दिल्ली में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों और ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर आज एक बार फिर हाई कोर्ट में सुनवाई जारी रही. हाई कोर्ट में आज की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ऑक्सीजन को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार का काम ऑक्सीजन के प्रोक्योरमेंट का है और राज्य सरकारों का डिस्ट्रीब्यूशन का है. लिहाजा राज्य सरकार सीधा ऑक्सीजन के प्रोक्योरमेंट के काम में हस्तक्षेप ना करें इससे माहौल खराब हो सकता है.


आज जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोरोनावायरस से लड़ने के लिए क्या काम हो रहा है उससे जुड़ी हुई तथ्यात्मक जानकारी कोर्ट के सामने आना भी जरूरी है. जिससे कि पता चल सके कि क्या कुछ हुआ और क्या नहीं.


केंद्र और राज्य दोनों की कोशिश यह है कि जनता की परेशानियों को दूर किया जा सके


केंद्र सरकार ने वकील ने कहा कि राज्य सरकारों ने केंद्र के दिए हुए सुझावों पर अच्छे से अमल शुरू कर दिया है. केंद्र और राज्य दोनों की कोशिश यह है कि जनता की परेशानियों को दूर किया जा सके. केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया कि वैसे तो दिल्ली का कोटा 480 मीट्रिक टन का है लेकिन फिलहाल मौजूदा हालातों में अगर हम 340 मीटिंग टन भी मुहैया करा पाएं तो उससे काफी दिक्कतें कम हो सकती हैं.


केंद्र सरकार ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जा रही है इसके लिए ऑक्सीजन टैंकर को वायु सेना के हवाई जहाज से लाने के साथ ही रेलवे से भी लगातार लाया जा रहा है. केंद्र की तरफ से कहा गया कि फिलहाल ऑक्सीजन को लाने के लिए फिलहाल अभी तक दिल्ली सरकार की तरफ से टैंकर का कुछ खास इंतजाम नहीं हुआ है इसलिए में केंद्र ने दिल्ली से कहा है कि वह अपने प्रयास जारी रखें.


केंद्र सरकार एक राष्ट्रीय स्तर पर ऑक्सीजन का प्रोक्योरमेंट कर रही है


जवाब में दिल्ली सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी है कि 18 क्रायोजेनिक टैंकर जिनमें ऑक्सीजन को लाया ले जाया जा सकता है. वह आयात किए जा रहे हैं जबकि चार टैंकर का इंतजाम दिल्ली सरकार कर चुकी है. इस दौरान केंद्र की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार एक राष्ट्रीय स्तर पर ऑक्सीजन का प्रोक्योरमेंट कर रही है और उसको राज्य की जरूरत के हिसाब से एलोकेट कर रही है. केंद्र ने कहा कि हमने अस्पताल और डॉक्टर भी दरख्वास्त की है कि वह ऑक्सीजन का ज़रूरत के हिसाब से इस्तेमाल करें. अगर किसी मरीज को 3 घंटे के लिए ऑक्सीजन की जरूरत हो तो उसको 5 घंटे तक ऑक्सीजन ना दी जाए इससे जरूरतमंद और लोगों को मदद मिलेगी.


इस दौरान केंद्र सरकार के वकील ने दिल्ली सरकार पर अपने स्तर पर ऑक्सीजन मांगने का आरोप लगाया कि सरकार ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने उद्योगपति सज्जन जिंदल को चिट्ठी लिखकर ऑक्सीजन देने की मांग की है. अगर सभी राज्य ऐसा करने लगेंगे तो उससे हालात खराब हो सकते हैं क्योंकि प्रोक्योरमेंट का काम फिलहाल केंद्र सरकार को करने दिया जाए और जरूरत के हिसाब से राज्यों को ऑक्सीजन एलोकेट की जाएगी.


केंद्र सरकार को देने के बाद भी ऑक्सीजन बचती है तो वह दिल्ली को दी जाए- दिल्ली सरकार के वकील


जवाब में दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि हमने सिर्फ यह मांग की है कि अगर केंद्र सरकार को देने के बाद भी ऑक्सीजन बचती है तो वह दिल्ली को मुहैया करा दी जाए. जिस पर केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि अगर बची हुई ऑक्सीजन की बात है तो वह भी केंद्र के पास ही आनी चाहिए जिससे कि हम जरूरतमंदों तक वह पहुंचा सकें.


केंद्र सरकार ने कहा हालांकि अगर दिल्ली सरकार उद्योगपतियों से टैंकर के लिए मांग करती है तो उसमें केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि मौजूदा हालातों को देखते हुए जरूरी है कि राज्य अपने हिसाब से उद्योगपतियों से ऑक्सीजन ना लें, यह काम केंद्र को करने दें और केंद्र सरकार राज्यों को दरों के हिसाब से ऑक्सीजन मुहैया कराएगी.


केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि देश के मौजूदा हालातों में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार दिन रात एक किए हुए हैं इसी कोशिश में कि ऑक्सीजन का ज्यादा से ज्यादा इंतजाम किया जा सके. जिसके बाद कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य ऑक्सीजन लाने वाले जाने के लिए टैंकर का इंतजाम करें और ऑक्सीजन की उपलब्धता और उसके आबंटन का काम केंद्र सरकार देखें. केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश भर के उद्योगपतियों से अपील की है कि अगर किसी के पास भी ऑक्सीजन मौजूद है तो वह केंद्र की मदद करें.


दिल्ली सरकार सप्लाई चेन में विघ्न डाल रही है- जयपुर गोल्डन अस्पताल के वकील


इस बीच जयपुर गोल्डन अस्पताल के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनको जो ऑक्सीजन मिलनी थी वह नहीं मिल पा रही क्योंकि दिल्ली सरकार सप्लाई चेन में विघ्न डाल रही है. जयपुर गोल्डन अस्पताल के वकील ने कहा कि वह लगातार ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दिल्ली सरकार को दे रहे हैं लेकिन जिस तरह की मदद होनी चाहिए थी वह नहीं हो रही. इसकी वजह से कमी और अनिश्चितता का माहौल बन गया है.


अस्पताल के वकील ने कहा कि मंत्री कह रहे हैं कि अस्पताल हड़कंप का माहौल बना रहे हैं. सवाल यह है कि आखिर मरीज के मरने के कितनी देर बाद हम को मैसेज करने हैं वह बता दें. अस्पताल के वकील ने कहा कि हमारे लिए भी यह अनिश्चितता का माहौल जानलेवा बनता जा रहा है.


अस्पताल की ओर से कहा गया कि उनको आईनॉक्स से सप्लाई मिलती थी लेकिन फिलहाल उस में दिक्कत आ रही है लिहाजा आईनॉक्स को निर्देश दिया जाए कि वह जो भी सप्लाई भेज रहे हैं उसके बारे में जानकारी दी जाए अस्पताल को दी जाए क्योंकि दिल्ली सरकार ने बहुत अनिश्चितता का माहौल बना दिया है. इसका विरोध करते हुए दिल्ली सरकार के वकील ने अस्पताल के वकील की दलीलों और मंशा पर सवाल खड़े किये और कहा कि यह दिल्ली सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.


दिल्ली में दिक्कत उन अस्पतालों में आ रही है जिनके पास ऑक्सीजन स्टोरेज की जगह नहीं- केंद्र सरकार के वकील


सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने सुझाव देते हुए कहा कि केंद्रीय गृह सचिव ने यह सुझाव दिया है कि दिल्ली सरकार सभी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर बातचीत करें और उनकी दुविधा हो और अनिश्चितता के माहौल को दूर करें. केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि दिल्ली में दिक्कत उन अस्पतालों में आ रही है जिनके पास ऑक्सीजन स्टोरेज की जगह नहीं है..जबकि बड़े अस्पतालों के पास समुचित मात्रा में ऑक्सीजन मौजूद है. केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहते हैं तो दिल्ली के पास मौजूदा समय में समुचित ऑक्सीजन मौजूद है.


महाराजा अग्रसेन अस्पताल की तरफ से भी कोर्ट से कहा गया कि हम को यह नहीं पता कि हमको कब और कितनी ऑक्सीजन मिलेगी और मिल सकती है और इसको लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बना है जो हम सब के लिए परेशानी का सबब है. महाराजा अग्रसेन अस्पताल के वकील ने कहा कि हमारे लोगों ने टैंकर का भी इंतजाम कर लिया लेकिन फिर भी हम को ऑक्सीजन है वक्त पर नहीं मिल पा रही है. अस्पताल ने मांग की कि कोई एक व्यक्ति होना चाहिए जो यह देखें कि ऑक्सीजन का टैंकर अस्पतालों तक पहुंच पा रहा है या नहीं.


अस्पताल की इन दलाली पर कोर्ट ने कहा कि अगर आप ने राज्य सरकार को बताया था उसके बाद भी राज्य सरकार ने को गंभीरता से नहीं लिया तो यह निश्चित तौर पर एक गंभीर मामला है आप हमको उसके बारे में जानकारी दीजिए. इस बीच केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि किसी भी राज्य को ऑक्सीजन को लेकर भटकने की जरूरत नहीं है हमारे पास में समुचित ऑक्सीजन मौजूद है और इसकी रियल टाइम मॉनिटरिंग हो रही है.


