छत्तीसगढ़ के जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड में कथित गड़बड़ी के मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है.ED ने सतपाल सिंह छाबड़ा को 1 सितंबर को गिरफ्तार किया है.उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने 5 दिन की ED हिरासत मंजूर की.

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ED के मुताबिक..ये जांच ACB/EOW और छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू हुई थी. जांच में सामने आया कि खनन प्रभावित लोगों और इलाकों के विकास के लिए मिले DMF के पैसों का कथित तौर पर गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया.

2019-20 से 2023-24 के बीच जिलों को करीब 9,188 करोड़ रुपये DMF फंड मिला था.ED का आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा ऐसे सप्लाई वाले कामों में लगाया गया, जिनमें सामान की कीमत बढ़ाकर कमीशन लेने की गुंजाइश ज्यादा थी..

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ED के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क में सरकारी कर्मचारियों, बिचौलियों और वेंडरों का एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था.बड़ी संख्या में काम छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के जरिए कराए गए.आरोप है कि खरीद के ऑर्डर दिलाने के बदले एजेंट और बिचौलिये 25 से 50 फीसदी तक कमीशन लेते थे..इस रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था.

ED का दावा है कि सतपाल सिंह इस नेटवर्क में मुख्य बिचौलियों और पैसों के लेन-देन का समन्वय करने वालों में शामिल था. वो ऐसे DMF काम तलाशता था, जिनमें ज्यादा कमीशन मिल सके. इसके बाद चुने हुए वेंडरों के बीच काम बांटने, वर्क ऑर्डर जारी कराने और भुगतान करवाने में मदद करता था..

जांच एजेंसी के मुताबिक..छाबड़ा वेंडरों से कमीशन वसूलने और उसे सिंडिकेट के सदस्यों के बीच बांटने में भी शामिल था.

बैंक खातों और जांच के दौरान दर्ज बयानों की पड़ताल में करीब 31 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमीशन राशि का पता चला है.ED ने इसे अपराध से अर्जित रकम यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम बताया है.एजेंसी के मुताबिक ये रकम छाबड़ा उसके परिवार के सदस्यों, HUF और उससे जुड़ी संस्थाओं के खातों में पहुंची..

ED ने इससे पहले 3 और 4 सितंबर 2025 को इस मामले में PMLA की धारा 17(1) के तहत छापेमारी की थी..इस दौरान कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए थे.

मामले की जांच अभी जारी है.