Explained: SIR 3.0 का ऐलान! कैसे पहले-दूसरे चरण में 59 करोड़ मतदाताओं में 5.2 करोड़ नाम कटे, तीसरे फेज में क्या होगा बवाल?
SIR Phase III: चुनाव आयोग ने 14 मई 2026 को ऐलान किया है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) का तीसरा चरण कुल 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में होगा. इसमें 36 करोड़ से ज्यादा मतदाता शामिल हैं.

SIR यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' भारत निर्वाचन आयोग का चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है, जिसमें मतदाता सूची को पूरी तरह से खंगाल कर नए सिरे से तैयार किया जाता है. यह कोई मामूली अपडेट नहीं, बल्कि हर एक रजिस्टर्ड वोटर के घर जाकर दस्तावेजों के आधार पर वेरिफिकेशन प्रोसेस है. इसका मकसद एक साफ-सुथरी और सटीक मतदाता सूची बनाना है. चुनाव आयोग ने बताया कि पहले दो फेज में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया था. अब चुनाव आयोग ने तीसरे चरण का ऐलान कर दिया है. इससे पहले SIR की कहानी A TO Z समझते हैं...
किसी भी चुनाव की विश्वसनीयता मतदाता सूची की शुद्धता पर निर्भर करती है. SIR का मुख्य उद्देश्य तीन चीजें हैं:
- मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नाम हटाना: सालों से जमा उन नामों को सूची से बाहर करना जो अब वैध नहीं हैं.
- नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना: जो लोग 18 साल के हो गए हैं या जिनका नाम छूट गया है, उन्हें सूची में शामिल करना.
- फर्जी मतदान की गुंजाइश खत्म करना: डुप्लीकेट और निष्क्रिय मतदाताओं को हटाकर चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना.
SIR की प्रक्रिया को समझिए
SIR अभियान दो मुख्य चरणों में पूरा होता है:
- गणना चरण: बूथ लेवल अधिकारी (BLO) हर घर जाकर मतदाताओं से एक फॉर्म भरवाते हैं. उनकी पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों का मिलान करते हैं. लगभग 4 लाख BLO और 3.42 लाख राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) इस काम में लगाए गए.
- दावे और आपत्तियां: ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद, जिनके नाम कट गए हैं, वे आपत्ति दर्ज करा सकते हैं और अपने दस्तावेजों के साथ नाम वापस जुड़वाने का दावा पेश कर सकते हैं. इसी दौरान नए मतदाताओं के जुड़ने की प्रक्रिया भी चलती है.
SIR का सफर: पहले चरण से तीसरे चरण तक
भारत के चुनाव आयोग ने SIR को पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया है. इस पूरी प्रक्रिया की नींव बिहार में रखी गई थी.
पहला चरण: बिहार से हुई थी शुरुआत
SIR की शुरुआत 24 जून 2025 को बिहार से हुई थी और यह प्रक्रिया 30 सितंबर 2025 तक चली. यह पूरे अभियान का पायलट प्रोजेक्ट था, जिसके बाद ही इसे देश के अन्य हिस्सों में लागू करने का फैसला लिया गया.
बिहार में इस अभियान के नतीजे काफी अहम रहे. राज्य की मतदाता सूची से 69 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए. हालांकि, दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद 21 लाख नाम वापस जोड़े गए. कुल मिलाकर, लगभग 47 लाख मतदाताओं की शुद्ध कमी आई, जो कुल मतदाताओं का 5-6% था.
दूसरा चरण (Phase 1- राष्ट्रीय स्तर): 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR
बिहार की सफलता के बाद, चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 से SIR के दूसरे चरण की शुरुआत की, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर पहला चरण माना जाता है. इस चरण में 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल थे. ये हैं वे 12 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश:
- उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
- तमिलनाडु
- राजस्थान
- मध्य प्रदेश
- गुजरात
- छत्तीसगढ़
- केरल
- गोवा
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
- पुडुचेरी
- लक्षद्वीप
इस चरण के परिणाम काफी चौंकाने वाले रहे. इन 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की संयुक्त मतदाता सूची से 7.2 करोड़ नाम हटाए गए. इसी दौरान 2 करोड़ नए मतदाता जोड़े गए. इस तरह 5.2 करोड़ मतदाताओं की शुद्ध कमी आई, जो इन क्षेत्रों की कुल मतदाता संख्या का 10.2% था.
