नई दिल्ली: बीएमसी चुनाव परिणाम के बाद भी मुंबई में कुर्सी की लड़ाई जारी है. मुंबई में जीतकर आए बीजेपी के नगरसेवकों की बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ''मुंबई ने हमें जनादेश मिला है, हम 31 से 82 पर पहुंचे हैं. 195 सीटों पर लड़कर हमें 28.5 फीसदी वोट मिले जबकि शिवसेना 227 सीटों पर लड़ी और उसे 29 फीसदी वोट मिले हैं.''

किसको कितनी सीटें बीएमसी में शिवसेना को 84, बीजेपी को 82, कांग्रेस को 31, एनसीपी को 9, एमएनएस को 7 और अन्य को 14 सीटें मिली हैं. बीजेपी को एक सीट लॉटरी के जरिए मिली.

'दोस्ती' की संभावना खत्म नहीं तमाम विकल्पों की चर्चा के बीच कुछ ऐसे बयान आए जिनसे साफ संकेत मिल रहे हैं कि बीजेपी और शिवसेना में बीएमसी की सत्ता हासिल करने के लिए 'दोस्ती' संभावना अभी खत्म नहीं हुई है. हालांकि दोनों ही पक्ष मेयर पद के लिए दावा कर रहे हैं लेकिन साथ ही एक दूसरे के साथ मिलकर बीएमसी पर काबिज होने की संभावनाओं से इनकार नही कर रहे.

क्या फॉर्मूला हो सकता है ? शिवसेना और बीजेपी के पास विकल्प क्या हैं ये आपको बताएं उससे पहले अन्य के पास जो 14 सीटें हैं उनका समीकरण समझना बेहद जरूरी है. 14 अन्य में समाजवादी पार्टी की 6 सीटें हैं, 3 सीटें ओवैसी की पार्टी AIMIM के पास हैं, 4 निर्दलीय हैं, और 1 सीट अरूण गवली की पार्टी अखिल भारतीय सेना के पास है, जिस पर उनकी बेटी गीता गवली जीती हैं. अगर शिवसेना और बीजेपी हाथ नहीं मिलाते हैं तो बीएमसी के लिए तीन विकल्प निकल कर सामने आते हैं.

पहला विकल्प शिवसेना कांग्रेस से हाथ मिला ले, मतलब शिवसेना के 84 और कांग्रेस के 31 मिलकर हुए 115, यानि बहुमत से 1 सीट ज्यादा

दूसरा विकल्प शिवसेना, एनसीपी, एमएनस और अन्य को साथ मिला ले, मतलब 84, 9, 7 और 14, मिलकर हुए 114, यानि बहुमत के बराबर

तीसरा विकल्प बीजेपी, एनसीपी, एमएनएस और अन्य को साथ मिलाकर दावा करे, मतलब 82, 9, 7 और 14, मिलकर हुए 112, यानि बहुमत से 2

चौथा विकल्प शिवसेना और बीजपी आपस में बात करके ढाई-ढाई साल के लिए अपना मेयर बना लें. लेकिन जिस तरह के हालात दोनों के बीच हैं, उससे इस विकल्प के आसार बेहद कम नजर आ रहे हैं.