मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने भारतीय एयरलाइंस के लिए एक अहम सेफ्टी एडवाइजरी जारी की है. इसमें मिडिल ईस्ट और पर्शियन गल्फ के हवाई क्षेत्र को लेकर बढ़ते खतरों पर सख्त चेतावनी दी गई है. एडवाइजरी में कहा गया है कि मौजूदा हालात में इस क्षेत्र के ऊपर उड़ान भरना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए एयरलाइंस को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है.

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सबसे बड़ा खतरा ईरान की तरफ से संभावित जवाबी हमलों को माना गया है, जो अमेरिका और इजरायल के साथ-साथ आसपास के देशों को भी प्रभावित कर सकते हैं. दूसरा खतरा मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़ा है. इस क्षेत्र में मौजूद हथियारों को रोकने की कार्रवाई के दौरान आसपास के हवाई क्षेत्र में भी खतरा पैदा हो सकता है.

DGCA ने बताया क्या है खतरा?

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DGCA के मुताबिक तीसरा बड़ा जोखिम यह है कि यहां हर ऊंचाई पर काम करने वाले एयर डिफेंस सिस्टम, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल मौजूद हैं, जो किसी भी समय सक्रिय हो सकते हैं. चौथा खतरा ऑपरेशनल गलती का है. यानी किसी सिविल विमान को गलती से सैन्य टारगेट समझ लिया जाए या इंटरसेप्शन के दौरान कोई चूक हो जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है.

DGCA का क्या काम है?

DGCA भारत की सिविल एविएशन से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण संस्था है. इसका काम देश में हवाई यात्रा को सुरक्षित, सही और नियमों के अनुसार चलाना है. DGCA, Ministry of Civil Aviation के तहत काम करता है. यानी यह सरकार का वह विभाग है, जो हवाई यात्रा से जुड़े नियम बनाता है और उनका पालन करवाता है. DGCA का सबसे बड़ा काम हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करना है. यह तय करता है कि विमान सुरक्षित तरीके से उड़ें और यात्रियों को किसी तरह का खतरा न हो. इसके लिए यह कई नियम बनाता है और एयरलाइंस को उनका पालन करना पड़ता है. भारत की सिविल एविएशन से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण संस्था है. इसका काम देश में हवाई यात्रा को सुरक्षित, सही और नियमों के अनुसार चलाना है.