मलबे में जिंदगियां और अरमान..., सत्य निकेतन हादसे को लेकर राहुल का हमला
सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना पर राहुल गांधी ने पूछा कि दिल्ली में ट्रिपल इंजन सरकार है तो अब किस बात से लाचार है? उन्होंने कहा कि जहां नीयत नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होती.

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. इस दौरान उन्होंने बीजेपी सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप भी लगाया है. कांग्रेस सासंद राहुल गांधी ने कहा, हर बार बीजेपी सरकार की वही शर्मनाक पैटर्न है. हादसों से पहले रोकथाम नहीं, उनके बाद बयानबाजी होती है. कुछ छोटे अफसरों पर जिम्मेदारी मढ़ दी जाती है और असली गुनाहगार जवाबदेही मुक्त रहते हैं.'
सत्य निकेतन हादसे को लेकर केंद्र पर बरसे राहुल गांधी
उन्होंने कहा, 'सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली त्रासदी नहीं है. पिछले 4 महीनों में सैदुलाजाब में ऐसी त्रासदी में 6 लोगों की मौत हुई, हौज रानी में आग ने 22 जानें ले लीं. हर बार जिंदगियां, सपने और अरमान मलबे में दबते हैं और हर बार कार्रवाई गायब रहती है.' इस दौरान राहुल गांधी ने पीएम मोदी के दिमागी नक्सल और नाराज फूफा वाले बयान का भी जिक्र किया.
पीएम के दिमागी नक्सल वाले बयान का जिक्र
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, 'जवाबदेही मांगने पर प्रधानमंत्री खुद आपको दिमागी नक्सल, नाराज फूफा जैसे अपमानजनक तमगे दे देते हैं. उनका मकसद है कि सवाल पूछने वालों को शर्मिंदा करो, बदनाम करो और चुप करा दो. ये सरकार 12 साल में दुनिया भर की बातें कर के आपको गोल-गोल घुमाती रही, लेकिन मुद्दे की बात नहीं की. दिल्ली में ट्रिपल इंजन सरकार है तो अब किस बात से लाचार है? लाचारी है नीयत की, क्योंकि जहां नीयत नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होती.'
दिल्ली हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस हादसे पर कड़ी टिप्पणी करते हुए डीयू, एमसीडी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि दिल्ली में हर कुछ महीनों के अंतराल पर ऐसी घटनाएं होती हैं, जहां निर्दोष लोग अपनी जान गंवा देते हैं. कभी आग लगती है, कभी पानी भरता है तो कभी इमारत ढह जाती है. इसमें दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी को कुछ ठोस करना चाहिए.
बीते दो सालों में दिल्ली में कितने हादसे?
बीते दो वर्षों में रोहिणी, साकेत, वेलकम, करोल बाग, पहाड़गंज और मुस्तफाबाद के अलावा दिल्ली के कई अन्य इलाकों में इमारत गिरने की घटनाएं हुईं. इस साल मई में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई, जबकि जुलाई में रोहिणी सेक्टर-16 में ऐसी ही घटना में तीन मजदूर मलबे में दबकर मर गए. पिछले साल अप्रैल में मुस्तफाबाद में चार मंजिला मकान ढहने से 11 लोगों की जान गई थी. इमारतों के ढहने की इन घटनाओं के अलावा दिल्ली में बड़े-बड़े अग्निकांड भी हुए हैं.
इसी साल मार्च में दिल्ली के पालम इलाके में एक इमारत में आग लगने के कारण 9 लोग मारे गए थे. फिर मई महीने में विवेक विहार अग्निकांड में 9 लोगों की जान गई थी. जून में दिल्ली के मालवीय नगर में 'फ्लोरिश स्टे' होटल में आग लगने से 21 लोगों की जान चली गई. इस त्रासदी में मारे गए 21 लोगों में से 9 भारतीय थे, जबकि बाकी विदेशी नागरिक थे, जिनमें बांग्लादेश, लाइबेरिया, नाइजीरिया और मोजाम्बिक के नागरिक शामिल थे. इससे पहले भी दिल्ली ने कई बड़े अग्निकांड का दर्द झेला.
हादसे में कई लोगों की जा चुकी है जानें
मई 2022 में मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया में आग लगने के कारण 27 लोगों की जान गई. फरवरी 2019 में करोल बाग इलाके में एक होटल में आग लगने से 17 लोग मारे गए. उसी साल दिल्ली में रानी झांसी रोड पर अनाज मंडी में भीषण आग में 43 लोगों की मौत हुई. वहीं, जनवरी 2018 में बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में बहुत बड़ी आग लगी, जिसमें 17 लोगों की जान गई. आग तो आग दिल्ली में पानी ने भी लोगों की जान ली है. जुलाई 2024 में दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में भारी बारिश के बाद पानी भरा था. उसमें तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी.





















