अगर कोई विदेशी एयरलाइन भारत में उड़ान शुरू करना चाहती है, तो अब उसे काफी पहले से तैयारी करनी होगी. DGCA ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत बिना औपचारिक अनुमति के कोई भी विदेशी एयरलाइन भारत में नहीं उतर सकती. भारत और उस देश के बीच जो द्विपक्षीय एयर सर्विस एग्रीमेंट है, उसी के तहत पहले उस देश की सरकार को एयरलाइन को औपचारिक रूप से नामित करना होगा. तभी DGCA के eGCA पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी.

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रजिस्ट्रेशन के समय एयरलाइन को AOC, कंपनी का रजिस्ट्रेशन, मुख्यालय का पता और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी. CEO से लेकर कंट्री हेड तक का पूरा ब्यौरा भी देना होगा. साथ ही भारत में एक लोकल रिप्रेजेंटेटिव रखना होगा, जो भारतीय नागरिक हो या यहां की रजिस्टर्ड संस्था हो, क्योंकि DGCA के साथ सारी बातचीत उसी के माध्यम से होगी.

90 दिन पहले देना होगा आवेदन

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उड़ान शुरू होने से कम से कम 90 दिन पहले परिचालन प्राधिकरण के लिए आवेदन करना होगा. इसके साथ विमानों का पूरा ब्यौरा, पिछले 5 साल की दुर्घटनाओं की जानकारी और भारत में मेंटेनेंस व ग्राउंड हैंडलिंग की व्यवस्था का विवरण भी देना होगा.

अधिकतम 5 साल के लिए मिलेगी अनुमति

परिचालन प्राधिकरण अधिकतम 5 साल के लिए दी जाएगी. अगर सुरक्षा मानकों में कोई कमी पाई गई या स्वामित्व से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ, तो अनुमति तुरंत निलंबित या रद्द की जा सकती है.

4 सीजन तक उड़ान नहीं तो अनुमति खत्म

एक और सख्त नियम यह है कि अगर कोई एयरलाइन किसी भारतीय एयरपोर्ट पर लगातार चार IATA ट्रैफिक सीजन तक उड़ान नहीं चलाती है, तो उस एयरपोर्ट के लिए उसकी अनुमति अपने आप निलंबित मानी जाएगी. साथ ही एयरलाइन को पहले स्लॉट लेना होगा और उड़ान का शेड्यूल कम से कम 30 दिन पहले DGCA में जमा करना होगा.

यात्रियों की शिकायतों के लिए भी व्यवस्था

DGCA ने यात्रियों का भी ध्यान रखा है. हर विदेशी एयरलाइन को शिकायत निवारण व्यवस्था बनानी होगी, ताकि किसी भी समस्या की स्थिति में यात्रियों को भटकना न पड़े.