एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर हुए खुलासे पर अब कांग्रेस के सीनियर नेता शशि थरूर ने चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ECINet को बंद करने को कहा है. उन्होंने साफ कहा है कि ऐसे विनाशकारी सॉफ्टवेयर को बंद किया जाना चाहिए. चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अपने दो चुनाव आयुक्तों की सलाह लिए बिना मनमाने तरीकों से फैसले लिए. 

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इधर, सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए थरूर ने कहा, 'यह बेहद गंभीर मामला है. इसमें भारतीय नागरिकों को उनके कॉन्स्टिट्यूशन राइट्स से वंचित रखा जाता है. इसमें डायलिसिस इलाज से लेकर ट्रांसप्लांट तक जरूरी मानवीय फायदों से दूर रखना शामिल है. राजनीतिक चालबाजी बुरी बात है ही, लेकिन अमानवीय व्यवहार तो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.' 

थरूर ने आगे कहा, 'इलेक्शन कमीशन को प्रभावित नागरिकों और पूरे देश से माफी मांगना चाहिए. इस्तीफा तो कम से कम मांग है. इस विनाशकारी सॉफ्टवेयर को रद्द करना चाहिए. इससे हुए नुकसान को ठीक करना बेहद जरूरी है.'

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इस सॉफ्टवेयर को इसी साल जनवरी में ECINet नाम ऐप से लॉन्च किया था. इसके Beta Version की पिछले साल 2025 में बिहार के चुनावों में टेस्टिंग हुई थी. इसमें बेवसाइट और ऐप का इस्तेमाल जनता को चुनाव नतीजों के बारे में रियल टाइम अपडेट देने के लिए किया जाता है. वहीं चुनाव आयोग के अधिकारी भी इस पोर्टल का इस्तेमाल करते हैं.  

क्यों मचा है घमासान? 

पूरा विवाद उस खुलासे पर है, जिसे भारत के एक अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में किया है. इसमें दावा है कि दो चुनाव आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य रूप से जिस बात के लिए चेतावनी जारी की थी, वह ECINet का सेंट्रलाइजेशन था. इसमें स्टेट लेवल के अधिकारियों को प्रोसेस से बाहर रखा गया. वहीं गोवा में जो हुआ और इसका रिकॉर्ड भी मौजूद है. 

दरअसल, गोवा में मामला थोड़ा पेचीदा है. मामला है वहां वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब सिर्फ एक वोट खोना नहीं है. बल्कि इसके अलग नुकसान भी हैं. गोवा में कई सरकारी योजनाओं का लाभ वोटर लिस्ट के आधार पर ही मिलता है. इसमें गोवा मेडिक्लेम स्कीम है. इसके तहत सुपर स्पेशियलिटी इलाज, इनमें डायलिसिस, एंजियोप्लास्टी, ओपन हार्ट सर्जरी जैसी तमाम बीमारियों के लिए सुविधा है. 

अखबार ने दावा किया है कि एसआईआर के तहत गोवा में फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने से चार दिन पहले राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने दिल्ली में चुनाव आयोग को लेटर लिखा था. 

सात दिनों में उनकी यह आठवीं कोशिश थी. इसमें 97 ऐसे वोटर्स की लिस्ट थी, जिनकी बात गोवा के अपने EROs ने सुनी थी. जांच की थी. सुप्रीम कोर्ट की तय प्रक्रिया के तहत उन्हें योग्य पाया था. 

ईमेल में कहा गया था कि उन्हें लिस्ट से हटाने के पुराने फैसलों को पलटना होगा. लेकिन EROs सॉफ्टवेयर के जरिए उन फैसलों को पलट नहीं सके. इसे सिर्फ दिल्ली से कंट्रोल किया जा सकता था.