तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के नामपल्ली इलाके में स्थित राज्य फॉरेंसिक साइंस लैबरेटरी (FSL) में शनिवार दोपहर अचानक भीषण आग लग गई, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई. लैब की पहली मंजिल पर जोरदार आग की लपटें उठने लगीं और घना धुआं फैल गया. मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इस हादसे ने सियासत में भूचाल ला दिया है. बीआरएस के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री केटीआर (के टी रामाराव) ने इस घटना पर संदेह जाहिर करते हुए एक सनसनीखेज सवाल खड़ा कर दिया है.

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केटीआर ने लगाया सबूत मिटाने का आरोप

केटीआर ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ट्वीट किया कि फॉरेंसिक लैब में इतनी तेजी से आग लगना कोई आम बात नहीं है. उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि क्या यह 'वोट के लिए नोट' (Vote for Note) मामले और फोन टैपिंग केस के सबूतों को नष्ट करने की साजिश का हिस्सा है? केटीआर के मुताबिक, कांग्रेस सरकार उन आरोपों को सहारा दे रही है जिनके पास कोई ठोस सबूत नहीं थे और अब शायद इस आग के जरिए वही गैर-मौजूदा सबूतों को जलाकर राख कर दिया जा रहा है. उन्होंने लिखा, 'अचानक यह हादसा होना और उसी समय ध्यान आकर्षित होना, सवाल खड़े करता है.'

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यह नुकसान किसी बड़े सच को छिपा सकता है

इस पूरे मामले का पूरा संदर्भ समझना जरूरी है. 'वोट-फॉर-नोट' मामला 2015 का है, जिसमें एक विधायक को खरीदने की कोशिश का आरोप था और इसकी जांच इसी फॉरेंसिक लैब में होती है. वहीं, हाल के दिनों में फोन टैपिंग का मुद्दा गरमाया हुआ था, जिसमें पिछली सरकार पर निशाना साधा जा रहा था. केटीआर का इशारा इसी बात की तरफ है कि फॉरेंसिक लैब किसी भी सरकार के लिए अहम होता है और यहां हुआ नुकसान किसी बड़े सच को छिपा सकता है.

फिलहाल तो आग बुझाने का काम जारी है और अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है, लेकिन केटीआर के इन आरोपों ने हैदराबाद की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है. अब देखना यह है कि प्रशासन इन संदेहों को दूर कर पाता है या नहीं.