नई दिल्ली इन दिनों एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए सज संवर रही है. 15 जनवरी से राजधानी में 28वां राष्ट्रमंडल देशों का स्पीकर सम्मेलन शुरू होने जा रहा है. इस अहम सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. इसमें दुनिया के 42 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे, जिनमें 21 देशों के स्पीकर और 15 संसदीय संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हैं. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि यह सम्मेलन संसदों के बीच संवाद बढ़ाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का बड़ा मंच है. उनके मुताबिक जब संस्थाओं के बीच बातचीत होती है तो नए विचार आते हैं और सुधार के रास्ते खुलते हैं.

Continues below advertisement

16 साल बाद भारत में हो रहा है बड़ा आयोजन 

भारत में यह सम्मेलन 16 साल बाद हो रहा है. इससे पहले 1971, 1986 और 2010 में यह आयोजन हुआ था. इस बार भारत को इसकी अध्यक्षता भी मिली है, जिसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. 16 जनवरी को कार्यकारी परिषद की बैठक होगी, जिसमें 15 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. हालांकि इस बार पाकिस्तान और बांग्लादेश को सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया गया है. कनाडा और ब्रिटेन जैसे कई बड़े देश इसमें भाग ले रहे हैं.

Continues below advertisement

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनोवेशन पर खास फोकस 

इस सम्मेलन की थीम भी काफी आधुनिक रखा गया है. संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल पर खास चर्चा होगी. ओम बिरला ने बताया कि AI की मदद से सांसदों को 22 भाषाओं में पत्र और दस्तावेज जल्दी मिल सकेंगे. इससे संसद का कामकाज ज्यादा तेज और आसान होगा. खास बात यह भी है कि पूरा सम्मेलन डिजिटल होगा यानी कागज का इस्तेमाल नहीं होगा और सब कुछ ऑनलाइन तरीके से किया जाएगा. यह पर्यावरण के लिहाज से भी एक अच्छा कदम है.

जनता और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के कदम 

सम्मेलन का एक अहम मकसद संसद में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाना भी है. इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि लोग अपनी बात आसानी से संसद तक पहुंचा सकें. कुल मिलाकर, यह सम्मेलन भारत के लिए एक बड़ा मौका है, जहां वह दुनिया के सामने अपने मजबूत लोकतंत्र और आधुनिक सोच को दिखा सकेगा. AI और डिजिटल तकनीक के जरिए संसद को ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है.