संगठन का चुस्त-दुरुस्त होना जरूरी है, क्योंकि वही किसी भी संकट के वक्त पार्टी को बचाता है.
  • नेतृत्व को एक व्यक्ति विशेष के बजाय संस्था में बदलना बेहद जरूरी है, नहीं तो व्यक्ति के ढलते ही संगठन भी ढह जाता है.

TMC आज इन चारों ही कसौटियों पर कमजोर नजर आ रही है. ममता बनर्जी भले ही फिलहाल विधानसभा में सत्ता पर काबिज हों, लेकिन अगर उन्होंने पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए कठोर फैसले नहीं लिए तो इतिहास उन्हें उसी तरह याद रखेगा जैसे वाममोर्चा आज सिमटकर रह गया है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

LIVE: मानसून का कहर, मुंबई पानी-पानी, दिल्ली-गुरुग्राम में जाम, हिमाचल में बादल फटने से आई बाढ़
LIVE: मानसून का कहर, मुंबई पानी-पानी, दिल्ली-गुरुग्राम में जाम, हिमाचल में बादल फटने से आई बाढ़
'2-3 दिनों में पूरे देश में....', मौसम विभाग की चेतावनी, 23 राज्यों में भयंकर बारिश की भविष्यवाणी
'2-3 दिनों में पूरे देश में....', मौसम विभाग की चेतावनी, 23 राज्यों में भयंकर बारिश की भविष्यवाणी
तेलंगाना के निर्मल कॉलेज में बड़ी घटना, परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़े जाने पर छात्र ने प्रिंसिपल पर किया हमला
तेलंगाना के निर्मल कॉलेज में बड़ी घटना, परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़े जाने पर छात्र ने प्रिंसिपल पर किया हमला
Rahul Gandhi On Paper Leak: 'कई सवाल असली पेपर से मेल खाते थे', UGC-NET पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, पेपर लीक पर उठाए गंभीर सवाल
'कई सवाल असली पेपर से मेल खाते थे', UGC-NET पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, पेपर लीक पर उठाए गंभीर सवाल
Advertisement

वीडियोज

Sansani | Crime News | Jaipur Murder Case: सरकारी नौकरी के लिए मां का मर्डर ! | ABP News
Monsoon 2026: बारिश से हाहाकार! सड़कें बनीं दरिया, लोग परेशान | Flood | Heavy Rain Alert | IMD
Chitra Tripathi | Janhit: आसमानी आफत की डरावनी तस्वीरें | Flood | Heavy Rain Alert | IMD Alert
Monsoon 2026: आसमानी आफत का कहर, सड़कों पर समंदर जैसा मंजर | Flood | Heavy Rain Alert | IMD
Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ गुफा में शिवलिंग पूरी तरह पिघला | Pahalgam | Jammu and Kashmir
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
LIVE: मानसून का कहर, मुंबई पानी-पानी, दिल्ली-गुरुग्राम में जाम, हिमाचल में बादल फटने से आई बाढ़
LIVE: मानसून का कहर, मुंबई पानी-पानी, दिल्ली-गुरुग्राम में जाम, हिमाचल में बादल फटने से आई बाढ़
दिल्ली में स्कूलों के बाहर बेचा सिगरेट या गुटखा तो खैर नहीं, हाई कोर्ट ने लगाई रोक
दिल्ली में स्कूलों के बाहर बेचा सिगरेट या गुटखा तो खैर नहीं, हाई कोर्ट ने लगाई रोक
IND Vs ZIM T20 Series 2026: IPL 2026 के चार मैच में 0 विकेट, जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में किया गया शामिल, कौन है ये गेंदबाज?
IPL 2026 के चार मैच में 0 विकेट, जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में किया गया शामिल, कौन है ये गेंदबाज?
ईरान पर एयर स्ट्राइक के बीच ट्रंप ने क्यों लिया भारत-पाकिस्तान का नाम, बोले- 'लाखों लोगों की जान...'
ईरान पर एयर स्ट्राइक के बीच ट्रंप ने क्यों लिया भारत-पाकिस्तान का नाम, बोले- 'लाखों लोगों की जान...'
Guru Dutt Birth Anniversary: 'जिंदगी नरक हो गई है...' मुस्लिम एक्ट्रेस के प्यार में पागल थे गुरु दत्त, पत्नी ने छोड़ दिया था घर
'जिंदगी नरक बन गई...' मुस्लिम एक्ट्रेस के प्यार में पागल थे गुरु दत्त, पत्नी ने छोड़ दिया था घर
Explained: PM मोदी के दौरे से भारत को क्या मिला? इंडोनेशिया में प्रम्बानन मंदिर घूमे, ब्रह्मोस और मलक्का समेत कौन से समझौते हुए?
PM मोदी के दौरे से भारत को क्या मिला? इंडोनेशिया में ब्रह्मोस और मलक्का समेत कौन से समझौते हुए?
'कुछ देर पहले ईरान से फोन आया, वे अब...', ताबड़तोड़ हमलों के बीच ट्रंप का चौंकाने वाला दावा
'कुछ देर पहले ईरान से फोन आया, वे अब...', ताबड़तोड़ हमलों के बीच ट्रंप का चौंकाने वाला दावा
Video: 'पैर नकली लेकिन भक्ति सच्ची' कृत्रिम पैरों से महिला ने पूरी की अमरनाथ यात्रा- वीडियो वायरल
'पैर नकली लेकिन भक्ति सच्ची' कृत्रिम पैरों से महिला ने पूरी की अमरनाथ यात्रा- वीडियो वायरल
Embed widget