नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद से देश में हाहाकार मचा हुआ है. सरकार बड़े बड़े दावे कर रही है लेकिन पूरा देश कैश की किल्लत से परेशान हैं. बैंको और एटीएम के बार एक महीने बाद भी लाइने कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. लोग परेशान हो कर सवाल कर रहे हैं कि आखिर ये कब तक चलेगा और हालात कब सुधरेंगे? नोटबंदी के बीच लोगों को हो रही परेशानी के बीच कुछ सवाल उठ रहे हैं.
एबीपी न्यूज़ ने नोटबंदी के हर पहलू, हर बड़े सुलगते सवालों पर सबसे विश्वसनीय प़ड़ताल की है. भारतीय रिजर्व बैंक चला चुके पूर्व गवर्नर विमल जालान (1997-2003) वाई वी रेड्डी (2003-2008) डी सुब्बा राव (2008-2013) डिप्टी गवर्नर उषा थोराट (2005-2010) और के सी चक्रवर्ती (2009 -2014) से एबीपी न्यूज़ ने नोटबंदी से जुड़े सुलगते सवालों के जवाब पूछे हैं.
पहला सवाल- क्या नोटबंदी से आएगा काला धन? इस सवाल के जवाब में लगभग सभी गवर्नर्स ने माना कि नोटबंदी से काले धन वालों में डर तो बैठा है लेकिन काला धन कितना आएगा, इसका कोई अनुमान लगाया नहीं जा सकता है.
पूर्व गवर्नर विमल जालान का मानना है कि काला पैसा रियल एस्टेट, गोल्ड, फॉरेन एक्सचेंज की शक्ल में काला धन बन चुका है. जो काला पैसा कैश की शक्ल में रहा ही नहीं, वो कैसे वापस आएगा.
पूर्व डिप्टी गवर्नर उषा थोराट का कहना है कि नोटबंदी ने काले धन को शून्य पर पहुंचा दिया है. नोटबंदी की यही सबसे बड़ी उपलब्धि है.
आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी सुब्बा राव का कहना है कि काले धन का कोई विश्वसनीय आंकड़ा ही नहीं है. 2007 में साढ़े 37 लाख करोड़ काले धन का आंकड़ा विश्व बैंक ने दिया था. ये देश की जीडीपी का 23.2 फीसदी है. इस पैसे पर 16 फीसदी के हिसाब से टैक्स नहीं लगा इसलिए सरकार को पौने चार लाख का नुकसान हुआ. यही काला धन है.
पूर्व गवर्नर वाई वी रेड्डी का भी कहना है कि कोई नहीं जानता है कि काला धन देश में या विदेश में कितना है इसलिए कह नहीं सकते कि कितना आएगा, कितना रह जाएगा.
8 नवंबर को 500 और एक हजार के नोट बंद करते हुए पीएम मोदी ने देश को यकीन दिलाया था कि नोटबंदी से जाली नोट का जाल तहस नहस हो जाएगा. 500 और एक हजार की शक्ल में गड़ा हुआ काला धन वापस आ जाएगा. एक महीने होते ही सरकार के सुर बदलने लगे हैं. कल राजस्व सचिव हसमुख आढिया ने ये बयान देकर चौंका दिया कि बंद हुए करीब पंद्रह लाख करोड़ के नोट वापस आ जाएंगे. आज आरबीआई का इशारा भी कुछ ऐसा ही था.
पूर्व गर्वनर और डिप्टी गवर्नर की राय के बाद अब आप समझ गए होंगे कि काले धन को लेकर सरकार ने यूटर्न क्यों लिया है. सरकार ने जो 15 लाख करोड़ बंद किए थे उतने नोट लगभग बैंक में पहुंच रहे हैं. काला धन अगर था तो कितना था. ये पता नहीं. पता ये भी नहीं कि कितना काला धन प्रॉपर्टी, गोल्ड, फॉरेन एक्सचेंज में बदल चुका है. नोटबंदी से काले धन आने के दावे पर सरकार कैसे कायम रहे.
दूसरा सवाल- आखिर कब मिलेंगे लोगों को अपने पैसे?
आरबीआई और बैंक महीने भर से कह रहे हैं कि कैश की कोई किल्लत नहीं है लेकिन देश के करोड़ों लोग कैश की किल्लत से ही जूझ रहे हैं. आरबीआई के दो और दो सरकारी प्रेस में तीन शिफ्ट में नोटों की छपाई हो रही है लेकिन जरूरत पूरी नहीं हो रही है. एबीपी न्यूज ने आरबीआई के पूर्व गवर्नरों से पूछा तो ठीक ठीक वो भी नहीं बता पाए कि लाइन कब तक लगेगी.
पूर्व ड़िप्टी गवर्नर उषा थोराट का कहना है कि 86 फीसदी करेंसी को बदलना है तो समय तो लगेगा ही. थोराट कोई तारीख तो नहीं बता पाईं लेकिन इशारा ये है कि कई महीने लगेंगे.
