तेलंगाना के इतिहास में चुनावी रोल में सबसे बड़े बदलाव के तहत चुनाव आयोग ने सोमवार (17 अगस्त) को तेलंगाना के लिए ड्राफ्ट चुनावी रोल जारी किया. इसमें पता चला कि शुरुआती लिस्ट से 73.39 लाख वोटरों को हटा दिया गया है. इन्हें अनुपस्थित, स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके, मृत या कई जगहों पर रजिस्टर्ड होने के कारण हटाया गया है. ड्राफ्ट का प्रकाशन 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के तहत गिनती के चरण का नतीजा है. 

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यह एक बहुत बड़ी कवायद थी, जिसमें 33 जिलों के 3.38 करोड़ वोटर शामिल थे और 2.64 करोड़ वोटरों (78.30%) ने अपने फॉर्म जमा किए थे. हटाए गए लोगों में से 9.22 लाख मृत, 11.25 लाख अनुपस्थित, 45.18 लाख स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके और 6.70 लाख कई जगहों पर रजिस्टर्ड पाए गए. इस बदलाव में 93.7 लाख और वोटरों की भी जांच की जानी है, इनमें 61.4 लाख ऐसे हैं, जिनके रिकॉर्ड में 'लॉजिकल गड़बड़ियां' हैं और 32.3 लाख ऐसे हैं, जिनकी मौजूदा एंट्री को 2002 के बेस चुनावी रोल से नहीं मिलाया जा सका. इन्हें अब इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) से नोटिस मिलेंगे. 

16 सितंबर तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति

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ड्राफ्ट रोल, जिसमें 73.39 लाख नाम हटाए गए हैं, प्रभावित वोटरों को सोमवार से 16 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका देता है. फाइनल रोल 19 अक्टूबर को जारी किया जाएगा. भारत के चुनाव आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को हटाए गए वोटरों की बूथ-वार लिस्ट दी है और उनके 49,018 बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) को आपत्तियां दर्ज करने की इजाजत दी है. कांग्रेस ने 13,144, BRS ने 20,394, BJP ने 11,621 और AIMIM ने 2,382 BLA नियुक्त किए हैं.

सिविल सोसाइटी संगठनों ने जताई चिंता

सिविल सोसाइटी संगठनों ASEEM और ADALAH ने गंभीर चिंता जताई है और चुनाव आयोग से ड्राफ्ट के प्रकाशन को 15 दिन टालने की अपील की है ताकि असली वोटरों को गलत वर्गीकरण को चुनौती देने का मौका मिल सके. उनका तर्क है कि गिनती का फ़ॉर्म (enumeration form) न भरने को वोटर के अयोग्य होने का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता. उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय से रजिस्टर्ड वोटर अपना चुनावी इतिहास खो सकते हैं और उन्हें फ़ॉर्म-6 के ज़रिए पहली बार वोटर के तौर पर दोबारा अप्लाई करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. 

एक्टिविस्ट्स ने वोटर्स के लिए अपना ASDD (अनुपस्थित, दूसरी जगह चले गए, मृत, डुप्लिकेट) स्टेटस चेक करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल की भी मांग की यह सुविधा अभी सिर्फ़ राजनीतिक पार्टियों के पास है. हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि दावे और आपत्तियों का समय जानकारी ठीक कराने का काफ़ी मौका देता है और नाम हटाने का फ़ाइनल फ़ैसला पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही लिया जाएगा.

हैदराबाद जिले में डिजिटाइजेशन का स्तर सबसे कम

SIR प्रक्रिया जिसके तहत राज्य भर में पोलिंग स्टेशन बढ़कर 36,353 हो गए ने चुनावी रिकॉर्ड की शुद्धता से जुड़ी गहरी चुनौतियों को उजागर किया है, खासकर शहरी जिलों में जहां डिजिटाइजेशन का काम अभी पूरा नहीं हुआ है. हैदराबाद जिले में डिजिटाइजेशन का स्तर सबसे कम 58.58% रहा, जिससे 40% से ज़्यादा वोटर्स का कोई अता-पता नहीं चल पाया. ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट अब ceotelangana.nic.in पर ऑनलाइन उपलब्ध है और फाइनल वोटर लिस्ट 19 अक्टूबर को जारी की जाएगी. तेलंगाना के लाखों वोटर्स के लिए, अगले 30 दिन यह तय करेंगे कि वे अपने वोटिंग अधिकार वापस पा सकेंगे या चुनावी नक्शे से हमेशा के लिए गायब हो जाएंगे.