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Xप्लेन: ट्रंप को झटका, अमेरिकी अदालत के वीजा फैसले से भारतीय छात्रों को बड़ी राहत, क्या होगा इसका असर?

कई दशकों से F-1 वीज़ा धारकों को "ड्यूरेशन ऑफ़ स्टेटस" के आधार पर अमेरिका में रहने की अनुमति मिलती रही है. इसका मतलब है कि जब तक छात्र का एकेडमिक स्टेटस सही है, उन्हें किसी निश्चित वर्ष की पाबंदी का सामना नहीं करना पड़ता था.

अमेरिका के एक संघीय अदालत द्वारा ट्रंप प्रशासन के उस विवादास्पद नियम पर रोक लगाए जाने के बाद, भारत समेत हज़ारों विदेशी छात्रों ने राहत की सांस ली है. यह प्रस्तावित नियम विदेशी छात्रों के देश में रहने की अवधि तय करने वाले दशकों पुराने सिस्टम को पूरी तरह बदलने वाला था. इस फ़ैसले का सीधा और सबसे बड़ा असर उन भारतीय युवाओं पर पड़ा है जो अमेरिका में अपने सुनहरे भविष्य का सपना देख रहे हैं या वहां की यूनिवर्सिटीज़ में पहले से ही उच्च शिक्षा ले रहे हैं.

बोस्टन में अमेरिकी ज़िला जज एफ. डेनिस सेलॉर ने सोमवार को डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) को इस नियम को लागू करने से रोक दिया, जबकि इसे ठीक अगले दिन से ही लागू होना था. प्रस्तावित बदलाव के तहत विदेशी छात्रों (F-1 वीज़ा) और कल्चरल एक्सचेंज विज़िटर्स (J-1 वीज़ा) के अमेरिका में रहने की अवधि को अधिकतम चार साल तक सीमित कर दिया जाता. इसके अलावा, विदेशी पत्रकारों के लिए भी 240 दिन की सख्त समय-सीमा तय की जा रही थी.

भारत के छात्रों पर इसका असर

अमेरिका में पढ़ने जाने वाले भारतीय छात्रों के लिए यह फैसला बेहद अहम है, क्योंकि भारत से जाने वाले छात्र बड़ी संख्या में लंबी अवधि के और रिसर्च पर आधारित कोर्सेज चुनते हैं.

लंबी अवधि के कोर्सेज और पीएचडी स्कॉलर्स को राहत: भारत से अमेरिका जाने वाले कई छात्र डॉक्टोरल (PhD) प्रोग्राम्स और एडवांस्ड रिसर्च में दाखिला लेते हैं. चार साल की समय-सीमा ऐसे छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी बाधा बन सकती थी, क्योंकि रिसर्च, लैब वर्क, थीसिस लिखने या किसी अकादमिक देरी की वजह से इन कोर्सों में अक्सर चार साल से अधिक का समय लग जाता है. इस रोक के बाद, भारतीय पीएचडी स्कॉलर्स और रिसर्चर्स को बिना किसी तय समय-सीमा के अपने प्रोजेक्ट्स पूरे करने की आज़ादी बनी रहेगी.

अचानक देश छोड़ने के संकट से बचाव: मौजूदा 'ड्यूरेशन ऑफ़ स्टेटस'  फ्रेमवर्क के तहत, छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं जब तक उनका स्टूडेंट वीजा वैध है और वे अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं. अगर यह चार साल का नियम लागू हो जाता, तो कई भारतीय छात्रों को अपनी डिग्री बीच में ही अधूरी छोड़कर या बार-बार महंगे एक्सटेंशन के लिए आवेदन करने के तनाव के साथ जीना पड़ता. फिलहाल, भारतीय छात्रों को इस तात्कालिक संकट से मुक्ति मिल गई है.

वित्तीय और मानसिक दबाव से राहत: बार-बार वीजा एक्सटेंशन के लिए आवेदन करने का मतलब होता भारी प्रशासनिक खर्च, कागज़ी कार्रवाई की जटिलताएं और भारी मानसिक अनिश्चितता. इस फैसले से भारतीय छात्रों और उनके परिवारों को आर्थिक और मानसिक तौर पर बड़ी राहत मिली है.

पुराना सिस्टम और ट्रंप का नया सिस्टम

कई दशकों से F-1 वीज़ा धारकों को "ड्यूरेशन ऑफ़ स्टेटस" के आधार पर अमेरिका में रहने की अनुमति मिलती रही है. इसका मतलब है कि जब तक छात्र का एकेडमिक स्टेटस सही है, उन्हें किसी निश्चित वर्ष की पाबंदी का सामना नहीं करना पड़ता था.

इसके विपरीत, ट्रंप प्रशासन इस पुराने और लचीले सिस्टम को खत्म कर इसे एक निश्चित अवधि में बांधना चाहता था. जज सेलॉर ने DHS के इन तर्कों की कड़ी आलोचना की कि इस बदलाव से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी. जज ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने इस बात पर बिल्कुल विचार नहीं किया कि इस कदम से अमेरिकी हायर एजुकेशन सिस्टम को कितना भारी नुकसान होगा. अमेरिका में वर्तमान में लगभग 16 लाख F वीजा और 5 लाख J वीजाधारक हैं, जिनमें भारतीय छात्रों की संख्या बहुत बड़ी है. जज ने चेतावनी दी कि यदि यह नियम लागू होता, तो विश्वविद्यालयों में दाखिले कम हो जाते और संस्थानों को करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ता.

आगे की राह और भारतीय छात्रों के लिए सलाह

हालांकि यह फैसला भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी फौरी राहत लेकर आया है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि कानूनी लड़ाई समाप्त हो चुकी है. ट्रंप प्रशासन इस फ़ैसले के खिलाफ़ ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है और इमिग्रेशन नियमों को सख्त करने की अपनी मुहिम जारी रख सकता है.

जो भारतीय छात्र इस समय अमेरिका में हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपना कानूनी स्टेटस पूरी तरह मजबूत रखें और अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस के दिशा-निर्देशों का लगातार पालन करते रहें. वहीं, जो छात्र भविष्य में अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें ट्यूशन फीस और स्कॉलरशिप के साथ-साथ बदलते इमिग्रेशन कानूनों पर भी पैनी नज़र रखनी चाहिए.

फिलहाल, 'ड्यूरेशन-ऑफ-स्टेटस' का जाना-पहचाना सिस्टम ही प्रभावी है, जिससे भारतीय छात्रों को अपनी उच्च शिक्षा की योजनाएं बिना किसी डर के आगे बढ़ाने का मौका मिल गया है. यह राहत भले ही कानूनी अनिश्चितताओं के दायरे में हो, लेकिन आज भारतीय छात्रों के लिए यह एक बहुत बड़ी और सुकून देने वाली खबर है.

संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.

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