पूर्व गवर्नर विमल जालान का अनुमान है कि 8-10 दिन में हालात बेहतर हो सकते हैं लेकिन जालान का सुझाव है कि सरकार को 100, 500 और 2000 के बीच एक और नोट लाना चाहिए. जालान का एक और सुझाव है कि बैंकों में नोट एक्सचेंज अभी कम से कम 6 महीने तक और होना चाहिए.
पूर्व गवर्नर केसी चक्रवर्ती का कहना है कि हालात ठीक नहीं हुए तो अर्थव्य़वस्था के लिए ठीक नहीं होगा क्योंकि 90 फीसदी देश आज भी कैश पर चलता है.
आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने जो आज आंकड़ा दिया है उसी से साफ है कि कैश की किल्लत है. सरकार ने एक झटके में 15 लाख करोड़ बाजार से हटा लिए. 11.55 लाख करोड़ पुराने नोट बैंकों में पहुंच भी गए लेकिन नए नोट आ पाए सिर्फ 4 लाख करोड़. आप लाइन में खड़े हैं तो आप ये जान लेना चाहिए कि आप लाइन में हैं क्योंकि 11 लाख करोड़ के नोट बाजार में सरकार और आरबीआई दे नहीं पाए हैं.
कैश की किल्लत से देश की अर्थव्यवस्था को बचाना है तो सरकार को उन जगहों पर कैश की सप्लाई तेज करनी होगी जहां कैश में ही काम होता है. गांव, खेत, ट्रांसपोर्ट सेक्टर में सरकार को इमरजेंसी एक्शन प्लान के साथ कैश पहुंचाना होगा.
तीसरा सवाल- अर्थव्यवस्ता पर क्या असर पड़ेगा और क्या EMI खम होगी? नोटबंदी के बाद देश को उम्मीद थी कि बैंकों के पास अथाह पैसा आ रहा है तो ब्याज दरें कम हो जाएंगी. पुराने नोट की शक्ल में ही सही, पुराने नोट बैंकों के पास आने लगे तो बैंकों ने एफडी की तो ब्याज दरें घटाकर सात फीसदी से भी नीचे कर दी.
देश उम्मीद लगाए बैठा था कि लोन भी सस्ते हो जाएंगे लेकिन ब्याज दरें तय करने वाली सरकार और आरबीआई की टीम ने उम्मीदों को झटका देते हुए आज ब्याज दरें में कोई बदलाव नहीं किया. आरबीआई ने विकास दर अनुमान को घटाया दिया. नोटबंदी से पहले 7.6 फीसदी विकास दर का अनुमान था जो अब घटाकर 7.1 फीसदी हो चुका है. संकेत तो साफ है कि नोटबंदी के नकारात्मक नतीजे के लिए सरकार तैयार हो चुकी है.
एबीपी न्यूज ने जब आरबीआई के पूर्व गवर्नर्स का मन टटोला तो उन्होंने अर्थव्यवस्था को लेकर बहुत ज्यादा चिंता नहीं जताई.
पूर्व गवर्नर विमल जालान का अनुमान है कि एक दो साल जीडीपी पर नेगेटिव असर होगा. एक फीसदी की गिरावट आ सकती है लेकिन जालान का आकलन है कि भारत की अर्थव्यवस्था बुनियादी तौर पर मजबूत है इसलिए कुछ वक्त के लिए ही दिक्कत रहेगी.
पूर्व डिप्टी गवर्नर उषा थोराट का कहना है कि नोटबंदी से लोगों ने खर्च करना कम किया है इसका असर जीडीपी पर होगा लेकिन कुल मिलाकर आने वाला वक्त अर्थव्यवस्था के लिए ठीक होगा.
पूर्व गवर्नर डी सुब्बा राव का कहना है कि कैश की किल्लत से खर्च में कटौती होगी और उससे फिलहाल अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा लेकिन लंबे वक्त में इसका असर अच्छा दिखने वाला है. जितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से नोटबंदी की स्थिति से निपटेंगे, उतना ही कम बुरा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा लेकिन लंबे समय में अच्छा असर तब पड़ सकता है जब पुराने नोट चले जाएंगे और नए नोट से लोग खर्च करने लगेंगे तब आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती है. अगर बैंक के पास पैसे भारी मात्रा में जमा हुए तो जीडीपी 7.5 फीसदी तक जा सकता है.
तीसरा सवाल- विकास के लिए पैसे मिलेंगे? नोटबंदी के बाद देश ये भी उम्मीद लगाए बैठा है कि जो काला धन बाहर आएगा वो रिजर्व बैंक के जरिए सरकार को मिलेगा लेकिन क्या ये सच है?
उषा थोराट का मानना है कि नोटबंदी से सरकार को जो 13 लाख करोड़ मिलेंगे और उससे जो टैक्स मिलेगा वही सरकार की कमाई होगी. इसका असर अगले बजट में ही दिख जाएगा जब सरकार की कमाई बढ़ी हुई दिखेगी. सरकार को जो काम करने हैं उसी पैसे से करने होंगे.
