फरीदाबाद-सहारनपुर मोड्यूल में पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच और पूछताछ में गिरफ्तार डॉक्टर शाहीन का रोल आतंक के काम में पैसा इकट्ठा करने वाला निकला है. जानकारी के मुताबिक डॉक्टर शाहीन को जैश ए मोहम्मद और अल कायदा के हैंडलर बिटकॉइन के जरिए साधे 9 लाख से ज़्यादा पैसा भेजते थे, जिसे P2P तरीके से शाहीन 10 से ज़्यादा अकाउंट्स में withdraw करती थी.

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इसके अलावा हवाला के ज़रिए भी डॉक्टर शाहीन के पास 6 लाख से ज़्यादा रुपये सऊदी अरब, तुर्किए और सीरिया की तरफ से आए थे. पूछताछ में ये भी सामने आया है कि डॉक्टर शाहीन ख़ुद भी इस मॉड्यूल के लिए चंदे के माध्यम से पैसा इकट्ठा करती थी और लोगो को बताती थी की ये चंदा वो मुसलमानों के सस्ते इलाज लिए अस्पताल बनाने के लिए ले रही है. इसके अलावा अपनी कमाई से भी 4 लाख रुपये डॉक्टर शाहीन ने मॉड्यूल के आतंक के काम में लगाये थे.

10 दिन की पूछताछ

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10 नवंबर के बाद से अब तक की 10 दिन की पूछताछ में एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि की सभी आरोपियों के अपने-अपने काम निश्चित थे. जहां डॉक्टर शाहीन का काम पैसे इकट्ठा करना और हैंडलरों द्वारा दिए गए पैसों को अलग-अलग अकाउंट में ट्रांसफर करना था तो उमर का काम इस पैसे से विस्फोटक खरीदना, केमिकल खरीदना, कमरे में केमिकल से विस्फोटक बनाना, उसे टेस्ट करना, फिदायीन हमले के लिए गाड़ियां खरीदना था. इसके साथ ही अब तक की पूछताछ और जांच में डॉक्टर शाहीन के मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के साथ या फिर मारे गए आतंकी उमर फारूक की पत्नी अफ़ीरा फारूक के साथ सीधे संपर्क के कोई सबूत नहीं मिले हैं.

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