इस बीच शांति मुकुंद अस्पताल के वकील ने कहा कि हमारे यहां 96 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर है और अब हालात यह हैं कि क्योंकि हमको ज्यादा कुछ पता नहीं है लिहाज़ा और मरीजों को इनकार करना पड़ रहा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आइनॉक्स से कहा कि अगर मुमकिन है तो वो अपने टैंकर्स से दिल्ली में सप्लाई करें. कंपनी ने बताया की वो मदद के लिये तैयार हैं लेकिन कल ही राजस्थान सरकार ने वो टैंकर अपने कब्जे में ले लिए. कंपनी ने बताया कि फिलहाल मौजूदा हालातो में दिल्ली में अब मांग कम हो रही है जबकि यूपी और राजस्थान में बढ़ रही है. कंपनी ने कहा कि हम पानीपत से ऑक्सिजन पहुंचाने के लिए तैयार हैं बशर्ते साफ रास्ता मिले.


दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार व केंद्र सरकार को लगाई कड़ी फटकार


कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि अगर आप पर ऐसे दिशा-निर्देश जारी किए हुए हैं तो आखिर ऐसी घटना क्यों हो रही है जिस पर केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि कंपनी हमको जानकारी दें हम ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर कार्रवाई करेंगे. केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि गृह मंत्री ने तो यहां तक कहा हुआ है कि ऑफिसर टैंकर को एंबुलेंस की तरह देखा जाना चाहिए.


इस बीच में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार व केंद्र सरकार को लगाई कड़ी फटकार कहा आप लोगों की वजह से 21 और लोगों की जान चली गई. केंद्र सरकार ने कहा हमारी वजह से नहीं क्योंकि हमारा काम एलोकेट करने का है और हमने वह किया हुआ है. कोर्ट ने कहा लेकिन वह दिल्ली पहुंच नहीं रहा. केंद्र सरकार ने कहा कि यह दिल्ली सरकार को देखना है. कोर्ट ने कहा कि आप दोनों की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आपने आवंटन किया है तो आपकी देखा जिम्मेदारी है कि वह ऑक्सीजन संबंधित राज्य तक पहुंच रही है या नहीं.केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि हम को देशभर के राज्यों के बारे में देखना है यह राज्य सरकार को देखना है कि ऑक्सीजन उसके यहां पहुंच रही है या नहीं.


केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि पानीपत में उत्पादन को बढाकर 140MT की जगह 170 मेट्रिक टन कर दिया गया है जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा लेकिन दिल्ली सरकार के पास तो अपने टैंकर तक नहीं है आप राज्य को एलोकेट तो कर रहे हैं लेकिन वो उसको खुद मंगा भी नहीं सकता.केंद्र सरकार के नोडल अधिकारी ने कहा कि फिलहाल अभी दिल्ली से परेशानी और खराब हालातों से जुडी हुई खबरें नहीं आ रही है ऐसा गुरुवार और शुक्रवार को हुआ था लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद हालात काफी बेहतर है.


कुछ दिनों के दौरान 4 और ऑक्सीजन टैंकर का इंतजाम कर लिया है- दिल्ली सरकार के अधिकारी


सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अधिकारी ने बताया कि उन्होंने पिछले कुछ दिनों के दौरान 4 और ऑक्सीजन टैंकर का इंतजाम कर लिया है. इसके साथ ही अब टैंकर में जीपीएस लगा दिए गए हैं जिससे कि रियल टाइम लोकेशन के बारे में जानकारी मिलती रहे. इस दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आप यह देखिए कि ऑक्सीजन की आवाजाही में किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो.


कुछ अस्पतालों की तरफ से कोर्ट से कहा गया कि वह लगातार ऑक्सीजन की मांग कर रहे हैं लेकिन उनको नहीं मिल रही. जिस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमको जानकारी मिली है कि ऑक्सीजन खुले बाजार में ब्लैक में बेची जा रही है.


दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल हमारी चिंता यह है कि केंद्र सरकार ने जो 490 मीटिंग ट्रेन का कोटा आवंटित किया है हमको वह पूरा मिल जाए फिलहाल अभी दिल्ली को करीबन 300 मेट्रिक टन ही मिल रहा है.


इस बीच कोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि दिल्ली सरकार को यह देखना होगा कि कहीं ऐसा ना हो कि एक अस्पताल को ज्यादा सप्लाई मिलने लगे और दूसरी को कम या एक के पास ज्यादा स्टॉक हो दूसरे के पास कम.


इस बीच आईनॉक्स कंपनी की तरफ से कोर्ट से कहा गया कि अगर दिल्ली सरकार की तरफ से उनको यह बता दिया जाए कि उनको किस अस्पताल को कितने दिनों में कितनी सप्लाई करनी है तो काफी आसानी हो सकती है और अगर ऐसा हो जाता है तो निर्बंधित सप्लाई सुनिश्चित की जा सकती है. दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर अस्पतालों में अनिश्चितता और दुविधा का माहौल होगा तो फिर आखिर ऐसे में मरीज कहां जाएंगे, ऐसे हालातों मिल लो अपने घरों में मर जाएंगे.


ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी मामले में सख्त कार्रवाई की निर्देश


इस बीच में दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि ऑक्सीजन लाने ले जाने के लिए कुछ टैंकर का इंतजाम किया जा चुका है. जल्दी वह टैंकर दिल्ली में ऑक्सीजन लाने ले जाने के लिए पहुंच जाएंगे. इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार का प्रशासन को देखना होगा कि अगर कहीं ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी हो रही है उनके खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए.


करीबन ढाई घंटे की सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना आदेश सुनाया कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केंद्र सरकार की सुनिश्चित करें कि rt-pcr टेस्ट के लिए इस्तेमाल होने वाली किट का आयात जल्द से जल्द पूरा हो और वह जल्द से जल्द उपलब्ध करवाई जाए जिससे कि आरटी पीसीआर टेस्ट में हो रही देरी को कम किया जा सके. कोर्ट ने इससे जुड़ी सारी जानकारी कोर्ट के सामने रखने को कहा और ये  जानकारी सील्ड कवर में दी जाएगी.


ऑक्सीजन सप्लाई के मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली सरकार और जिंदल के बीच ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर हुए बातचीत का भी ज़िक्र किया. कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस दलील का भी जिक्र किया जिसमें केंद्र सरकार ने कहा था कि ऑक्सीजन के प्रोक्योरमेंट का काम केंद्र सरकार का और डिस्ट्रीब्यूशन का काम राज्य सरकार का है. हालांकि दिल्ली सरकार ने कहा कि उन्होंने यह बात टैंकर को लेकर की थी जिसके बाद कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि ऑक्सीजन के प्रोक्योरमेंट का काम केंद्र सरकार ही देखेगी, राज्य सरकार टैंकर इंतजाम को लेकर बातचीत कर सकती है. कोर्ट के साथ ही केंद्र सरकार से कहा कि वह यह सुनिश्चित करें कि ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर किसी भी तरह की रुकावट पैदा ना हो.


ऑक्सीजन की सप्लाई से जुड़ी हुई जानकारी भी दिल्ली सरकार के साथ साझा करें


दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में हम जितने भी पक्षकार हैं उन सब के साथ बैठक करें और जो दुविधा और अनिश्चितता का माहौल है उसको दूर किया जाए.और इस बारे में कल कोर्ट को जानकारी दी जाए. कोर्ट ने इसके साथ ही कंपनियों को भी निर्देश दिया है कि वह ऑक्सीजन की सप्लाई से जुड़ी हुई जानकारी भी दिल्ली सरकार के साथ साझा करें जिससे कि दिल्ली सरकार को जरूर के हिसाब से अस्पताल का भेजने में दिक्कत ना हो. कल कोर्ट ने सप्लायर्स को भी सुनवाई के दौरान मौजूद रहने को कहा है.


सुनवाई दौरान एक वकील है दिल्ली में दवाओं की कमी के मुद्दे पर कोर्ट में दलील दी जिस पर कोर्ट ने कहा कि यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्र सरकार को दिया जाए. कोर्ट कल इस मामले पर भी विचार करेगा.


कंपनी आईनॉक्स ने अपनी परेशानी कोर्ट के सामने रखी


इस सुनवाई के दौरान ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी आईनॉक्स ने अपनी परेशानी कोर्ट के सामने रखते हुए कहा कि हमारा कॉन्ट्रैक्ट पहले 45 अस्पतालों के साथ था लेकिन बाद में दिल्ली सरकार की तरफ से कहा गया कि हमको सिर्फ 17 अस्पतालों को ही ऑक्सीजन देनी है बाद में उन 17 अस्पतालों में 7 अस्पतालों के नाम और जोड़ दिया गया और कहा गया कि इन 24 अस्पतालों को ही ऑक्सीजन सप्लाई करनी है.


केंद्र सरकार ने कहा कि 85 मेट्रिक टन सप्लाई करनी है तो दिल्ली सरकार ने कहा कि 125 मेट्रिक टन सप्लाई करो. लेकिन आईनॉक्स ने सभी 45 अस्पतालों को कुल मिलाकर करीब 200 मेट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई की क्योंकि इन सभी 45 अस्पतालों के साथ कंपनी का करार था. इसी आधार पर आईनॉक्स कंपनी ने कोर्ट से गुजारिश की कि कोर्ट कंपनी को निर्देश देने की किस बात पर अमल करना है और किस अस्पताल को कितनी ऑक्सीजन सप्लाई करनी है क्योंकि इस सुविधा के चलते कंपनी के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो रही है.