विमल जालान का भी मानना है कि ये सवाल सरकार या आरबीआई की कमाई का नहीं है. सरकार के ही कहने पर आरबीआई नोट छापता है. आज भी उसी के कहने पर नोट हटाए गए या नए लाए जा रहे हैं.
पूर्व गवर्नर केसी चक्रवर्ती नोटबंदी को फायदे का सौदा नहीं मान रहे हैं. केसी चक्रवर्ती के मुताबिकबैंकों में जो रुपया जमा हुआ है उसकी कोई कीमत नहीं उससे बैंकों को कोई फायदा नहीं होता है. बैंक उस पर इंटरेस्ट देगा. जब तक वो रकम आरबीआई तक नहीं जाएगा तब तक कोई फायदा नहीं होगा.
चिंता ये है कि नोटबंदी से दुनिया में रुपये की हैसियत क्या रह जाएगी? विमल जालान मान रहे हैं कि नोटबंदी से दुनिया में रुपये की विश्वसनीयता को धक्का लगेगा. सरकार को दुनिया को ये विश्वास दिलाना होगा कि आगे से ऐसा नहीं होगा.
सरकार की अब तो बड़ी चुनौती तो लोगों की कैश की किल्लत को दूर करना है. हो सकता है आज कल में सरकार इस समस्या से पार भी पा जाए लेकिन असली इम्तिहान तो नोटबंदी के बुरे असर से देश की अर्थव्यवस्था को बचाना है.
चौथा सवाल- क्या नोटबंदी से कैशलेस हो जाएगा इंड़िया?
पीएम मोदी ने एलान करते समय नोटबंदी को कैशलेस इंडिया या डिजिटल इंडिया से नहीं जोड़ा था लेकिन देश जब लाइन में खड़ा हो गया तो शुरू हुई कैशलेस इंडिया की मुहिम. पूरी सरकार, आरबीआई, बैंक, कैशलेस इंडिया की मुहिम में शामिल हो चुके हैं. देश जब लाइन में खड़ा था जब पेटीएम जैसी मोबाइल पेमेंट कंपनी चमक गई. 16 करोड़ ग्राहक पेटीएम करने लगे.
पान वाले से लेकर गोलगप्पा वाला तक पेटीएम से पैसे मांगने लगा. कैशलेस इंडिया की मुहिम ने जोर पकड़ा लेकिन क्या कैशलेस इंडिया मुमकिन है? नोटबंदी का असर अच्छा होगा, बुरा होगा इस पर बहस जारी है लेकिन आरबीआई के पूर्व गवर्नर मान रहे हैं कि इसने देश को कैशलेस होने का मौका दिया है.
कैसे बढ़ा मोबाइल वॉलेट कंपनियों का कारोबार 8 नवंबर के बाद से पेटीएम से रोज करीब 70 लाख ट्रांजैक्शन हो रहे हैं. 120 करोड़ रुपये का लेन-देन हो रहा है. पेटीएम के 16 करोड़ यूजर्स हो चुके हैं. 8 नवंबर के बाद से मोबीक्वीक यूजर्स की संख्या 4 करोड़ हो चुकी है. पे वर्ल्ड नाम की कंपनी 10 करोड़ यूजर्स हैं. मोबाइल वॉलेट कंपनियों के प्रमुख तो अब मोबाइल वॉलेट के फायदे भी गिनाने लगे हैं.
पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा के मुताबिक, ''जब आप डिजिटल पेमेंट करते है तो डिजिटल रिकॉर्ड बनता है जिसको बैंक ट्रस्ट करता है. तो आपको कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा. इस फ़ायदे की अभी बात नहीं हो रही है.
सिर्फ प्राइवेट मोबाइल वॉलेट कंपनिया ही नहीं सरकारी डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म ने भी रफ्तार पकड़नी शुरू की है.एसबीआई बडी के 10 लाख यूजर्स हो चुके हैं. नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने रुपे प्लेटफॉर्म पर रोज 8 लाख ट्रांजेक्शन हो रहा है. यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के लिए स्मार्ट फोन भी नहीं चाहिए. एसएमएस से पेमेंट होता है. UPI पर रोज 9 हजार ट्रांजेक्शन हो भी रहे हैं.
अनुमान लगाया जा रहा है कि 2022 तक यानी अगले चार सालों में मोबाइल वॉलेट से ट्रांजैक्शन 55 लाख करोड़ तक हो सकता है जो अभी 20 हजार 600 करोड़ है. ये आंकड़ा भले ही मोबाइल वॉलेट कंपनियों के लिए सुनहरे सपने की तरह हो, लेकिन आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती के मुताबिक बिना नकद लेन-देन वाला अर्थतंत्र इकोनॉमी के लिए बहुत खराब है.