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | हटाए गए नामों की संख्या |
| उत्तर प्रदेश | 2.04 करोड़ |
| पश्चिम बंगाल | 90 लाख |
| तमिलनाडु | 97.3 लाख |
| गुजरात | 73.7 लाख |
| राजस्थान | 41.85 लाख |
| मध्य प्रदेश | 42.74 लाख |
| छत्तीसगढ़ | 27.34 लाख |
| केरल | 24.08 लाख |
| गोवा | 1.42 लाख |
| पुडुचेरी | 1.03 लाख |
| अंडमान और निकोबार आइलैंड | 64 हजार |
| लक्षद्वीप | 1,429 |
| बिहार (पहला चरण) | 69 लाख (शुद्ध 47 लाख) |
पश्चिम बंगाल में SIR की सबसे ज्यादा चर्चा क्यों रही?
पश्चिम बंगाल इस पूरे SIR प्रक्रिया में सबसे ज्यादा सुर्खियों में इसलिए रहा, क्योंकि वहां मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटे गए और इससे गहरा सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया:
- रिकॉर्ड तोड़ नाम कटौती: SIR प्रक्रिया के तहत बंगाल में करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए. इनमें से 63 लाख को 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट' बताया गया. 27 लाख के नामों में 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' (जैसे स्पेलिंग की गलती) थी.
- भारी अपील, बहुत कम बहाली: सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त ट्रिब्यूनल में इन कटौतियों के खिलाफ 34 लाख से अधिक अपीलें आईं. लेकिन चुनाव आयोग ने इनमें से सिर्फ 1,607 मतदाताओं को ही सूची में बहाल किया और सिर्फ 14 को हटाया. यह आंकड़ा अपीलों की संख्या के सामने बहुत छोटा है, जिससे विवाद और गहरा गया.
- कल्याणकारी योजनाओं से नाम हटना: सबसे बड़ा विवाद तब हुआ जब पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार (सीएम सुवेंदु अधिकारी) ने कहा कि जिन लोगों के नाम SIR के दौरान कटे हैं, वे कई सरकारी कल्याण योजनाओं और राशन के पात्र नहीं होंगे. इस फैसले को विपक्ष ने 'बेहद आपत्तिजनक' बताते हुए कहा कि इससे मतदान के अधिकार को सब्सिडी और सुविधाओं से ब्लैकमेल किया जा रहा है.
तीसरा चरण: 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR
चुनाव आयोग ने 14 मई 2026 को SIR के तीसरे चरण की घोषणा की, जो 30 मई से 23 दिसंबर 2026 तक चलेगा. इस चरण में 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, जिनमें 36.73 करोड़ मतदाताओं का वेरिफिकेशन किया जाएगा. इनमें:
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | मौजूदा वोटर्स |
| ओडिशा | 3.34 करोड़ |
| मिजोरम | 8.75 लाख |
| सिक्किम | 4.71 लाख |
| मणिपुर | 20.91 लाख |
| दादर नगर हवेली और दमन दीव | 4.27 लाख |
| उत्तराखंड | 79.76 लाख |
| आंध्र प्रदेश | 4.16 करोड़ |
| अरुणाचल प्रदेश | 8.87 लाख |
| हरियाणा | 2.06 करोड़ |
| तेलंगाना | 3.39 करोड़ |
| पंजाब | 2.14 करोड़ |
| कर्नाटक | 5.55 करोड़ |
| मेघालय | 23.43 लाख |
| महाराष्ट्र | 9.86 करोड़ |
| झारखंड | 2.64 करोड़ |
| नागालैंड | 13.56 लाख |
| त्रिपुरा | 28.97 लाख |
| दिल्ली | 1.48 करोड़ |
| चंडीगढ़ | 5.18 लाख |
चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे फेज की SIR प्रक्रिया में 3.94 लाख BLO तैनात होंगे. BLO की मदद के लिए राजनीतिक पार्टियों की तरफ नियुक्त 3.42 लाख BLA भी शामिल रहेंगे.
3 राज्यों-UT को छोड़कर पूरे देश में पूरा होगा SIR
SIR के तीसरे फेज के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में SIR प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. तीनों बचे हुए राज्यों में खराब मौसम और जनगणना के कारण SIR के शेड्यूल की घोषणा बाद में की जाएगी. तीसरे फेज में SIR वाले राज्यों में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा वोटर हैं. दादरा और नगर हवेली एवं दमन-दीव में वोटरों की संख्या सबसे कम है.

























